Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
नहेम्याह 4:1 नहेम्याह 4:2 नहेम्याह 4:3 नहेम्याह 4:4 नहेम्याह 4:5 नहेम्याह 4:6 नहेम्याह 4:7 नहेम्याह 4:8 नहेम्याह 4:9 नहेम्याह 4:10 नहेम्याह 4:11 नहेम्याह 4:12 नहेम्याह 4:13 नहेम्याह 4:14 नहेम्याह 4:15 नहेम्याह 4:16 नहेम्याह 4:17 नहेम्याह 4:18 नहेम्याह 4:19 नहेम्याह 4:20 नहेम्याह 4:21 नहेम्याह 4:22 नहेम्याह 4:23



नहेम्याह 4:4 का तुरंत-से-जुड़ाव और पाठ का अर्थ
यह verse नहेम्याह की टोली के कार्य-युद्ध के समय प्रकट हुआ है, जब वे ईरानी साम्राज्य के असर से लौटकर Երूशलेम के फाटक-फाटकों को फिर से मरम्मत करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। प्रतिद्वंद्वी आक्रान्ताओं के तानों और आक्षेपों के बीच नेहेम्याह और उसके साथी परमेश्वर के सामने अपनी आस्था और दुआ को केंद्रित रखते हैं। यह दुआ एक भावनात्मक-आत्मा-भरी प्रार्थना है, जिसमें वे ईश्वर से उनके अपमान का प्रतिशोध माँगते हैं और दुष्टों को उनके कदमों पर परिणामदेहित करने की विनती करते हैं।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से क्या मिलता है
इस वचन में परमेश्वर के प्रति विश्वास की दृढ़ता स्पष्ट है—यद्यपि दुश्मन तिरस्कर करते हैं, परन्तु परमेश्वर के समक्ष सुरक्षा और न्याय की प्रत्याशा बनी रहती है। नेहेम्याह अपने दिल को उद्धारक परमेश्वर के प्रति उन्नत रखते हैं: वह सुनवाई की विनती करते हैं कि जो बदला मांग रहे हैं, उसका निर्णय ईश्वर ही करें। यह हृदय-झुकाव परमेश्वर के विरुद्ध संघर्ष के समय भी शांति और न्याय पर अडिग रहने का संकेत देता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबंधित पाठ
इन विचारों के संकल्पना में कुछ अन्य स्थलों से प्रेरणा मिलती है:
यहाँ एक पाठ का छोटा-सा संकेत यह है कि कठिन समय में भी ईश्वर के लिए दृष्टिकोण—जो न्याय और उद्धार के प्रति आश्रय देता है—अवलोकन योग्य है।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
1) संघर्ष के समय भी परमेश्वर के सामने आत्म-शांति बनाए रखें: अपमान होने पर भी अपना भरोसा न खोएं; ईश्वर से न्याय और सुरक्षा की याचना करें।
2) समुदाय की गरिमा के लिए दुआ करें: समूहिक अपमान से जूझते समय एक-दूसरे के साथ सहारा बनें और परमेश्वर की न्याय-धारा पर भरोसा रखें।
3) विवेकपूर्ण प्रतिशोध नहीं, पर ईश्वर के न्याय की प्रतीक्षा करें: पंथी-तकरार में व्यक्ति-धैर्य और नैतिकता बनाए रखें; परिणाम ईश्वर के हाथ में है।
पक्का-संरचना का सार
नहेम्याह 4:4 एक ऐसी दुआ है जो विश्वास को खतरे में भी बनाए रखने की सीख देती है: प्रभु, सुनो; हमारे अपमान को तुम ही उठाओ और दुष्टों के लिए उनके कर्म के अनुसार परिणाम निर्धारित करो। यह साहस और निर्भयता की दिशा देता है कि हम वर्तमान कठिनाइयों के बीच भी ईश्वर के न्याय पर निर्भर रहें और सामुदायिक गरिमा के लिए खड़े रहें।
संक्षेप में, यह पाठ हमें यह याद दिलाता है कि कठिन समय में ईश्वर के विरुद्ध नहीं, बल्कि उनके नाम के लिए धैर্য, प्रार्थना और न्याय की राह पकड़नी चाहिए।
सम्बद्ध उद्धरण (सार): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेस्ट उद्धरणों के छोटे अंश आवश्यक हों तो उधृत किए जा सकते हैं; पूर्ण टेक्स्ट यहाँ नहीं दिए गए। ध्यान दें कि यदि किसी चुने हुए टिप्पणीकार के स्पष्ट वाक्यांश उपलब्ध हों, उसे संक्षेप में संदर्भित किया जा सकता है।
Cross-references: संदर्भ-आधार पर—(1) विश्वास-याचना में न्याय की माँग, (2) ईश्वर के निर्णय पर भरोसा, (3) समुदायिक गरिमा की सुरक्षा के लिए प्रार्थना।