Old Testament
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श्रेष्ठगीत 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम से चिकारियों और मैदान की हिरनियों की शपथ धराकर कहती हूँ, कि जब तक प्रेम आप से न उठे, तब तक उसको न उकसाओं और न जगाओ।
श्रेष्ठगीत 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
श्रेष्ठगीत 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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श्रेष्ठगीत 2:7 (HINIRV) »
हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम से चिकारियों और मैदान की हिरनियों की शपथ धराकर कहती हूँ, कि जब तक वह स्वयं न उठना चाहे, तब तक उसको न उकसाओं न जगाओ। (श्रेष्ठ. 3:5,8:4)

श्रेष्ठगीत 8:4 (HINIRV) »
हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम को शपथ धराती हूँ, कि तुम मेरे प्रेमी को न जगाना जब तक वह स्वयं न उठना चाहे।

मीका 4:8 (HINIRV) »
और हे एदेर के गुम्मट, हे सिय्योन की पहाड़ी, पहली प्रभुता अर्थात् यरूशलेम का राज्य तुझे मिलेगा।
श्रीगीत 3:5 पर सहज अर्थ और संदर्भ
सीधे अर्थ का सार: यह शपथ-स्वरूप उद्घोषणा स्त्री के प्रेम-आह्वान के समय आत्म-नियमन की प्रतिबद्धता है। नृत्य-याचना या प्रेम-जागरण के बीच, प्रेम को उत्तेजित या प्रेरित करने से बचना है जब तक कि प्रेम स्वयं उठकर न कहे, यही संदेश है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
श्रेष्ठगीत-रचना में स्त्री-वरचना और उसका यौवनप्रिय प्रेम-प्रसंग दिखता है। यह अध्याय 3 में शहरी-यात्रा के बाद प्रेम-बहुवचन के साथ एक अंतरंग संवाद को दर्शाता है। भक्ति-यात्रा में प्रेम और चाहत के बीच संयम की शिक्षा है: प्रेम के उकसावे से बचना और उसे तन्मय होकर आने देना। यह एक प्रेम-बंधन के परीक्षण के क्षण का वर्णन है, जिसमें प्रेम की गहराई और आत्म-नियंत्रण दोनों का महत्व उभरता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
कथनात्मक सूची: थीम के प्रमुख बिंदु
अन्य उपयुक्त पाश्र्वांश (Cross-references)
- नीतियों में प्रेम की परख के लिए अन्य पुराने टिप्पणियों में यह विचार मिलता है कि प्रेम के वास्तविक आह्वान के समय आत्म-नियंत्रण सर्वोपरि है।
- दृश्य-प्रेम के लिए कुरे-पत्रों में भी ऐसे संकेत मिलते हैं कि आत्मा की शांति और पवित्रता प्रेम के प्रकटन से ऊपर होनी चाहिए।
संकेतित विवेचना (प्रयोजनात्मक निष्कर्ष)
यह पाठ एक शुद्ध प्रेम-आचार का आदर्श प्रस्तुत करता है: प्रेम को उकसाने के बजाय उसे बढ़ने देना और आत्म-नियंत्रण बनाए रखना। रोमांटिक और आध्यात्मिक प्रेम—दोनों में संतुलन वह रेशमी धागा है जो प्रेम को स्थिरता देता है।
संक्षिप्त उपयोगी टिप्पणी
यह शपथ-सीमा प्रेम-संबंधों में भी एक प्रबंधन-नीति है: प्रेमी/प्रेमिका के बीच समय-समय पर आंतरिक सचेतना और पवित्रता बनाए रखें।
संक्षेप निष्कर्ष
श्रेणी: प्रेम, संयम, आत्म-नियंत्रण। प्रेम जब अपनेपूर्ण रूप से उभरने दे, न कि बाहरी दबावों से, तब वह गहराई और ईमानदारी से प्रकट होता है।
अनुदेशात्मक नोट: नीचे संक्षेप में 2-3 उद्धरणात्मक टिप्स दिए जाते हैं, जो पुराने किस्म के टिप्पणीकारों से मिलते-जुलते विचारों को समाहित करते हैं, ताकि पाठक को यह स्पष्ट हो कि प्रेम को उकसाने से बचना क्यों आवश्यक है।
उद्धरण संकेत (यदि उपलब्ध): “यथा प्रेम उठे, उसी क्षण उसे जगाओ”—यह प्रकार की विचारधारा को संदेह-रहित रूप में प्रस्तुत किया गया है; आवश्यक होने पर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मौलिक शब्दों के छोटे-छोटे उद्धरण स्रोत में दर्ज रहते हैं।
विधिवत उद्धरण: (यदि उपलब्ध) "जब तक प्रेम आप से न उठे, तब तक उसे न उकसाओं"—यह पंक्ति स्वयं पठन को प्रेम की स्वतंत्र उन्नति के महत्व की स्मृति कराती है।