Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 20:1 1 राजाओं 20:2 1 राजाओं 20:3 1 राजाओं 20:4 1 राजाओं 20:5 1 राजाओं 20:6 1 राजाओं 20:7 1 राजाओं 20:8 1 राजाओं 20:9 1 राजाओं 20:10 1 राजाओं 20:11 1 राजाओं 20:12 1 राजाओं 20:13 1 राजाओं 20:14 1 राजाओं 20:15 1 राजाओं 20:16 1 राजाओं 20:17 1 राजाओं 20:18 1 राजाओं 20:19 1 राजाओं 20:20 1 राजाओं 20:21 1 राजाओं 20:22 1 राजाओं 20:23 1 राजाओं 20:24 1 राजाओं 20:25 1 राजाओं 20:26 1 राजाओं 20:27 1 राजाओं 20:28 1 राजाओं 20:29 1 राजाओं 20:30 1 राजाओं 20:31 1 राजाओं 20:32 1 राजाओं 20:33 1 राजाओं 20:34 1 राजाओं 20:35 1 राजाओं 20:36 1 राजाओं 20:37 1 राजाओं 20:38 1 राजाओं 20:39 1 राजाओं 20:40 1 राजाओं 20:41 1 राजाओं 20:42 1 राजाओं 20:43



1 राजाओं 20:22 पर टिप्पणी — संदर्भ एवं महत्व
पद 20:22 में एक नबी इस्राईल के राजा के पास आकर कहता है कि युद्ध को जब तक आपसी स्थिति स्पष्ट न हो जाए, तब तक आगे बढ़ना उचित नहीं है। राजा को चेतावनी है कि आक्रमण की सालगिरह के पास आकर अराम का राजा फिर से सक्रिय होगा और रणनीति बदलेगी। यह संदर्भ युद्ध-कौशल, आत्म-विश्वास और परमेश्वर के निर्देश के महत्व को दर्शाता है। नबी का संदेश हल्के-फुल्के अच्छे समय में भी सावधान रहने की आवश्यकता को रेखांकित करता है: जो योजनाएँ अभी सही दिखती हैं, वे आगे परिवर्तन का सामना कर सकती हैं।
मुख्य विचार
यह verses दिखाते हैं कि योद्धा-राजा को एक नए अवसर पर अपनी योजनाओं को दृढ़ और सतर्क बनाकर आगे बढ़ना चाहिए। परमेश्वर की ओर से बने निर्देशों के बिना साहसिक कदम तुरंत संकट ला सकते हैं, जबकि सावधानी और समयबद्ध निर्णय इतिहास में विजय की कुंजी बनते हैं।
दो–तीन प्रमुख विषय
सहयोगी पाठ और तुलनात्मक आयाम
– 2 शमूएल 5–6: राजा को समय पर सलाह लेने और योजना बनाने की महत्त्वपूर्ण सीख मिलती है; युद्ध में सफल होने के लिए आशीर्वाद और सचेत निर्णय का संयोजन आवश्यक है।
– दानियेल की बाइबिल कहानियाँ: परामर्श और योजना के महत्व को परखने के लिए समय-समय पर भगवान के मार्गदर्शन के अनुसार निर्णय लेने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
– अन्य संदर्भ: यदि अराम का राजा सक्रिय हो सकता है, तो समान परिस्थितियाँ जहाँ समय की भूमिका निर्णायक बनती है, वहाँ से भी सीख मिलती है कि किस तरह सावधानी और रचनात्मक योजना से मोड़ लाई जा सकती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- चुनौतियों के समय शांत रहें और परिस्थिति का स्पष्ट अवलोकन करें।
- स्पष्ट संकेतों के लिए भरोसेमंद सलाहकारों और दूतों की बात सुनें, ताकि गलत निर्णय से बचा जा सके।
- जब समय उचित हो, तब साहसपूर्वक आगे बढ़ें, पर बिना परमेश्वर की अगुवाई के नहीं।
समाप्ति सार
यह वचन izvi दर्शाता है कि जीवन की लड़ाइयों में सूझ-बूझ और परमेश्वर-निर्देश एक साथ चलने चाहिए। नबी की आगाहियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हर कदम को सोच-समझ कर उठाने से ही विजय की संभावना बढ़ती है, और असुरक्षित आक्रमणों से बचा जा सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेज़
– यह पाठिक संकेत देता है कि कठिन परिस्थितियों में ठोस परामर्श और समय-निर्णय आवश्यक है; से प्रेरित कुछ संदर्भ: ऊपर के संदर्भ 2 शमूएल 5–6—युद्ध-रणनीति में सतर्कता की जरूरत; दानियेल की पुस्तक — भगवान की दिशा के बिना निर्णय की संवेदना।
कृपया ध्यान दें: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण तभी शामिल हैं जब उपलब्ध हों। यहाँ कोई पूर्ण उद्धरण नहीं दिया गया है, पर उनके विचारों के अनुसार संकट-समय में परामर्श और परमेश्वर-निर्देश का संयोजन महत्वपूर्ण रहता है।