Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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गिनती 11:20 का पाठ और उसके भावार्थ का संक्षिप्त परिचय
पद 11:20 में पारिश्रमीक संदर्भ है जहाँ परमेश्वर के लोगों के लिए एक विशिष्ट परीक्षण का समय आता है: समुदाय के भोजन की बात एक बार फिर चुनौती बन जाती है, क्योंकि लोगों को यहोवा की उपस्थिति में विश्वास और संतुष्टि के बीच संतुलन बनाना है। इस आयत में यहोवा के विरुद्ध उनकी शिकायत का परिणाम स्पष्ट है—एक संघर्ष जिसे उन्होंने मिस्र के दिनों के स्मरण से जोड़ दिया था। यह पाठ हमें यह दिखाता है कि ईश्वरीय आशीषों के साथ-साथ आस्थाग्रंथ और धैर्य की आवश्यकता किस प्रकार मानव स्वभाव को प्रस्तुत करती है।
पद के भीतर का सार
यहां लोग एक महीना भर उसी भोजन को खाने से मना नहीं करते, जिसे वे पहले से अनुभव कर चुके हैं, और जब तक वह खाद्यान्न उनकी नथनों से न निकल जाए, तब तक उसे खाते रहते हैं। ऐसी अवस्था में लोग यहोवा की पवित्र उपस्थिति के बीच भी तुच्छता और रोष से भरे रहते हैं—वे मिस्र के समय के स्मरणों से प्रेरित होकर भगवान के माधुर्य और प्रवाह को नहीं देखते।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
मुख्य पाठ यह है कि चूँकि परमेश्वर ने स्वयं उनके yfir में सम्पन्न आशीषें दीं, फिर भी निराशा और शिकायत में पड़े रहने से वे आशीषों की चमक नहीं देखते। विश्वास और धैर्य बनाये रखना, विशेषकर कठिन समय में, ईश्वर के मध्य में रहते हुए भी महत्वपूर्ण है। यहोवा के साथ चलना कभी-कभी उनकी योजनाओं के अनुरूप तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता, पर उससे मिलने वाली खाद्य और आत्मिक आहुति में विश्वास को बनाए रखना धर्मी जीवन का गठन करता है।
अन्य पवित्र पाठ से तुलनात्मक दृष्टि
- यहोशू का समयांतरण और प्रवास के दौरान, लोग निराश होकर भोजन की कमी के कारण शिकायत करते हैं; परमेश्वर परिवर्तनशील मदद दिखाते हैं और व्यवस्थाओं के अनुसार उन्हें आशीष देते हैं।
- मार्गशास्त्रीय उदाहरण में, लोग मुश्किल समय में आश्वासन माँगते हैं, पर परमेश्वर की कृपा के संकेत उनके सामने स्पष्ट रहते हैं; यहाँ भी वही दयालु क्रिया ध्यान खींचती है।
- कुछ अन्य psalmist गीतों में भक्तों द्वारा कठिन समय के बीच भी ईश्वर की पवित्र इच्छा के अनुरूप आस्था बनाए रखने की exhortation मिलती है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त विवेचन
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- कठिन समय में भी ईश्वर के साथ धैर्य बनाए रखें और उनकी देखरेख को स्वीकार करें; आपूर्ति की कमी आ सकती है, पर ईश्वर की कृपा अस्थिर नहीं रहती।
- मिस्र के स्मृतियों से प्रेरित न होकर, वर्तमान की आशीषों के प्रति कृतज्ञ रहें और परमेश्वर की उपस्थिति में भरोसा बनाए रखें।
संक्षेप में निष्कर्ष
गिनती 11:20 हमें सिखाता है कि ईश्वर की मानव-सेवा में आस्था का परीक्षण तब आता है जब निरंतर आशीष भी एक साथ कठिनाई के साथ मिलती है। तब भी विश्वास को पुनः सम्हालना चाहिए और यह स्वीकार करना चाहिए कि परमेश्वर मध्य में है, और उसकी इच्छाओं के अनुसार भोजन और जीवन की राह मिलती है। यही सच्चे विश्वास, स्मरण और समर्पण का संदेश है।
टिप्पणी और पूर्व-व्याख्या संकेत
यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर के चयनों के बीच भी उत्साह और विश्वास का संगत होना चाहिए।