Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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गिनती 32:14 —Immediate Setting
इस वाक्य का संदर्भ उस समय है जब डाने पुत्रों ने यहूदियों से अलग होकर यरदन पार करने की योजना बनानी शुरू कर दी थी। किन्तु यहूदियों ने स्पष्ट किया कि वे फलती-फूलती पड़ी असुरक्षा से नहीं, बल्कि आगे बढ़ने से पहले यहोवा की इच्छा के अनुरूप निर्णय लेना चाहते हैं। इस पंक्ति में मिसाल यह है कि प्रभु के भक्त उन लोगों के रूप में पहचाने जाते हैं जो अपने स्वार्थपूर्ण विचारों को छोड़कर ईश्वर के आदेश के लिहाज़ से कदम उठाते हैं, ताकि परमेश्वर की योजना अवरोधित न हो।
इस पाठ से परमेश्वर और विश्वास के बारे में यह क्या बताता है
कथा में स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर का कोप और स्मरण एक समाज के भीतर हुए पाप के कारण उठता है। यहाँ "अपने बाप-दादों के स्थान पर प्रकट हुए हो" से संकेत मिलता है कि वे पूर्वजों के विश्वास-प्रेरित विवाह के विरुद्ध या बगैर शुद्ध संपत्ति के बजाय, उनके अधिकारों और प्रतिज्ञाओं के प्रति असत्य-चाल चलाते हैं। यह नयी पीढ़ी के विश्वास के प्रति उनके कर्तव्य को चुनौती देता है: यहोवा के विरुद्ध पक्षपाती निर्णय और उन्माद भड़काने के बजाय, चुने हुए उद्देश्य की तरफ बढ़ना।
महत्वपूर्ण शब्दों की व्याख्या
अन्य प्रासंगिक आयतें (क्रॉस-रेफरेंसेस)
• संदर्भ: अन्य हिस्सों में निवासयोग्य भूभाग के लिए विश्वास और आज्ञा का पालन आवश्यक बताया गया है ताकि ईश्वर की योजना बाधित न हो।
• संदर्भ: यहोवा के नीतियों के सामने मानव स्वार्थ के विरुद्ध संघर्ष का चित्रण; विश्वास में धैर्य और निर्भयता की मांग।
• संदर्भ: पूर्वजों के विश्वास के साथ नई पीढ़ी के समन्वय की चर्चा, ताकि मूल्य और प्रतिज्ञाओं का सम्मान बना रहे।
आज के जीवन में आवेदन
1) प्रभु के साथ अपनी योजना बनाते समय हमारी प्राथमिकता यह हो कि हमारी इच्छाएँ परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हों।
2) पाप की प्रवृत्ति से सावधान रहें; हर निर्णय में परमेश्वर के वचन के मानदंडों को अग्रिमता दें।
3) नई पीढ़ी के लिए निरंतर विश्वास का दीपक जलाते रहें—परिवार, समुदाय और चर्च में जिम्मेदार भूमिकाओं के माध्यम से आस्था को मजबूत बनाएं।
सार्वजनिक सार
गिनती 32:14 यह चेतावनी है कि कमजोर या अनुचित प्रेरणाओं के चलते लोग परमेश्वर के पूरे आदेश के विरुद्ध चल पड़ते हैं, और इससे कोप व परिणाम सामने आते हैं। विश्वास में ईमानदारी, समर्पण और समुदाय के प्रति उत्तरदायित्व के साथ आगे बढ़ना ही सच्चे अनुयायी होने की चाबी है।
उद्धरण जो उपलब्ध स्रोत से संकलित हैं
यह Commentary मौलिक है; नीचे का उल्लेख केवल संदर्भ-उद्धरण के लिए है:
Matthew Henry से सीधी लाइनें यहाँ उद्धृत नहीं हैं; Clarke और Barnes के सार्वजनिक-डायरी स्रोतों के समान सामान्य विचार इस व्याख्या में समाहित हैं—परन्तु यहाँ उनके पूर्ण वाक्य नहीं दिये गये हैं ताकि पाठ सत्यापित और निजीकृत रूप से प्रस्तुत हो।