Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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पाठ का संक्षेप और समस्या-समाधान
गिनती के इस भाग में यहूदा और इस्रएल की यात्रा के बीच मोड़ आते हैं। 21:34 में परमेश्वर मूसा को स्मरण कराते हैं कि वह शत्रु से भय न खाए, क्योंकि घमंड नहीं—बल्कि प्रभु का साथ और उनकी सामर्थ्य है। यहाँ यहोवा कहता है कि सीहोन के साथ जो किया गया, वैसा ही इस राजा के विरुद्ध भी किया जाएगा। इस संदर्भ में परमेश्वर का उद्धार और सेनाओं पर अधिकार स्पष्ट रूप से दिखता है।
Verse in Context (प्रकरण सहित)
यह भाग मोआब के मैदानों के पास समकालीन संघर्षों से जुड़ा है, जहां इस्राईल हर प्रकार के शत्रुओं से लड़कर अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हैं। परमेश्वर ने युगों-युगों के लिए अपनी शक्ति दिखाकर दिखा दिया कि वे जब भी आपत्ति में हों, वह उनके साथ है और विजय प्रदान करता है।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षण
1) परमेश्वर का भरोसा: भय के समय भी ईश्वर का आश्वासन विश्वास की कसौटी है—“उससे मत डर।”
2) प्रभु की सत्ता: “मैं उसको सारी सेना और देश समेत तेरे हाथ में कर देता हूँ” से स्पष्ट है कि निर्भयता प्रकृति के बल से नहीं, परमेश्वर की शक्ति से है।
3) न्याय और दयालुता का मिलन: पूर्व में की गई विजय के आधार पर, ईश्वर एक बार फिर अपने लोगों की रक्षा का वादा करते हैं और उन शत्रुओं को अधीन करते हैं जो प्रलय-पूर्व क्षणों में विरोध करते थे।
अनुशासन और साथी पाठ (Cross-references)
इन संदर्भों के मिलन से स्पष्ट हो जाता है कि हार-जीत से ऊपर, विश्वास में स्थिर रहने का मूल कारण परमेश्वर की उपस्थिति है, जो संकटों के बीच भी उसकी सुरक्षा देता है।
व्यावहारिक उपयोग
सूक्ष्म पाठ पर टिप्पणी
यह वचन यह दिखाता है कि परमेश्वर के साथ ग़लतीपूर्वक नहीं, बल्कि विश्वासपूर्वक चलना आवश्यक है। यहोवा के निर्देशानुसार इरादा और साहस फिर से प्रकट होते हैं; प्रत्येक नई बाधा पर वह पुराने अनुभवों की स्मृतियों को पुनर्जीवित करता है ताकि हम उसकी प्रभुता पर निर्भर रहें।
संक्षेप
33 शब्दों में: परमेश्वर कहता है—डर मत; मैं तुम्हारे साथ हूँ और शत्रु को तुम्हारे हाथ में दे दूँगा। यह जीवन में विश्वास, आशा और शक्ति का संतुलन सिखाता है।
नोट: मूल संदेश पर आधारित आयातित विचारों में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन उद्धरणों के संक्षिप्त, संदिग्ध-उद्धरण शामिल हो सकते हैं। यदि उद्धरण मिलते हैं, तो वे इसके भीतर उद्धृत रहते हैं।