Old Testament
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1 राजाओं 6:1 1 राजाओं 6:2 1 राजाओं 6:3 1 राजाओं 6:4 1 राजाओं 6:5 1 राजाओं 6:6 1 राजाओं 6:7 1 राजाओं 6:8 1 राजाओं 6:9 1 राजाओं 6:10 1 राजाओं 6:11 1 राजाओं 6:12 1 राजाओं 6:13 1 राजाओं 6:14 1 राजाओं 6:15 1 राजाओं 6:16 1 राजाओं 6:17 1 राजाओं 6:18 1 राजाओं 6:19 1 राजाओं 6:20 1 राजाओं 6:21 1 राजाओं 6:22 1 राजाओं 6:23 1 राजाओं 6:24 1 राजाओं 6:25 1 राजाओं 6:26 1 राजाओं 6:27 1 राजाओं 6:28 1 राजाओं 6:29 1 राजाओं 6:30 1 राजाओं 6:31 1 राजाओं 6:32 1 राजाओं 6:33 1 राजाओं 6:34 1 राजाओं 6:35 1 राजाओं 6:36 1 राजाओं 6:37 1 राजाओं 6:38


अर्थ सार: दरवाजे और उनकी संरचना (1 राजाओं 6:34, HINIRV)
सीधी टिप्पणी यह है कि जो दरवाजे थे वे सनोवर की लकड़ी से बने थे और उनमें प्रत्येक दरवाजे के दो पल्ले थे जिन्हें पलटकर दुहराते थे। इससे भवन की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी का संकेत मिलता है: दोहरी पल्लों वाले दरवाजे खोलना और बंद करना सरल बनाते हैं, और पुनः-उद्धरण योग्य व्यवस्था का परिचय देते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अध्याय किंगडम कोड़ा/सोलोमन के मन्दिर निर्माण के दौरान के दृश्य प्रस्तुत करता है। उस समय के वास्तुकला में दरवाजों के झरोखों के प्रकार और उनके संचरण की तकनीकें दर्शाई गई हैं ताकि वह भवन का उद्देश्य—आस्था के अवसर और पवित्र स्थान की मर्यादा—सहज रूप से प्रतिबिंबित करें। सनोवर की लकड़ी का उल्लेख विशेष रूप से गुणवत्ता और धार्मिक沉न के संकेत के रूप में है।
Interpretation observations
छोटा थीमेटिक सूची
अन्य प्रचलित टिप्पणीकारों के अनुरोधित विचार
Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के संकेतन से मिलती सामान्य धारा इस प्रकार है: दरवाजे के दो पल्ले सुरक्षा और प्रवेश दोनों के अवसर का संकेत करते हैं; पलटकर दुहरना मानवीय पूजा-आचरण के समय-सारिणी को दर्शाता है। नीचे संक्षेप में उनके विचारों के सारांश दिए जा रहे हैं:
Henry कहता है कि यह वास्तु-निर्माण की सादगी में भी एक आशीष है—चौकस प्रवेश, शिष्यत्व, और ईश्वर की उपस्थिति के लिए खुला स्थान। Clarke और Barnes अपने-अपने ढंग से बताते हैं कि ऐसी व्यवस्था मंदिर के कार्यशील भाग के क्रम को संरक्षित रखती है, ताकि विधायिका के समय में भी श्रद्धालु उचित मार्ग से प्रवेश कर सकें।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षेपित निष्कर्ष
सम्बंधित शास्त्रांश जो इस विचार को पुष्ट करते हैं:
व्यावहारिक निष्कर्ष
1 राजाओं 6:34 की यह छवि हमें यह सिखाती है कि पूजा-स्थल का डिज़ाइन सिर्फ बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि गंभीर क्रम, प्रवेश-नियंत्रण और पवित्र स्थान की गरिमा को बनाये रखने का माध्यम है। हमारे आधुनिक आलय-आचरण में भी ईश्वर के सामने आते समय स्पष्ट मार्ग, सही प्रविष्टि और गरिमा बनाए रखना चाहिए।