Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
गिनती 11:1 गिनती 11:2 गिनती 11:3 गिनती 11:4 गिनती 11:5 गिनती 11:6 गिनती 11:7 गिनती 11:8 गिनती 11:9 गिनती 11:10 गिनती 11:11 गिनती 11:12 गिनती 11:13 गिनती 11:14 गिनती 11:15 गिनती 11:16 गिनती 11:17 गिनती 11:18 गिनती 11:19 गिनती 11:20 गिनती 11:21 गिनती 11:22 गिनती 11:23 गिनती 11:24 गिनती 11:25 गिनती 11:26 गिनती 11:27 गिनती 11:28 गिनती 11:29 गिनती 11:30 गिनती 11:31 गिनती 11:32 गिनती 11:33 गिनती 11:34 गिनती 11:35



गिनती 11:23 पर टिप्पणी
पद यहोवा की उद्घोषणा पर मोशे से संवाद कराता है और इस समय इस्राइल के नेतृत्व के संदिग्ध, भयभीत और असंतुष्ट मन की स्थिति को उभारता है। ईश्वर ने इस्राइल के लोगों के गिनती के काम के बारे में संकेत दिया कि वे कब नए सिरे से भरोसा करें और किस प्रकार उनकी निर्भरता उसकी कृपा और वचन पर हो। मूसा के उत्तर और यहोवा का उत्साहपूर्वक प्रश्न यह दिखाता है कि परमेश्वर का हाथ कितना लंबा, कितना समर्थ है—यही मूल विचार है: ईश्वर के वचन को पूरा करने की क्षमता किसी भी परिस्थिति से बड़ी है।
मुख्य विचार
यहोवा ने मूसा से कहा: क्या मेरा हाथ छोटा हो गया है? इस वचन के द्वारा ईश्वर अपनी विश्वसनीयता और सामर्थ्य को दोहराते हैं। निर्देश साफ है: भरोसा रखें, वचन पूरा होगा। यह शिक्षा उन समयों के लिए प्रचलित है जब लोग विपत्तियों और अनजाने संकेतों के कारण निराश हो जाते थे; परन्तु परमेश्वर का सत्य और शक्ति अचल हैं।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध उपदेश एवं क्रॉस-रेफरेंसे
1) यहूदी कुतुबियों में विश्वास के संघर्ष पर अन्य मार्गदर्शक उद्धरण उपलब्ध हैं जो यह समझाते हैं कि परमेश्वर के वचनों के पूरा होने में देरी नहीं होती।
2) प्रेरितों के काम में प्रेरक उदाहरण मिलते हैं जहाँ स्पष्ट किया गया कि परमेश्वर किस प्रकार अपनी योजना को पूरा करते हैं, चाहे मानव समझ से परे हो।
3) उनके विवेक में भी यह सिद्धान्त है कि परमेश्वर की शक्ति निर्बाध है और उसका हाथ लंबा है; वह अपने उद्देश्य को सिद्ध करेगा।
व्यावहारिक विचार
हम अनुभव करें कि कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर के वचनों पर टिके रहना चाहिए। छोटी-सी बाधा भी यदि दिखे, तो भय न लें; परमेश्वर का हाथ कभी छोटा नहीं होता। यदि आप जीवन के किसी क्षेत्र में असफलताओं से घिरे हों, तो यह विचार सामने लाएं: क्या मैं ईश्वर के वचन की पुष्टि के लिए धैर्य और विश्वास दिखा रहा हूँ?
छोटा-सा निष्कर्ष
गिनती 11:23 का सार यह है कि परमेश्वर के हाथ की क्षमता अपरिमित है और उसका वचन पूरा होगा। मानव समझ की हदों के बावजूद, ईश्वर का संकल्प अटल है और उसकी कृपा—निश्चित है। यहूदियों के लिए भी और आज के विश्वासियों के लिए भी यह प्रेरणा है कि विश्वास में बने रहें, क्योंकि सत्य यह है कि ईश्वर का हाथ लंबा है।
उद्धृत उद्धरणों के नोट
यदि आवश्यकता हो तो नीचे के अनुसार प्रसिद्ध पवित्र-ग्रंथ टिप्पणीकारों के विचार शामिल किए जाते हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke; इन्हें सूक्ष्म रूप से समाहित करते समय उनके साफ-सुथरे वाक्यों के छोटे अंश और विचार उद्धृत किए जा सकते हैं।