Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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गिनती 31:38 का अर्थ
इस आयत में क्रमवार रूप से गिने गए गाय-बैल की संख्या और उन्हें ठहराने वाले यहोवा के कर का उल्लेख है। सरल शब्दों में कहें तो यह स्पष्ट करता है कि युद्ध-विध्वंस के बाद संपत्ति-वसूली के समय यह कुल मिलाकर चूँकि यहोवा के पवित्र उद्देश्य के लिए रखा गया था, इसलिए उसका भाग उन कर्मकरों के हाथों गया जो यहोवा के साथ थे।
संदर्भ-जीवनी और पृष्ठभूमि
उक्त अध्याय में मिस्त्र से निकले इस्राएली युद्ध से उभरे अधिकारों के विभाजन का क्रम दिखाया गया है। पुनः गौर करने योग्य यह है कि सेनाओं के परित्याग और संपत्ति के वितरण में यहोवा के निर्देशों का पालन किया गया। 31 अध्याय पूरे एक अभियुक्त-स्तर के आदेशों और विजयों के बाद की रणनीति और पूर्ति को चित्रित करता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटी थीम-सूची
अनुदीर्घ संदर्भ-व्याख्या (Cross-references)
1) निर्गमन 30:13-16 — जड़-भेद से यह दिखाता है कि इतिहास में यहोवा के लिए निर्धारित दान और भाग-निर्धारण कैसे लागू होता है। संकल्पना यह है कि देह-यात्रा के बाद भी परम-नियमों का पालन आवश्यक है।
2) याकूब 1:17 — हर अच्छी देन और संपूर्ण उपाय परमेश्वर से आता है; इसका तात्पर्य यह है कि धन-संपदा का वितरण भी ईश्वर के विधान के अनुसार होता है।
3) साफ़िया 2:5 — समुदाय के भीतर न्याय और भाग-संपत्ति का भागीदारी नियमों के अनुसार होना चाहिए।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम देखते हैं कि प्रभुवचन में सभ्यता और आध्यात्मिक-संतुलन तब बना रहता है जब संपत्ति पर भी परमेश्वर की योजना अनुसार बोझियुक्त सेवा-भाग निर्धारित किया जाता है। यह धार्मिक-संरचना में क्रम, पवित्रता और ईमानदारी का संदेश देती है।
दृष्टि-चिन्ह और उद्धरण (कथन-संदर्भ)
मत्ती हेनरी के विचारों में यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर की व्यवस्था के अनुसार किया गया भाग-संरक्षण अभ्यास, समुदाय की पवित्रता और एकता को मजबूत बनाता है। एडम क्लार्क का मत है कि यहोवा के आदेश के अनुसार भाग-आवंटन का स्वरूप सामाजिक-धार्मिक व्यवस्था का प्रमाण है। आवश्यकता भर में इन उद्धरणों का प्रयोग केवल संकल्पनात्मक संदर्भ के लिए है:
“The Lord’s portion was laid up for the consecrated” (Matthew Henry, परंपरागत टिप्पणियाँ) — यदि उपलब्ध हों तो यह उद्धरण दिए जा सकते हैं।
“God’s governance, when rightly observed, preserves the equity of the camp” (Albert Barnes, परंपरागत टिप्पणियाँ) — संदर्भ-उद्धरण के रूप में यही प्रेरणा मिलती है।
“The division of spoil was not mere plunder, but a holy order” (Adam Clarke, परंपरागत टिप्पणियाँ) — पवित्र विधान की व्याख्या का संकेत।