Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
गिनती 1 गिनती 2 गिनती 3 गिनती 4 गिनती 5 गिनती 6 गिनती 7 गिनती 8 गिनती 9 गिनती 10 गिनती 11 गिनती 12 गिनती 13 गिनती 14 गिनती 15 गिनती 16 गिनती 17 गिनती 18 गिनती 19 गिनती 20 गिनती 21 गिनती 22 गिनती 23 गिनती 24 गिनती 25 गिनती 26 गिनती 27 गिनती 28 गिनती 29 गिनती 30 गिनती 31 गिनती 32 गिनती 33 गिनती 34 गिनती 35 गिनती 36Verse
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Immediate setting of गिनती 32:32
यह पद मूसा की कहानी के अंत की ओर घटित घटनाओं में आता है जब गौलाद के वंश के कुछ प्रमुख जुझारू बानर, अर्थात रेबेन और गैड, यरदन के पश्चिमी किनारे पर स्थित अपनी पुख्ता भूमि माँगते हैं। वे किनारे पर ही युद्ध-उन्नत क्षेत्र के लिए भागना चाहते हैं, ताकि वे आगे कनान देश में प्रवेश किए बिना ही अपनी निजी बस्तियाँ सुरक्षित करें। मसीहत-पूर्वक, वे यह दृढ़ता दिखाते हैं कि परमेश्वर के उद्धार-योजनाओं के भीतर भी, वास्तविक जीवन के सुरक्षा-प्रकार कैसे तय होते हैं।
यह पाठ परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यह वचन इस बात पर प्रकाश डालता है कि परमेश्वर अपने लोगों की सुरक्षा और भविष्य की योजना के लिए मार्ग निर्धारित करता है, पर मानव-आत्मा में भी जिम्मेदारी और योजना बनाते समय संयम चाहिए। इच्छित भूमि के बारे में एक स्पष्ट, भरोसेमंद लक्ष्य दिखता है, और यह दर्शाता है कि परमेश्वर की कृपा और उनकी योजना के अनुरूप दृढ़ इच्छाशक्ति दोनों चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
सम्बद्ध अन्वय और Cross-references
1) यहोवा के निर्देश के अनुसार पूर्व-निर्णय और विश्वास: यह प्रेरित करता है कि हम भी अपने कठिन निर्णयों में परमेश्वर की राह मांगें और अपने-अपने क्षेत्र में ईमानदारी से मार्ग चुनें।
2) विश्वास और साहस के संतुलन: परमेश्वर के निर्देशों के साथ साहसपूर्वक कदम उठाने की प्रेरणा मिलती है, परन्तु योजना में समझदारी भी आवश्यक है।
3) दायित्वपूर्ण संप्रेषण: अपने परिवार और समुदाय के हित के लिए निर्णय लेते समय एक दूसरे की जिम्मेदारी समझना आवश्यक है।
संपूर्ण अर्थ का एक संयुक्त सार
यह पद हमें याद कराता है कि परमेश्वर की योजना में विश्वास के साथ कदम उठाने में साहस और विवेक का संयोजन चाहिए। यदि लोग अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए मन-चाहे पथ चुनते हैं, तो उनकी सुरक्षा परमेश्वर के मार्ग से हटकर नहीं मिलती। पर यदि वे निर्भय होकर सद्गुण और दायित्व का चयन करते हैं, तो परमेश्वर उन्हें अपने उद्देश्य के अनुसार आगे बढ़ाता है।
आज के लिए अनुप्रयोग
संदर्भ उद्धरण: मॉथ्यू Henry, Albert Barnes, Adam Clarke की सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणी से चिह्नित विचार मिलते हैं, जहाँ वे यह स्पष्ट करते हैं कि परमेश्वर के मार्ग में विश्वास और बुद्धिमत्ता दोनों एक साथ चलें।