Old Testament
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श्रेष्ठगीत 4:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब तक दिन ठण्डा न हो, और छाया लम्बी होते-होते मिट न जाए, तब तक मैं शीघ्रता से गन्धरस के पहाड़ और लोबान की पहाड़ी पर चला जाऊँगा।
श्रेष्ठगीत 4:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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श्रेष्ठगीत 4:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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श्रेष्ठगीत 2:17 (HINIRV) »
जब तक दिन ठण्डा न हो और छाया लम्बी होते-होते मिट न जाए, तब तक हे मेरे प्रेमी उस चिकारे या जवान हिरन के समान बन जो बेतेर के पहाड़ों पर फिरता है।

श्रेष्ठगीत 4:14 (HINIRV) »
जटामांसी और केसर, लोबान के सब भाँति के पेड़, मुश्क और दालचीनी, गन्धरस, अगर, आदि सब मुख्य-मुख्य सुगन्ध-द्रव्य होते हैं।

लूका 1:78 (HINIRV) »
यह हमारे परमेश्वर की उसी बड़ी करुणा से होगा; जिसके कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा।
गीतों के श्रेष्ठगीत 4:6 — संदर्भ-सार एवं टिप्पणी
यह पद श्रेष्ठगीत का एक हिस्सा है जिसमें दुल्हन-वर के मिलन की प्रतीक्षा और प्रेम की गूढ़ अनुभूति स्पष्ट होती है। वार्ता की पंक्तियाँ एक प्रेमी के प्रिय के साथ एक क्षण के लिए मिलने की तीव्र इच्छा को दर्शाती हैं, जब सूर्य डूब रहा हो और छाया लंबी हो रही हो। यह प्रकृति की धधकती प्रतीक्षा को प्रेम के प्रतिबिम्ब के रूप में दिखाता है—दिन के नेफ्ता-उषा के साथ नहीं, बल्कि शाम की शांति और गहन निकटता के पल में।
केंद्रीय अर्थ
वर्तमान वचन में दुल्हन कहती है कि जब तक दिन ठहर नहीं जाता और छाया लम्बी नहीं हो जातीं, तब तक वह शीघ्रता से प्रेमी की ओर चल देगी—यह एक भावुक निर्धारण और प्रेरित कदम है ताकि प्रेमी के साथ मिलकर उन क्षणों का आनंद लिया जा सके जो पृथ्वी पर प्रेम के लिए निर्धारित समय पर उपलब्ध होते हैं। यह प्रतीकात्मक भाषा है, जिसमें दिन और छाया प्रेम-यात्रा के समय-चक्र को दर्शाते हैं: उषा से संध्या तक की यात्रा में प्रेम का राग तीव्र रहता है और बाधाओं के बावजूद उसकी आकांक्षा बनी रहती है।
मुख्य विषय-वस्तु
संबद्ध पाठ (Cross-references)
१)Songs 2:17 — प्रेम की प्रतीक्षा और मिलन के पल की इच्छा एक असीम आस्था के साथ। यह संदर्भ प्रेम-यात्रा के अंतिम मिलन के लिए प्रेरणा देता है।
२)Psalm 27:4 — एक एकल प्रेम-आवेश: एक स्थान पर ईश्वर के दर्शन की चाह। यहाँ भी उत्सुकता और दृढ़ता का स्वर मिलता है कि कैसे नज़दीकियाँ जीवन की वांछित अनुभूति बनती हैं।
३)Ecclesiastes 3:1 — हर चीज की अपनी समय-सारिणी: मिलन के समय के साथ संगत मार्गदर्शन मिलना संभव होता है।
व्यावहारिक चिंतन
युवा प्रेमी-युगलों के लिए यह पद प्रेम के सच-स्वरूप के बारे में स्पष्ट करता है कि सच्चे मिलन के लिए धैर्य तथा तत्परता दोनों आवश्यक हैं। समय-सारिणी को समझना, एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना और मिलन के क्षणों को ईश्वर की कृपा के साथ देखना, रिश्ते को मजबूत बनाता है।
संक्षिप्त समापन
4:6 में प्रेमी-प्रेमिका का संकेतात्मक दृढ़ संकल्प है कि मिलने के क्षण तक वे दिन-छाया के क्रम को पार करेंगे। यह गीत-परंपरा का एक सुंदर अनुस्मारक है कि प्रेम का आदर्श तब ही सुस्पष्ट होता है जब जीवन की रात्रि भी उनके साथ उस दिशा में चलने लगती है जहाँ मिलन संभव हो।
नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के कुछ संक्षिप्त उद्धरण उपलब्ध नहीं थे; नीचे दी गई तीनों शास्त्रीय टिप्पणीकारों के मौलिक विचारों के समेकन से नया, मौलिक स्पर्श जोड़ा गया है।