Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 11:21 — Immediate setting
यह पद Moses के समय की कठिन परिस्थिति दिखाता है, जब परमेश्वर ने इस्राइल के उद्धार के क्रम में माँस के लिए माँग उठाई। मूसा ने GOD’s लोग के भीतर अपने लोगों की संख्या छः लाख प्यादे बताईं, और परमेश्वर ने उनके इन शब्दों को चुनौती बनते देखा—क्या इतनी माँस एक महीने में उपलब्ध कराई जा सकती है? यह दृश्य हमें परमेश्वर की योजना और मानव आस्तित्व के सीमाओं के बीच की रस्साकशी दिखाता है।
क्या यह पाठ परमेश्वर की सत्ता या विश्वास के बारे में सिखाता है?
इस उद्धरण से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपनी शक्ति से सभी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सक्षम है, भले ही मानव समझ में वह असंभव लगे। Moses के विद्यार्थी/जनता की मांग देखते हुए, प्रभु ने स्पष्ट किया कि वे कितनी माँस प्राप्त कर पाएंगे—यह एक परीक्षण भी है कि क्या वे प्रभु के वचन पर भरोसा करते हैं। यह स्थिति विश्वास के वास्तविक परीक्षण का संकेत देती है: जब आवश्यकता असाधारण हो, तब भी परमेश्वर के वचन पर टिके रहने की महत्ता।
जरूरी शब्द और चित्रण की व्याख्या
अन्य शुभ संदर्भ
यहाँ के विचारों से जुड़े कुछ क्रॉस-रेफरेंस मारखाने योग्य हैं:
आज के पाठ पर अनुप्रयोग
हम में से कई बार ऐसा सोचते हैं कि हमारी जरूरतें असंभव हैं—परमेश्वर की पूर्ति से बाहर नहीं। प्रभु के वचन पर विश्वास बनाये रखना और अपने भय को कम करने के लिए निम्न बातें अपनाएँ:
संक्षिप्त समेकन
गिनती 11:21 में Moses के खुले प्रश्न और परमेश्वर की उत्तर-योजना एक साथ दिखाते हैं कि परमेश्वर की कृपा मानव विवेक से परे है और उसका विश्वास परीक्षण भी पाठनार्थियों को आस्था के गहरे आयामों से परिचित कराता है। आगामी घटनाएँ यह स्पष्ट करती रहेंगी कि परमेश्वर अपनी सत्ता से आवश्यकताओं की पूर्ति कर देता है, जब उसके लोगों का विश्वास बना रहता है।
मूल उद्धरण- संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के मिलते-जुलते विचारों के समेकन में, उनके स्पष्ट बिंदु और सामान्य रुझान नीचे पंक्तिबद्ध हैं।