Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 16:1 रोमियों 16:2 रोमियों 16:3 रोमियों 16:4 रोमियों 16:5 रोमियों 16:6 रोमियों 16:7 रोमियों 16:8 रोमियों 16:9 रोमियों 16:10 रोमियों 16:11 रोमियों 16:12 रोमियों 16:13 रोमियों 16:14 रोमियों 16:15 रोमियों 16:16 रोमियों 16:17 रोमियों 16:18 रोमियों 16:19 रोमियों 16:20 रोमियों 16:21 रोमियों 16:22 रोमियों 16:23 रोमियों 16:24 रोमियों 16:25 रोमियों 16:26 रोमियों 16:27



रोमियों 16:20 पर टिप्पणी (HINIRV)
पद का संदर्भ और संदर्भ-वस्तु: रोमियों की चिट्ठी में प्रेरित पवित्र लेखक पौलुस ने बाद के भागों में विश्वासियों के लिए सलाह, दुआएं और चेतावनियाँ दी हैं। इस विशिष्ट वचन में शांति-परमेश्वर का उल्लेख है जो शैतान को हर तरह से हारकर भक्तों के ऊपर से शीघ्र कुचल देगा। यह वचन प्रभु यीशु मसीह की कृपा और पराक्रमी प्रभुत्व को उजागर करता है, जो दुखों के बीच भी विश्वासियों को शांति और सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही यह एक भविष्यवाणी-सा संकेत भी है कि शैतान की शक्ति समय के साथ कम हो जाएगी, क्योंकि ईश्वर की योजना में उद्धारकर्ता का सार्वभौमिक शासन स्थापित हो चुका है।
मुख्य शब्दार्थ और केंद्रीय मत
यह शांति का परमेश्वर केवल शान्ति नहीं देता, बल्कि शैतान के विरुद्ध सक्रिय विजय का आहुति-स्वरूप है।-पौलुस के अनुसार ईश्वर का अनुग्रह कृपा के साथ आता है ताकि शैतान के मोल-झगड़ों में भी विश्वासियों को स्थिरता मिले।ೊ शैतान के “पाँव के नीचे कुचलना” एक सुवाक्य-चित्र है जो ईश्वर के पत्थर-निर्देशन और मसीही जीत की पुष्टि करता है।
2–3 प्रमुख विषय
अन्य సంబంధित पवित्र-वचन
ए) उत्पत्ति 3:15— शैतान के विरुद्ध मोर्चे का प्रारम्भिक संकेत; दिवार-जोड़ा जो क्रियात्मक संघर्ष को सूचित करता है। यह संदर्भ बताता है कि विनाशकारी तलवार-योजना सिद्धांत से प्रेरित नहीं है, बल्कि शांति, आशीष और विजय का मार्ग मसीह के द्वारा खुलता है।
बी) ईफिसियों 6:10–11— आत्म-सुरक्षा और प्रभुसत्त्ता के बंधनों के साथ सांसारिक संघर्ष में खड़े रहने की शिक्षा।
सी) 2 तीमथियस 4:18— प्रभु के संरक्षण में अंत तक विश्वासियों की सुरक्षा की भरोसेमंद पुष्टि।
व्यवहारिक विचार
- कठिन समय में भी शांति बनाए रखना: ईश्वर की शांति हमारी सबसे बड़ी सुरक्षा है, न कि परिस्थितियाँ।
- शास्त्रों पर टिके रहें: मसीह के अनुग्रह पर निर्भरता हमारी जीती हुई दृष्टि बनाती है।
- प्रायः प्रार्थना और विश्वास-विकास: शैतानी संकट के बीच भी प्रार्थना से आत्म-नवीकरण होता है और विजयी जीवन की आशा बनती है।
संक्षेप
रोमियों 16:20 में पवित्र शांति का परमेश्वर शैतान को भक्तों के ऊपर से शीघ्र कुचलने का आश्वासन देता है। यह संदेश यीशु मसीह के अनुग्रह द्वारा समर्थित विजय और ईश्वर की योजना की पूर्णता की पुष्टि करता है। यह विश्वासियों के लिए एक प्रेरक स्मृति है कि संकट के बीच भी ईश्वर की शक्ति और शांति निर्णायक हावी रहते हैं।
वरीय उद्धरण (संदर्भित सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियाँ)
अगर आवश्यक हो, पाठकों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्वर-उद्धृत विचार निम्नलिखित बिंदुओं में संक्षेप रूप से स्थित हैं:
नोट: ऊपरन्दिज उत्तरों में ये तात्पर्य केवल बौद्धिक-तालमेल हेतु हैं; तीनों टिप्पणीकारों के विशिष्ट संक्षेप उद्धरण यदि उपलब्ध हों तो वे यहाँ सीधे उद्धृत नहीं किए गए हैं, केवल विचारों के सार के रूप में प्रस्तुत हैं।