मत्ती 25:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसके स्वामी ने उसे उत्तर दिया, कि हे दुष्ट और आलसी दास; जब तू यह जानता था, कि जहाँ मैंने नहीं बोया वहाँ से काटता हूँ; और जहाँ मैंने नहीं छींटा वहाँ से बटोरता हूँ।

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मत्ती 25:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत.artist (मत्ती 25:26) का अर्थ

यह वचन उसी दास से जुड़ा है, जिसे उसकी कमाई नहीं हुई और जिसने अपने स्वामी के साथ मिली-जुली उम्मीद के अनुसार जवाब नहीं दिया। यहाँ यीशु दास की निष्क्रियता और आलस्य की निंदा करते हैं—ताकि यह स्पष्ट हो कि अविश्वास या निष्क्रियता परमेश्वर की नेक-नियतियों के पालन में बाधक बनती है। दास का उत्तर, “हे दुष्ट और आलसी दास,” स्वामी के निर्देशों के प्रति असंवेदनशीलता और जिम्मेदारी की कमी की कठोर चेतावनी है।

संदर्भित पृष्ठभूमि

यह परिकल्पना तब है जब एक स्वामी अपने नौकरों को एक-एक धन दे कर जाता है, ताकि वे उसका लाभ बढ़ाएं। दो निष्पादनशील दासों ने निवेश किया और लाभ कमाया; एक ने केवल जोखिम से बचने के लिए चुपचाप रखा। मसीह का यह उपदेश बताता है कि परमेश्वर के दिए हुए अवसरों पर निष्क्रियता, निष्कामता है और यह अंततः दयारहित परिणाम देती है।

व्याख्यात्मक विचार

  • स्वामित्व और दायित्व: दास के पास धन था, पर वह उसे उन्नत नहीं कर पाया; यह दायित्व का उल्लंघन है।
  • ज्ञान की कमी बनाम आलस्य: जहाँ जानकर भी जोखिम उठाने की जगह न किया गया, वहां परिणामस्वरूप चूक हुई।
  • न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया: दुष्ट और आलसी दास की श्रेणी स्वामित्व के प्रति अदूरदर्शिता को दर्शाती है; यह ईश्वर के साथ हमारी जवाबदेही पर प्रकाश डालती है।

संयोजनात्मक विषय-वस्तु

  1. जिम्मेदारी का अस्वीकार एक क्षुद्र प्रयास भी नहीं देता; उस पर दया और न्याय दोनों की कसौटी है।
  2. विश्वासयोग्यता और साहस: ईश्वर के दिए अवसरों पर आध्यात्मिक कुशलता अपनाने से ही फल मिलता है।
  3. आसक्ति बनाम निष्क्रियता: सिर्फ चुप रहना या नुकसान को संभालना भी नुकसानदायक है—हमें विनियमन के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

अन्य ग्रंथों से संयोग (Cross-References)

1) लूका 19:12-27— एक समान सिद्धांत जहां प्रतिभाओं के साथ निष्क्रियता पर चेतावनी मिलती है; ईश्वर के राज्य के लिए सक्रिय सेवा की महत्ता रिक्त नहीं होनी चाहिए।

2) मत्त 28:19-20— प्रेरितों को विश्व-प्रचार के लिए भेजना, कर्मशीलता और निष्ठा की मांग करता है; निष्क्रियता असफलता के समान है।

3) जम 2:14-17— विश्वास के साथ कर्म अनिवार्य हैं; यह बताता है कि केवल विश्वास से नहीं चलता, कर्म भी चाहिए।

हल्का व्यावहारिक निष्कर्ष

अपने दायित्वों में सक्रिय रहें: दायित्व के साथ जोखिम उठाने से ही आंतरिक वृद्धि और परमेश्वर के राज्य के लिए फल मिलते हैं। विचार करें कि आप किन अवसरों पर निष्क्रिय रहते हैं और किस प्रकार ईश्वर के साथ विश्वस्त कदम उठा सकते हैं—ताकि आपकी मेहनत और विश्वास दोनों फल दें।

उद्धरण और स्रोत संकेत

यदि आप चाहते हैं, मैं Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से छोटे उद्धरण खोज कर जोड़ सकता हूँ—केवल आवश्यक और उद्धरणात्मक संदर्भ के साथ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 25:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब उसके स्वामी ने उसको बुलाकर उससे कहा, ‘हे दुष्ट दास, तूने जो मुझसे विनती की, तो मैंने तो तेरा वह पूरा कर्ज क्षमा किया।

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तू अपने मुँह से अपना अधर्म प्रगट करता है, और धूर्त लोगों के बोलने की रीति पर बोलता है।

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