Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 18:1 मत्ती 18:2 मत्ती 18:3 मत्ती 18:4 मत्ती 18:5 मत्ती 18:6 मत्ती 18:7 मत्ती 18:8 मत्ती 18:9 मत्ती 18:10 मत्ती 18:11 मत्ती 18:12 मत्ती 18:13 मत्ती 18:14 मत्ती 18:15 मत्ती 18:16 मत्ती 18:17 मत्ती 18:18 मत्ती 18:19 मत्ती 18:20 मत्ती 18:21 मत्ती 18:22 मत्ती 18:23 मत्ती 18:24 मत्ती 18:25 मत्ती 18:26 मत्ती 18:27 मत्ती 18:28 मत्ती 18:29 मत्ती 18:30 मत्ती 18:31 मत्ती 18:32 मत्ती 18:33 मत्ती 18:34 मत्ती 18:35



आस-पास का संदर्भ
मत्ती 18:32 यीशु के उस शिक्षा-अनुक्रम का हिस्सा है जहाँ वे क्षमा और भाइचारे की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। इससे पहले (मत्ती 18:21–35) पतरस ने पूछा कि कितनी बार भैया को क्षमा करना चाहिए, और यीशु ने उस प्रसिद्ध अनुग्रहिक दृष्टान्त—कर्जदार नौकर और उसका साथी—के द्वारा उत्तर दिया। 18:32 उस क्षण का वर्णन करता है जब बड़े स्वामी अपने दास की पहले की विनती और दास के प्रति हुई उसके दयालु व्यवहार का स्मरण कराते हैं।
यह पद परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यह वचन परमेश्वर की उदारता और उस प्रतिदर्श के बीच का विरोध दिखाता है जो मनुष्य के लिए आदर्श है। स्वामी ने पहले दास का पूरा कर्ज क्षमा कर दिया—यह् दिखाता है कि परमेश्वर अनुग्रहपूर्वक पाप-मुक्ति देता है। परन्तु उसी क्षण दास ने अपने साथी पर कठोरता दिखाई; इससे यह स्पष्ट होता है कि प्राप्त अनुग्रह को स्वीकार करना और दूसरों पर भी वही अनुग्रह प्रदर्शित करना परमिषयक अपेक्षा है।
मुख्य शब्द और रूपक
• “दुष्ट दास”—यह शब्द उस व्यक्ति की नैतिक स्थिति और हृदय की दृढ़ता पर प्रकाश डालता है; स्वामी की नजर में वह दोषी है, परन्तु फिर भी क्षमा का अधिकारी बना रहा।
• “पूरा कर्ज क्षमा किया”—यह वित्तीय अनुग्रह का स्पष्ट चित्र है, पर रूपकात्मक रूप में यह बतलाता है कि परमेश्वर हमारे पापों को पूरी तरह, बिना शेष के माफ कर देते हैं।
संबंधित शास्त्र-स्थान
मथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचार
मथ्यू हेनरी ने कहा: "हम पर जो कर्ज माफ हुआ है, वही हमें प्रेरित करे कि दूसरों का भी कर्ज माफ करें।" (संक्षिप्त उद्धरण के रूप में उद्धृत)। अल्बर्ट बार्न्स पर बल देते हैं कि इस दृष्टांत का उद्देश्य चर्च में आपसी सम्बन्धों को सुधारना है, और एडम क्लार्क ने निष्कर्ष निकाला कि वास्तविक मसीही जीवन क्षमा में ही परखा जाता है।
आधुनिक जीवन में अनुप्रयोग
1) व्यक्तिगत स्तर पर: इस पद का आमोद हमें याद दिलाता है कि हम जिन अनुग्रहों के अधिकारी बने हैं—उनका असर हमारे व्यवहार में दिखना चाहिए। यदि हम दूसरों के प्रति कठोर रहते हैं जबकि हमें माफी मिली है, तो हम उस अनुग्रह की भावना को धोखा दे रहे हैं।
2) सामुदायिक स्तर पर: चर्च और परिवार में मतभेदों को सुलझाने का मार्ग क्षमा है; यह स्थायी सामंजस्य और आध्यात्मिक स्वास्थ्य का आधार है।
व्यावहारिक कदम: जब कोई अपमान या चोट पहुंचाए, पहले अपने प्राप्त कर्ज (यानी परमेश्वर की दी हुई माफी और दया) को याद करें; फिर उस स्मृति को व्यवहार में लाकर क्षमा का निर्णय करें।
निष्कर्ष
मत्ती 18:32 हमें दोहरा परीक्षण कराता है—परमेश्वर की उदारता को समझना और उसी अनुग्रह को दूसरों पर लागू करना। कर्तव्य बस अनुकरण तक सीमित नहीं; यह दैनंदिन व्यवहार, संबंधों की मरम्मत और समुदाय के जीवन में भी प्रकट होना चाहिए।