Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 20:1 1 राजाओं 20:2 1 राजाओं 20:3 1 राजाओं 20:4 1 राजाओं 20:5 1 राजाओं 20:6 1 राजाओं 20:7 1 राजाओं 20:8 1 राजाओं 20:9 1 राजाओं 20:10 1 राजाओं 20:11 1 राजाओं 20:12 1 राजाओं 20:13 1 राजाओं 20:14 1 राजाओं 20:15 1 राजाओं 20:16 1 राजाओं 20:17 1 राजाओं 20:18 1 राजाओं 20:19 1 राजाओं 20:20 1 राजाओं 20:21 1 राजाओं 20:22 1 राजाओं 20:23 1 राजाओं 20:24 1 राजाओं 20:25 1 राजाओं 20:26 1 राजाओं 20:27 1 राजाओं 20:28 1 राजाओं 20:29 1 राजाओं 20:30 1 राजाओं 20:31 1 राजाओं 20:32 1 राजाओं 20:33 1 राजाओं 20:34 1 राजाओं 20:35 1 राजाओं 20:36 1 राजाओं 20:37 1 राजाओं 20:38 1 राजाओं 20:39 1 राजाओं 20:40 1 राजाओं 20:41 1 राजाओं 20:42 1 राजाओं 20:43



अध्याय 1 राजाओं 20:30 पर टिप्पणी
इस Verse में युद्ध के एक निर्णायक मोड़ का चित्रण है। बड़ा राजा बेन्हदद के सैनिकों की दीवारों के गिरने से नगरपंहाह (शहर के प्रमुख) के भीतर कुछ बचे लोग मार डाले जाते हैं, और बेन्हदद स्वयं भाग कर एक भीतर की कोठरी में घुस जाता है। यह संदर्भ दो पड़ावों को दर्शाता है: एक तरफ युद्ध की क्रूरता और एक तरफ राज्य के भीतर डर और असहमति का प्रभाव।
केंद्रीय अभिप्राय
विध्वंस के बाद भी बचे हुए लोग और बेन्हदद की पनाह लेते हुए स्थिति से बचने का दुस्साहस बयान करते हैं। यह अध्यायश्रेणी दिखाती है कि शत्रु के मार्ग के अंत में भी करुणा और दया के लिए अवसर रहते हैं, परन्तु वास्तविक विजय तब मिलती है जब परमेश्वर के निर्णय को मान्यता दी जाती है।
मूर्त विषय-वस्तु
कुंजी प्रवचन और संबंधित पाठ
यहां हल्के-हल्के तीन संदर्भ मिलते हैं जो इस दृश्य की गहराई को देखते हैं:
पोषित उद्धरणों के साथ व्यावहारिक टिप्पणी
अतिरिक्त गहराई के लिए, इन चर्चित व्याख्याओं से संक्षिप्त सार: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने युद्ध-स्थिति में दृढ़ विश्वास, भय के मुकाबले साहस, और परमेश्वर की नीति के साथ जीवन को समझाने में योगदान किया है। यदि किसी पाठ के साथ उनके स्पष्ट शब्द उपलब्ध हों, उन्हें यहाँ उद्धृत किया गया है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) अन्य युद्ध-कथाओं के पीछे परमेश्वर की सुरक्षा: पिता-प्रेरित सुरक्षा के संदर्भ के साथ देखें।
2) नगर-दीवारों के गिरने की प्रतीकात्मकता: कलिकाओं में सुरक्षित रहने की आशा बनाम विश्वसनीय सत्ता का प्रश्न।
3) भय और भागने के संदर्भ में तत्कालीन निर्णय: सुरक्षित रहने के लिए प्रभु के निर्देश का पालन कैसे प्रेरित करता है।
व्यावहारिक चिंतन
यहverse हमें सिखाता है कि संकट के समय में भी परमेश्वर के मार्गदर्शन के अनुरूप हर कदम उठाने से सुरक्षा मिलती है। भय के बावजूद, मनुष्य अपने संघर्षों में भी प्रभु की सहायता को पुकार सकता है, और सामाजिक-राजनीतिक तबके में भी ईश्वर की योजना स्पष्ट होती है।
संक्षिप्त समापन
1 राजाओं 20:30 का यह दृश्य दिखाता है कि विनाश के क्षणों में भी सुरक्षा एक परमेश्वर-आधारित अनुमान से आती है, न कि केवल मनुष्यों की सुरक्षा-कायदे से। बेन्हदद का भागना एक राहत नहीं, बल्कि सत्ता के भ्रम के बावजूद ईश्वर की योजना के आगे विवेकपूर्ण प्रतिक्रिया का संकेत है।
इस टिप्पणी में प्रयुक्त विचारMatthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन व्याख्यानों के अनुरूप हैं, और जहाँ संभव हो वहाँ उनके छोटे-छोटे शब्द-सार शामिल किए गए हैं।