Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 25:1 मत्ती 25:2 मत्ती 25:3 मत्ती 25:4 मत्ती 25:5 मत्ती 25:6 मत्ती 25:7 मत्ती 25:8 मत्ती 25:9 मत्ती 25:10 मत्ती 25:11 मत्ती 25:12 मत्ती 25:13 मत्ती 25:14 मत्ती 25:15 मत्ती 25:16 मत्ती 25:17 मत्ती 25:18 मत्ती 25:19 मत्ती 25:20 मत्ती 25:21 मत्ती 25:22 मत्ती 25:23 मत्ती 25:24 मत्ती 25:25 मत्ती 25:26 मत्ती 25:27 मत्ती 25:28 मत्ती 25:29 मत्ती 25:30 मत्ती 25:31 मत्ती 25:32 मत्ती 25:33 मत्ती 25:34 मत्ती 25:35 मत्ती 25:36 मत्ती 25:37 मत्ती 25:38 मत्ती 25:39 मत्ती 25:40 मत्ती 25:41 मत्ती 25:42 मत्ती 25:43 मत्ती 25:44 मत्ती 25:45 मत्ती 25:46



मत्ती 25:31 का संदर्भ: महिमा और राजसत्ता की दृष्टि
यह पद मनुष्य का पुत्र (येशू) अपनी महिमा में आ जाने के सन्निकट संदेश के साथ शुरू होता है। वह स्वर्गदूतों के साथ आकर अपने सर्वोत्कृष्ट अधिकार और न्याय के साथ सिंहासन पर विराजमान होगा। यह दृश्य अंतिम निर्णय के दिन का दृश्य है, जहां संसार के इतिहास का सारांश और हर रंग के लोगों का कड़ा न्याय सामने आता है।
ईश्वरीय महिमा और विश्वास के प्रकटन
यह वचन बताता है कि ईश्वर का लक्ष्य सिर्फ दया या चेतावनी नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट, दृढ़ राजसत्ता की स्थापना है। परमेश्वर अपने महिमामय आत्म-प्रकाश से इतिहास को निर्णायक दिशा देते हैं, और उसका चयन-संकेत यह है कि जो विश्वास करके उन पर निर्भर रहते हैं, वे अंत में उनकी महिमा के साथ सम्मिलित होंगे। यह संयुक्त रूप से दया और न्याय का परम वास्तविक संयोजन है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
अन्य संबंधित पवित्र पाठ
- पाठ संकेत करता है कि भविष्य में महिमा के समय स्वर्गदूत भी इस क्रिया में भागीदार होंगे; यह दिखाता है कि दिव्य प्रशासन समुदायिक और समुदाय-सम्बंधित कार्यों के साथ जुड़ा है।
– “जो अंत तक धैर्य धारण करेगा” जैसी शिक्षा से मेल खाते उपदेश, जो विश्वास की वास्तविक परीक्षा दर्शाते हैं।
हिंदी व्याख्या के लिए 2-3 cross-references और उनके अर्थ
1) जब वह आएगा और सिंहासन स्थापित करेगा—यूहन्ना 5:22-27 से संबद्ध विचार: पिता ने न्याय करने का अधिकार पुत्र को दिया है; यहाँ न्याय और सत्ता का संयोजन स्पष्ट होता है।
2) स्वर्गदूतों का साथ आना—मत्ती 13:41 और मसीह के क्रोधपूर्ण न्याय के चित्रों से प्रेरणा: दिव्य दूत ज्ञान और साक्ष्य के साथ न्याय करते हैं।
3) महिमा का स्रोत — रोमी 2:7-10 के अनुसार, जो धैर्य से भरे रहते हैं, उन्हें पुरस्कार मिलता है; यह क्रम दिखाता है कि महिमा बराबर क्रिया-प्राप्ति से जुड़ी है।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
हम कैसे अपने विश्वास को इस महिमा-स्वरण से जोड़ें? पहले, भरोसा रखें कि अन्तिम days में ईश्वर की महिमा पूरी तरह प्रकट होगी, चाहे वर्तमान में परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों। दूसरे, जीवन में क्षमा, निष्ठा और दयालुता के साथ व्यवहार करें; क्योंकि राजा के आंतरिक नियमों में ये गुण अस्थिर नहीं होते। अंत में, जो लोग धैर्य और विनय से जीते हैं, वे अंततः उसके साथ समान प्रतिष्ठा पाएंगे।
आख़िरी सार
यह वचन एक प्रेरणा है कि ईश्वर की महिमा और न्याय एक साथ पूरी होगी। विश्वास का केंद्र यह है कि मसीह आते हैं, स्वर्गदूतों के साथ, और वह अपने राज्य के सिंहासन पर विराजमान होंगे—एक ऐसी दृष्टि जो आज के जीवन को धैर्य, आस्था और ईमानदारी के साथ जीने का उद्देश बनाती है।
कुल मिलाकर, यह उपदेश हमें याद दिलाता है कि अंत समय की महिमा में ही सत्य के पूर्ण न्याय का उद्घाटन होगा; हमारा भाग उन लोगों के समान है जो उस दिन के लिए तैयार रहते हैं।
उद्धृत लेखन से महत्वपूर्ण विचार—
“जब मनुष्य का पुत्र अपनी महिमा में आएगा, और सब स्वर्गदूत उसके साथ आएँगे तो वह अपनी महिमा के सिंहासन पर विराजमान होगा।”