Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 6:1 1 राजाओं 6:2 1 राजाओं 6:3 1 राजाओं 6:4 1 राजाओं 6:5 1 राजाओं 6:6 1 राजाओं 6:7 1 राजाओं 6:8 1 राजाओं 6:9 1 राजाओं 6:10 1 राजाओं 6:11 1 राजाओं 6:12 1 राजाओं 6:13 1 राजाओं 6:14 1 राजाओं 6:15 1 राजाओं 6:16 1 राजाओं 6:17 1 राजाओं 6:18 1 राजाओं 6:19 1 राजाओं 6:20 1 राजाओं 6:21 1 राजाओं 6:22 1 राजाओं 6:23 1 राजाओं 6:24 1 राजाओं 6:25 1 राजाओं 6:26 1 राजाओं 6:27 1 राजाओं 6:28 1 राजाओं 6:29 1 राजाओं 6:30 1 राजाओं 6:31 1 राजाओं 6:32 1 राजाओं 6:33 1 राजाओं 6:34 1 राजाओं 6:35 1 राजाओं 6:36 1 राजाओं 6:37 1 राजाओं 6:38



1 राजाओं 6:14 — संदर्भ के साथ व्याख्या
इस पद में सुलैमान का पवित्र मन्दिर बनवाने का उल्लेख आता है, जिसका उद्देश्य यह दर्शाना है कि कैसे ईश्वर के लिए समर्पित चिन्हात्मक भवन सचमुच परमेश्वर की आशीष और प्रेरणा से बना। इतिहास का यह भाग हमारे लिए यह स्मरण कराता है कि राजा की बहुविध शक्तियाँ और संसाधन भी परमेश्वर की योजना के अनुसार एक उद्देश्य के लिए देय होते हैं।
केंद्रीय भावार्थ
“अतः सुलैमान ने भवन को बनाकर पूरा किया”—यह वाक्य उस क्षण का संकेतन है जब निर्माणकार्य सम्पूर्ण हुआ और समर्पित कृत्य के रूप में दिव्य मंदिर की भव्यता प्रकट हुई। यह पूर्णता यह बताती है कि परमेश्वर के लिए की गई सेवा एक संगठित, व्यवस्थित और गहन दुआ-उद्धाराओं के साथ पूर्ण होती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित उक्तियाँ
यह verses अन्य हिस्सों से जुड़ते हैं जो मंदिर की महिमा, परमेश्वर के नाम के लिए समर्पण और शांति-स्थापना पर प्रकाश डालते हैं:
हर संदर्भ में—a) परमेश्वर का नाम महिमा के साथ प्रकट होता है, b) निर्माण एक आध्यात्मिक संकेत बनकर समुदाय को एक पवित्र आचरण सिखाता है।
व्यावहारिक विचार
आज के विश्वासी के लिए यह संदेश देता है कि किसी भी धार्मिक-निर्माण या उपलब्ध संसाधनों का उपयोग तब ही सार्थक है जब उसका उद्देश्य परमेश्वर की महिमा और लोगों की सेवा हो। भवन-निर्माण, आयोजन या किसी भी सामुदायिक उपक्रम में दक्षता, विनम्रता और समर्पण आवश्यक है। हर चीज़ में ईश्वर के नाम के लिए श्रेष्ठता की चाह रखें, ताकि समुदाय में शांति और सत्य का प्रकाश फैले।
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस पद के अनुसार सुलैमान ने भवन को पूरा कर कार्य-संक्रमण का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा किया। यह कही गई बात कहती है कि परमेश्वर के लिए की गई हर सुव्यवस्थित सेवा उसकी महिमा के लिए होती है और समुदाय के लिए आशीष बनती है।
नोट्स/ उद्धरण
यहेक हिस्से में मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बॉर्न्स और एडम क्लार्क के स्पष्ट उद्धरण दिए गए हैं जब वे संकल्पनात्मक रूप से समान विषयों पर टिप्पणी करते हैं।