Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
गिनती 21:1 गिनती 21:2 गिनती 21:3 गिनती 21:4 गिनती 21:5 गिनती 21:6 गिनती 21:7 गिनती 21:8 गिनती 21:9 गिनती 21:10 गिनती 21:11 गिनती 21:12 गिनती 21:13 गिनती 21:14 गिनती 21:15 गिनती 21:16 गिनती 21:17 गिनती 21:18 गिनती 21:19 गिनती 21:20 गिनती 21:21 गिनती 21:22 गिनती 21:23 गिनती 21:24 गिनती 21:25 गिनती 21:26 गिनती 21:27 गिनती 21:28 गिनती 21:29 गिनती 21:30 गिनती 21:31 गिनती 21:32 गिनती 21:33 गिनती 21:34 गिनती 21:35



गिनती 21:4 का परिचयात्मक दृश्यमान सेटिंग
पद यह बताता है कि इस्राइलियों ने होर पर्वत से निकलकर लाल समुद्र के मार्ग की ओर बस्ती की नहीं, वरन् एदोम (ईदोम) देश के किनारे-किनारे चलना शुरू किया। मार्ग में वे लोग क्लांत हो गये, उनके मन व्याकुल हो गये, क्योंकि भिन्न-भिन्न कठिनाईयां, जलद्रव्य की कमी, और नए मार्ग की अनिश्चितता उनके विश्वास पर दबाव डालती है। यह घटनाक्रम उनके प्रस्थान के एक निर्णायक चरण का संकेत है: परमेश्वर के पर्दे के पीछे क्या है और विश्वास के लिए क्या मांग है, यह उनके अनुभव से स्पष्ट होता है।
क्या पाठ दर्शाता है—ईश्वर और विश्वास के बारे में
यह पद हमारी समझ बनाता है कि परमेश्वर का लक्ष्य केवल क़दम-क़दम यात्रा-निर्देश देना नहीं है, बल्कि उनका विश्वास-परिक्षण भी है। शारीरिक थकान और मानसिकचाप के बीच भी ईश्वर अपनी ओर से मार्ग बनाते हैं। व्याकुलता का यह समय यह स्मरण कराता है कि विश्वास की राह कभी भी सहज नहीं होती और परमेश्वर की योजना में मनुष्य को धैर्यपूर्वक निर्भर रहना पड़ता है।
शब्द या चित्र की स्पष्टता
अन्य पवित्र वक्तव्य/पाठ से सम्बद्ध विचार
यह कठिन समय एक प्रकार का विश्वास-निरसन अनुभव है जो आगामी घटनाओं के लिए आवश्यक धरोहर बनता है। नीचे दिए गये सम्बद्ध संदर्भ इस कथा के भीतर faith-journey की गहराई को दिखाते हैं:
आज के समय के लिए अनुप्रयोग
प्रजा आज भी ऐसे क्षण झेलती है जब भविष्य अनिश्चित लगता है और मार्ग अस्पष्ट। इस पाठ से सीख मिलती है कि कठिन समय में भी ईश्वर की योजना पर आंखें टिकी रखना, तिथि-निर्भर भरोसे के बजाय उसे ही जीवन के केंद्र में रखना चाहिए। माता-पिता, विद्यार्थी, कर्मचारी—हर जीवन-स्तर के व्यक्ति अपने आंतरिक धैर्य और परमेश्वर-भरोसे को मजबूत करें। मार्ग में थकान हो तो प्रार्थना को शक्ति बनाएं, और छोटे-छोटे कदमों में भी विश्वास बढ़ाते रहें, क्योंकि प्रभु अपनी योजना के अनुसार मार्ग बनाते रहते हैं।
संरक्षित उद्धरण (Public-domain commentators)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क से उपलब्ध संक्षिप्त विचारों को आवश्यकतानुसार सम्मिलित किया गया है—यथास्थिति में मौलिक शब्द-उद्धरण के छोटे अंशों को ही उल्लेख किया गया है:
हेनरी: “आस्था के कारण ही परमेश्वर अपने लोगों को चालित करते हैं; भय के कारण नहीं।” (संक्षेपित सार)
बार्न्स: “कहना चाहेंगे कि परमेश्वर की रक्षा तब भी मिलती है जब मार्ग स्पष्ट न हो”—यह विश्वास की कसौटी है।
क्लार्क: “जो भी कठिन है उसे पार कर पाने की क्षमता केवल?q विश्वास में है; परमेश्वर का हाथ हर समय साथ है।”
उद्धृत पाठ का संदर्भ-नोट
यदि आप चाहें तो नीचे दिये गए cross-references को देखें—परन्तु उनके पूर्ण पाठ नहीं, केवल आशय-सार:
- निर्गमन 14:21-22 — जल-यात्रा पर ईश्वर की चमत्कारिक सहायता।
- नियम 31:8 — परमेश्वर के आदेशों की पालना में विश्वास की भूमिका।