Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 20:1 1 राजाओं 20:2 1 राजाओं 20:3 1 राजाओं 20:4 1 राजाओं 20:5 1 राजाओं 20:6 1 राजाओं 20:7 1 राजाओं 20:8 1 राजाओं 20:9 1 राजाओं 20:10 1 राजाओं 20:11 1 राजाओं 20:12 1 राजाओं 20:13 1 राजाओं 20:14 1 राजाओं 20:15 1 राजाओं 20:16 1 राजाओं 20:17 1 राजाओं 20:18 1 राजाओं 20:19 1 राजाओं 20:20 1 राजाओं 20:21 1 राजाओं 20:22 1 राजाओं 20:23 1 राजाओं 20:24 1 राजाओं 20:25 1 राजाओं 20:26 1 राजाओं 20:27 1 राजाओं 20:28 1 राजाओं 20:29 1 राजाओं 20:30 1 राजाओं 20:31 1 राजाओं 20:32 1 राजाओं 20:33 1 राजाओं 20:34 1 राजाओं 20:35 1 राजाओं 20:36 1 राजाओं 20:37 1 राजाओं 20:38 1 राजाओं 20:39 1 राजाओं 20:40 1 राजाओं 20:41 1 राजाओं 20:42 1 राजाओं 20:43



1 राजाओं 20:21—सीधी प्रतिक्रिया और विश्वास की दृढ़ता
तथाकथित निवारक संग्राम के बीच इस्राएल के राजा ने निकलकर घोड़ों और रथों को मारकर अरामियों को बड़ी मार से मारा। यह दृश्य युद्ध-नीति और निर्भरता दोनों के बीच की सीमा को दर्शाता है—जहाँ एक तरफ पृथ्वीय सेनाओं की ताकत सबसे बड़ी लगती है, वहीं परमेश्वर की सहायता के बिना वह टिक नहीं पाते। यह संदर्भ हमें यह याद दिलाता है कि ईश्वर की चाकचिकित्त योजना के अनुरूप युद्ध के परिणाम किसके हाथ में हैं, और कैसे विश्वासपूर्वक कदम उठाने से प्रभु आशीषित बनते हैं.
ईश्वरीय आशीष और विश्वास की परीक्षा
पाठ के इस हिस्से में राजा का आचरण यह दर्शाता है कि इस्राएल ने अपनी सामर्थ्य को सर्वोपरि मानकर युद्ध किया। परंतु समय-समय पर यहूदियों के इतिहास में यह सच उभर कर आता है कि परमेश्वर की सहायता के बिना साधारण हथियार भी पूरक बन जाते हैं, परन्तु परमेश्वर के साथ संभव हो जाता है। “तब इस्राएल के राजा ने भी निकलकर घोड़ों और रथों को मारा”—यह पंक्ति इस बात का संकेत है कि राजा ने मान लिया था कि आधुनिक सैन्य उपकरणों से जीत संभव है; परन्तु वास्तविक विजय परमेश्वर की कृपा पर निर्भर है, जो आगे के अनुभव से स्पष्ट होती है।
शब्दार्थ और चित्र सं consign
Related cross-references (संक्रमण) और उनके अर्थ
• न्याय और निर्भरता के पुनः परीक्षण: समुदायिक मामलों में जब लोग अपने साधनों पर अधिक निर्भर होते हैं, तब परमेश्वर की महिमा उजागर होती है।
• परमेश्वर की सहायता की पुनरावृत्ति: पहले और बाद के घटनाक्रम दर्शाते हैं कि ईश्वर अपने चुने हुओं को निरंतर मार्गदर्शन देते हैं, भले वे कितना भी संघर्ष क्यों न करें।
उद्धरणी निष्कर्ष (पूर्व-गठित विचारों का समन्वय)
यह पाठ यह स्मरण कराता है कि सफलता एक बहुमुखी चाभी नहीं है—यह परमेश्वर की कृपा, ईमानदार चरणबद्ध आस्था और शत्रुओं के विरुद्ध सही समय पर सही कदम के सम्मिलन से आती है। इसे देखने के लिए नीचे 2-3 पंक्तियाँ उद्धृत करने वाले पूर्व-धाराकर्ता विचारों के अनुरोध पर ध्यान दें:
मैथ्यू हेनरी (Henry) और एडम क्लार्क (Clarke) आदि के विवेचन में यह अक्सर मिलता है कि यहूदियों के लिए कारण की पहचान और परमेश्वर पर निर्भरता, दोनों का संतुलन आवश्यक है।
आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
नोट: नीचे उद्धरणकर्ता स्रोतों के संक्षिप्त संकेत दिए जा रहे हैं; यदि आप चाहें तो मैं विशिष्ट पंक्तियाँ या उद्धरण सीधे प्रस्तुत कर सकता/सकती हूँ।