Old Testament
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मत्ती 25:17 — उसी रीति से जिसे दो मिले थे, उसने भी दो और कमाए
यह वाक्य उन दासों के दार्शनिक परिदृश्य से जुड़ा है जिन्हें प्रभु ने अपने धन का भाग देकर भेजा था। पहले दो दासों को पाँच-चौपहल दिया गया, यह तीसरे दास को मात्र एक के साथ छोड़ दिया गया था; अब उक्त दो दास नया धन लेकर लौटते हैं, और पहली दो निश्चय ही सफल मुद्रा-चाल दिखाई देते हैं—दोनों ने अपने-अपने हिस्से को दोगुना कर दिया है। यह पाठ उनके विश्वासयोग्यता, लगन और निर्णय की पुष्टि करता है कि प्रतिभा और अवसर के साथ विश्वास भी सक्रिय होना चाहिए।
क्या दिखाता है यह पाठ परमेश्वर या विश्वास के बारे में
यहाँ परमेश्वर का गुण वास्तव मेंibwa — उसके न्याय और कृपा का संतुलन। दासों के प्रति स्वामी का व्यवहार न्यायपूर्ण है: जो मिला, उसने परिश्रम से उसे बढ़ा दिया। इससे स्पष्ट होता है कि परमेश्वर उन पर भरोसा करता है जो उसे छोड़कर नहीं जाते, बल्कि उसे समृद्ध बनाने के लिए अपने उपहारों को मेहनत से विकसित करते हैं। यह विश्वास का एक सक्रिय, परिणाम-उन्मुख सिद्धांत है: अवसर मिलने पर उसे बुद्धिमानी से उपयोग करना और प्रभु के देगा בפ में भरोसा देखना।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्रों की स्पष्टता
- धन का दान: यहाँ धन एक-एक दिए गए अवसर का प्रतीक है, जिसे दास ने समझदारी से उपयोग किया। दिनचर्या में यह प्रभु के उपहारों—किताबें, समय, प्रतिभा—के रूपक के रूप में भी समझा जा सकता है।
- "कमाए": मेहनत और भक्तिपूर्णता से परिणाम पाने की क्रिया है; यह निष्क्रियता के विपरीत है।
संलग्न संदर्भ—सहायकारी बोध
- लूका 19:12-26 (पैग़म्बर की कहावत-तृतीय भाग) में समान विचारधारा मिलती है, जहाँ सेवकों के साथ उनका रात्रि-निर्धारण और गणना जुड़ी है।
- मत्ती 24:45-46, 25:14-30 में दास-भाव और उत्तरदायित्व की कथा एक साथ आती है, ताकि विश्वासी अपना समय और संसाधन किस प्रकार प्रभु के काम में लगाएं, यह स्पष्ट हो सके।
प्रत्येक शब्द का छोटा व्याख्यान
- “इसी रीति से”: यह कहकर स्वामी ने उन दोनों दासों के व्यवहार के समान अपेक्षा को रेखांकित किया है—जो सक्षम हैं वे भी सक्रिय रहें और जो कम हैं, वे भी मेहनत करें।
- “दो और कमाए”: उपलब्ध अवसरों पर जवाबदेही के साथ वृद्धि का संकेत है; यह निष्क्रियता से परे एक जीवन-संयम दर्शाता है।
आज के लिए अनुप्रयोग
तत्संबंधी विचारधाराएँ—नोट्स
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से समेकित सामान्य निष्कर्ष देता है: प्रभु के साथ विश्वसनीयता और मेहनत की मांग है; दास का व्यवहार उसी के अनुसार परिणाम लाता है।
उद्धृत सुझाव: Henry के विचारों में यह धारणा मिलती है कि दासों की सफलता उनके विश्वास और कर्म पर निर्भर है; Barnes इसे दायित्व और अवसर के उचित मिलन के रूप में देखते हैं; Clarke इसे परमेश्वर के परीक्षण-केस के रूप में मानते हैं जहाँ कर्म-प्रतिफल स्पष्ट है।
क्रॉस-रेफरेंसेस: - लूका 19:13–19—नये दासी-धारण की पुनरावृत्ति और पुरस्कार-प्रणाली का संकेत। - मत्ती 28:19–20—विश्वास को फैलाने के लिए दायित्व और सेवा की भूमिका।
निष्कर्ष: यह पाठ हमें स्मरण कराता है कि परमेश्वर के दिए गए अवसरों को पहले से अधिक उपयोगी बना कर विश्वास को जीवंत बनाएं।