Old Testament
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नहेम्याह 5:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि काम का भार प्रजा पर भारी था। हे मेरे परमेश्वर! जो कुछ मैंने इस प्रजा के लिये किया है, उसे तू मेरे हित के लिये स्मरण रख।
नहेम्याह 5:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहेम्याह 5:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नहेम्याह 13:31 (HINIRV) »
फिर मैंने लकड़ी की भेंट ले आने के विशेष समय ठहरा दिए, और पहली-पहली उपज के देने का प्रबन्ध भी किया। हे मेरे परमेश्वर! मेरे हित के लिये मुझे स्मरण कर।

नहेम्याह 13:14 (HINIRV) »
हे मेरे परमेश्वर! मेरा यह काम मेरे हित के लिये स्मरण रख, और जो-जो सुकर्म मैंने अपने परमेश्वर के भवन और उसमें की आराधना के विषय किए हैं उन्हें मिटा न डाल।

नहेम्याह 13:22 (HINIRV) »
तब मैंने लेवियों को आज्ञा दी, कि अपने-अपने को शुद्ध करके फाटकों की रखवाली करने के लिये आया करो, ताकि विश्रामदिन पवित्र माना जाए। हे मेरे परमेश्वर! मेरे हित के लिये यह भी स्मरण रख और अपनी बड़ी करुणा के अनुसार मुझ पर तरस खा।
नहेम्याह 5:19 का अर्थ
इस पद का मूल भाव है—श्री नहेम्याह अपनी आत्म-चिन्ता को परम परमेश्वर के सामने रखकर यह विनती करते हैं कि जो भी उन्होंने दास-जन के बीच किया है, वह परमेश्वर स्मरण करे। उनसे प्रेरित होकर यह परमेश्वर-व्यक्ति समर्पण, जिम्मेदारी और आस्था का संकेत देता है कि सेवक्री कार्य के बोझ के बावजूद सच्ची सन्तुष्टि और मार्गदर्शन केवल परमेश्वर की कृपा से संभव है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीति-संरचना में नहेम्याह ने यह दिखाया कि यह सफल वास्तुकला या कूटनीतिक विजय नहीं, बल्कि प्रजा के ऊपरी दबावों और दायित्वों के कारण उठे असंतोष को कैसे संभाला जाए, यह उनकी प्राथमिकताओं में है। गरीबों और शक्तिशाली वर्ग के बीच तनाव बढ़ा; वेतन-धन और रोज़मर्रा की जरूरतों के बारे में शिकायतें प्रकट हुईं। नहेम्याह ने एक बार फिर परमेश्वर के सामने आत्म-स्वीकृति और प्रार्थना का रास्ता अपनाया—यह दिखाता है कि नेतृत्व में नैतिकता और दायित्व-संयम परमेश्वर की स्मरण-याचनाओं के साथ जुड़ा हुआ है।
व्याख्यात्मक विवेचन
कथा से जुड़ी छोटी थीमैटिक पंक्तियाँ
सीधे पाठ के साथ अन्य प्रासंगिक संदर्भ
1) उत्पत्ति 22:14 की स्मरण-याचनात्मक धारणा—पूर्वक परमेश्वर के आशीर्वाद का स्मरण और प्रभु-याप्ति के साथ आस्था की पूर्ति।
2) यशायाह 58:9—न्यायपूर्ण समुदाय के लिए प्रार्थना और सहायता का मार्ग—यही प्रेरणा नहेम्याह के अनुरोध में उभरती है।
3) अति-आवरण के समय सामुदायिक दायित्व विभाजन—भूख और गरीबी के बीच संतुलन बनाने की महत्ता दोनों संदर्भों में प्रकट होती है।
निष्कर्ष और व्यवहारिक उपाय
इस पद से प्रेरणा: नेतागण के लिए बोझ सिर्फ़ निजी प्रयोजन नहीं होना चाहिए; वे प्रजा के कल्याण के लिए परमेश्वर की स्मरण-याचनाओं में स्थिर रहें। जब भीतर-भीतर भार बढ़ जाए, तब प्रभु के साथ प्रार्थना-आश्वासन लेने से स्पष्ट दिशा मिलती है।
नोट्स
नीचे उद्धृत चारित्रिक टिप्पणियाँ (केवल आवश्यक रूप से) साहित्योचित हैं:
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संकलन से सतार्नोपयोगी निष्कर्ष: वे सभी बताती हैं कि नेतृत्व में नैतिकता, दायित्व-निष्ठा और परमेश्वर की सहायता की अपेक्षा अनिवार्य है; उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि प्रजा के दबाव के बीच भी ईमानदारी और करुणा को बनाए रखना चाहिए।
कथा-उद्धरण संवाद
“क्योंकि काम का भार प्रजा पर भारी था।” यह वही भाव है जिसे महत्त्वपूर्ण के रूप में उद्धृत किया गया है कि सेवक-कार्य के भार में भी परमेश्वर की स्मरण-याचनाओं के साथ मार्गदर्शक बनना चाहिए।