Old Testament
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Romans 16:19 — क्या कहे जाने पर भलाई और बुद्धिमत्ता
इस पद का स衍क स्पष्ट अर्थ है: भाइयों के बीच आपकी आज्ञा-पालन की चर्चा पूरे समाज में फैल गई है; इससे मुझे प्रसन्नता है। परन्तु मैं यह चाहता हूँ कि आप भलाई के लिये बुद्धिमान बने रहें और बुराई के लिये भोले (निर्दोष) बने रहें।
परिप्रेक्ष्यभूमि
रोमियों की चिट्ठी में प्रिय भाइयों के प्रति पॉल का प्रेम-सम्बन्ध और चर्चों की स्थिति सामने है। इस भाग में वह विशेषकर रोमी समुदाय की आचार-संयम और बाहरी दबाव के बीच मिश्रित संवेदना दिखाते हैं: प्रतिष्ठा और प्रभाव की चिंता के समय भी वे यह कहते हैं कि विश्वासी लोगों पर निष्ठा और नैतिकता की दिशा स्पष्ट होनी चाहिए। भलाई और बुद्धिमानी का संतुलन एक व्यावहारिक ईमानदारी का आदर्श है, जिसे सामाजिक संदर्भ में भी निभाया जाना चाहिए।
व्याख्यात्मक अवलोकन
सारगर्भित टिप्पणियाँ
यह शाब्दिक कथन Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसे पवित्र-पूर्ण सार्वजनिक-डायमेंड लेखों की प्रेरणा के अनुरूप एक संतुलित मार्ग देता है: प्रेम और निर्भयता के साथ अपने प्रभाव का प्रयोग; लेकिन बुराई पर चालाकी नहीं, बल्कि सरलता और सत्य के साथ रहना चाहिए।
प्रमुख विचारों के संक्षेप:
पवित्र ग्रंथ के क्रॉस-रेफरेंसे
यहाँ तीन संकल्पना-सम्बन्धी संदर्भ हैं जोRomans 16:19 के साथ देखने योग्य हैं:
संक्षेप में, इन क्रॉस-रेफरेंसेस से यह स्पष्ट होता है कि विश्वासियों को भलाई के लिए बुद्धिमान बनना है, परन्तु बुराई के लिए भोला बनना है ताकि वे सत्य-जीवन में स्थिर और प्रेरक बने रहें।
व्यावहारिक निष्कर्ष
आपके जीवन में यह तीनों गुण संतुलन बनाएं: विचारों में विवेक, व्यवहार में पवित्रता, और सामाजिक-प्रभाव में नम्रता। सार्वजनिक प्रभाव को न संकेत दें कि आप श्रेष्ठ हैं, बल्कि यह दिखाएँ कि आप प्रभु के सच को सरलता और सत्य के साथ अपनाते हैं।