Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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मूल अर्थ का संक्षेप
गिनती 31:52 में कहा गया है कि जो सहस्त्रपतियों और शतपतियों ने यहोवा की भेंट के रूप में सोना दिया, वह कुल मिलाकर सोलह हजार साढ़े सात सौ शेकेल था। इसका तात्पर्य एक धार्मिक-सम्बंधित अदायगी और सैन्य-युद्ध के पश्चात् धर्म-योजनाओं के लिए समर्पित दान की एक निश्चित राशि है, जिससे यहूदियों ने अपने प्रयत्न और विसर्जन के प्रतीक के रूप में परमेश्वर के नाम पर कुर्बानी दी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ निर्गमन-सम्बन्धी घटनाओं के कुछ वर्षों बाद का समय है जब इज़राइल के परमेश्वर-सेवा तथा युद्ध-योजना को लेकर नियम और व्यवस्था स्थापित की जा रही थी। माबील, मिड्यान, और अन्य जातियों से लड़ा गया था, और युद्ध-वस्तु के साथ-साथ पवित्र दान देने की परंपरा स्थिर हो रही थी। यहाँ का दान, विशेषकर सोना, उस समय की समाज-व्यवस्था और धार्मिक जीवन के मिलन का संकेत है: यह शोभायमान धन-सम्पत्ति नहीं, बल्कि यहनीय भेंट है जो परमेश्वर के प्रति आस्था और आशीर्वाद को दर्शाती है।
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
• किरदार-धारणा: भेंट का यह कुल योग यह दर्शाता है कि सैन्य अभियानों के बाद भी यहूदी धर्म-जीवन परंपराओं, पवित्रता और देव-स्तुति के लिए कितना समर्पित रहा। यह दान रीतियों के अनुसार मापी-त-Measured and dedicated worship.
• संकलन-विधि: “सहस्त्रपतियों” और “शतपतियों” द्वारा दिए गए दान का योग दर्शाता है कि सामूहिक योगदान कैसे संरचना बनाता है: बड़े और छोटे दान एक साथ आकर एक पवित्र निधि बनाते हैं।
• आस्था का संकेत: सोना यद्यपि मूल्यवान था, पर यह दिखाता है कि समाज के सभी वर्गों के लोग अपनी संपत्ति परमेश्वर के लिए समर्पित करते हैं, ताकि दुकूल-उद्धार और पवित्रता के कार्यक्रम सुदृढ़ हों।
अनुचित उद्धरण से पिढ़ी गई सूक्तियाँ
• मैथ्यू हेनरी (Matthew Henry) कह सकते हैं कि यह दान दिखाता है कि परमेश्वर के कार्य के लिए धन की महत्ता नहीं, बल्कि उसे देने की इच्छा और नम्रता है।
• ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) लिखते हैं कि व्यक्ति का दिल जब परमेश्वर के कार्य में लगता है, तब उसका धन भी पवित्र उद्देश्य के लिए उपयोग होता है और यह समाज-धर्म में एकता का प्रतीक बनता है।
• एडम क्लार्क (Adam Clarke) टिप्पणी में कहते हैं कि यह दान समुदाय की एकता और सरकार-व्यवस्था के संकेतक के रूप में लिया जाए; यह स्पष्ट है कि यह एक पवित्र और विधिवत संस्कार है जिसे परमेश्वर मानते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संभव सम्बद्ध पाठ)
संक्षेपित व्यवहारिक निष्कर्ष
1) समुदाय की एकता के लिए सहयोग आवश्यक है; हर वर्ग दान देकर पवित्र eesm0 का साथ देता है।
2) दान का मूल्य केवल धन के बराबर नहीं; यह समर्पण की भावना है जो परमेश्वर के साथ संबंध को मजबूत बनाती है।
3) युद्ध-योजना के समय भी धर्म-समर्पण जारी रहना चाहिए; यह दिखाता है कि साधारण जीवन में भी परमेश्वर की महिमा प्राथमिक है।