गिनती 32:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और इस्राएलियों से भी उस पार के देश जाने के विषय, जो यहोवा ने उन्हें दिया है, तुम क्यों अस्वीकार करवाते हो?

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गिनती 32:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे शब्दों का अर्थ

गिनती 32:7 में कहा गया है कि ईश्वर के अधीन हुए यहूदियों के बीच, जो विपरीत देशों से होकर जाना चाहते थे, उन लोगों से यह पूछा गया: तुम क्यों इस मार्ग को अस्वीकार करवाते हो जो यहोवा ने तुम्हारे लिए चुना है? इसका आशय यह है कि परमेश्वर ने अपनी योजना स्पष्ट की है, और उनके विश्वासी नहीं चाहते कि डर या असुरक्षा के कारण वह मार्ग छोड़ दिया जाए।

संदर्भ-भूमिका

यह पाठ नबाव-पूर्व की यात्रा-यात्रा के समय का है जब गिलाड के बेटे मनशे और रuben और गैड के द्वीप के लोग यह निर्णय लेते हैं कि वे अपनी पारिवारिक संपदा और चरागाहों के लिए उस पार की भूमि जाना नहीं चाहते, बल्कि अपने क़रीब की जगहों में रहने का विचार रखते हैं। यह स्थिति परमेश्वर की योजना के साथ उनके व्यक्तिगत हितों के टकराव को दर्शाती है।

व्याख्यात्मक विचार

  • विश्वास बनाम भय: क्षेत्रीय सुरक्षा और आत्म-रक्षा के भय ने यहूदियों को निर्भीक मार्ग छोड़ने के विचार के सामने ला दिया, परन्तु यहूदा-यीशु के निवास का उद्देश्य विश्वास-आधार पर चलना है।
  • आदेश-पालन की परीक्षा: मोड़-परिवर्तन के समय परमेश्वर की व्यवस्था के अनुरूप चलना सिखाता है कि योजनाओं की स्वीकृति में धैर्य आवश्यक है।
  • समान्-पथ की प्रतिबद्धता: यदि परमेश्वर ने मार्ग निर्धारित किया है, तो उसकी दिशा में खाली हाथ नहीं चलना चाहिए; यह उसकी आशीष की दिशा में कदम बढ़ाने का संकेत है।

कवच-सम्बंधित दृष्टिकोण (Cross-References)

- उद्गम: उन्हें वचन-यात्रा में विश्वास की कसौटी पर खड़ा किया गया है ताकि वे पथ-चयन के परिणामों को समझ सकें।
- प्रेरित-उद्धरण: यहोवा की योजना के विरुद्ध अपने मन से निर्णय लेने के उकसावे पर विचार करें; परमेश्वर के साथ चलना ही सुरक्षित पथ है।
- संदर्भित पाठ: पारिवारिक-समूहों के निर्णयों की समीक्षा में प्रभु के उद्देश्य की पहचान आवश्यक है; परमेश्वर के वचन के अनुसार निर्णय लेने से ही आशीष मिलती है।

नोट: ऊपर दिए गए क्रॉस-रेफरेंस क्रियात्मक रूप से पाठ से जुड़ी अवधारणाओं को समझाने हेतु जोड़े गए हैं; वास्तविक शास्त्र पाठ के संक्षिप्त संदर्भ के साथ उपयोग करें।

सार-प्रमुख निष्कर्ष

  1. परमेश्वर ने जो मार्ग निर्धारित किया है, उसे तुच्छ नहीं समझना चाहिए; विश्वास के साथ उस पर निर्भरता ही जीवन-यात्रा की कुंजी है।
  2. आत्म-हित के कारण मार्ग छोड़ना अनुभवों में कमी लाता है और परमेश्वर की योजना पर अविश्वास जन्म लेता है।

संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway

जीवन के निर्णय लेते समय भय या संपत्ति-हित की आवाज़ आ सकती है, पर विश्वासी को परमेश्वर की दिशा में चलना चाहिए ताकि उसकी योजनाओं की उन्नति और आशीष बनी रहे।

अनुदेश और संदर्भ

यह पाठ हमें यह सिखाता है कि विश्वास-आधारित निर्णयों में धैर्य और ईश्वर की योजना के अनुरूप चलना आवश्यक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

गिनती 32:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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अर्थात् जब उन्होंने एशकोल नामक घाटी तक पहुँचकर देश को देखा, तब इस्राएलियों से उस देश के विषय जो यहोवा ने उन्हें दिया था अस्वीकार करा दिया।

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उन्होंने मूसा से यह कहकर वर्णन किया, “जिस देश में तूने हमको भेजा था उसमें हम गए; उसमें सचमुच दूध और मधु की धाराएँ बहती हैं, और उसकी उपज में से यही है।

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गिनती 21:4 (HINIRV) »
फिर उन्होंने होर पहाड़ से कूच करके लाल समुद्र का मार्ग लिया कि एदोम देश से बाहर-बाहर घूमकर जाएँ; और लोगों का मन मार्ग के कारण बहुत व्याकुल हो गया।

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