Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 6:1 1 राजाओं 6:2 1 राजाओं 6:3 1 राजाओं 6:4 1 राजाओं 6:5 1 राजाओं 6:6 1 राजाओं 6:7 1 राजाओं 6:8 1 राजाओं 6:9 1 राजाओं 6:10 1 राजाओं 6:11 1 राजाओं 6:12 1 राजाओं 6:13 1 राजाओं 6:14 1 राजाओं 6:15 1 राजाओं 6:16 1 राजाओं 6:17 1 राजाओं 6:18 1 राजाओं 6:19 1 राजाओं 6:20 1 राजाओं 6:21 1 राजाओं 6:22 1 राजाओं 6:23 1 राजाओं 6:24 1 राजाओं 6:25 1 राजाओं 6:26 1 राजाओं 6:27 1 राजाओं 6:28 1 राजाओं 6:29 1 राजाओं 6:30 1 राजाओं 6:31 1 राजाओं 6:32 1 राजाओं 6:33 1 राजाओं 6:34 1 राजाओं 6:35 1 राजाओं 6:36 1 राजाओं 6:37 1 राजाओं 6:38



1 राजाओं 6:27 का संदर्भ और उसका सन्निकट आत्मबोध
यह वाक्य मंदिर के भीतर करूबों की स्थापना से सम्बंधित है। राजा सुलैमान ने भवन को पवित्रता के कक्ष से, बाहरी आंगन तक, सब कुछ सुव्यवस्थित किया ताकि ईश्वर की महिमा और शुद्धता खुले तौर पर प्रकट हो। करूब भीतर के स्थान के पास रखे गए और उनके पंख भवन के पवित्र दृश्य को घेरते हुए फैले रहे।
ईश्वरीय उपस्थिति का दृश्य और विश्वास की सीख
करूबों के साथ यह चित्रण यह बताता है कि परमेश्वर की महिमा इतनी पवित्र है कि उसे मानवीय आस्था में भी अत्यंत सम्मान और सीमा के साथ पूजन करना चाहिए। पंखों का ऐसा फैना दर्शाता है कि ईश्वर की उपस्थिति एक सुरक्षित, संरक्षित और सम्मानित स्थान में है—जहाँ एक प्रकार की सीमा, दूरी और पवित्रता बनी रहती है।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ और चित्रकला
अन्य पवित्र शास्त्रीय संदर्भ
इन तत्वों की तुलना में दो-दिशात्मक चीत्कार दिखता है: महिमावान परमेश्वर की उपस्थिति चारों ओर फैलती है और भक्तों के लिए एक पवित्र दूरी बनाए रखती है।
Related cross-references (संक्षेप में):
प्रसंगगत टिप्पणी और उपयोगी दृष्टि
महत्वपूर्ण टिप्पणीकारों के विचार से स्पष्ट है कि यह दृश्य ईश्वर के साथ मानवीय जुड़ाव में सही दूरी बनाए रखने की सीख देता है। हेनरी, बार्न्स और क्लार्क के टिप्पणी-कटाक्षों से यह उभरता है कि मंदिर-निर्माण में परमेश्वर की उपस्थिति एक उन्नत पवित्रता-संरचना के भीतर सुरक्षित रहती है, जिसे मानवीय श्रद्धा के रूप में सम्मान देना चाहिए। “करूबों के पंख ऐसे फैले थे”—यह शब्द परमेश्वर की महिमा की सीमा और संरक्षण का संकेत है। यह हमें स्मरण कराता है कि हमारी आराधनाěk भी शुद्धता और भक्ति के साथ होनी चाहिए।
आज के लिए अनुप्रयोग
नोट: नीचे उद्धृत विशिष्ट पाठ-उद्धरण केवल Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्राचीन टिप्पणी-स्रोतों से मौखिक संकेत प्रस्तुत करते हैं; पूर्ण वाक्यों की पुनरावृत्ति नहीं की गई है।