1 राजाओं 6:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो भवन राजा सुलैमान ने यहोवा के लिये बनाया उसकी लम्बाई साठ हाथ, चौड़ाई बीस हाथ और ऊँचाई तीस हाथ की थी। (प्रेरि. 7:47)

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1 राजाओं 6:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

मतलब का सीधे शब्द

यह वाक्य सुलैमान के मंदिर की भव्यता का आयाम बताता है: भवन की लंबाई छह हाथ, चौड़ाई बीस हाथ और ऊँचाई तीस हाथ। इसका उद्देश्य देवता के लिए बनाए गए स्थान की महिमा और उसमें प्रयोजन की पवित्रता को प्रकट करना है।

संदर्भ-भूमि

1 राजाओं 6 अध्याय में सुलैमन का मंदिर बनना वर्णित है। यह मंदिर यरुशलेम के पहाड़ी क्षेत्र में प्रभु यहोवा के नाम के लिए स्थिर पूजा का केंद्र बना। प्रेरितों के समय के साथ जुड़ाव नहीं, बल्कि यहूदी सभ्यता में एक विशिष्ट धार्मिक स्थल की स्थापना का प्रतीक है।

व्याख्यात्मक विचार

  • माप का ध्यान: छह हाथ लम्बाई, बीस हाथ चौड़ाई, और तीस हाथ ऊँचाई—यहाँ प्रणालीबद्ध विन्यास दिखता है ताकि स्थान पवित्र बने।
  • आयाम का अर्थ: मंदिर की विशालता उसकी महिमा के प्रदर्शन के साथ सुखद चर्चितता नहीं, बल्कि उसकी पवित्रता और ईश्वर के निवास स्थान के संकेत के रूप में है।
  • भवन-कला बनाम साधना: भव्य निर्माण सौंदर्य का चरम है, परन्तु वास्तविकता यह है कि परमेश्वर अपनी पूजा में आस्थावान दिलों को चाहता है, मिट्टी के बर्तन नहीं।

छोटी थीमैटिक सूची

  • आयाम और उद्देश्य: मंदिर का आकार देवत्व के उपस्थिति के संकेत हैं।
  • पूर्व-पश्चिम दिशा के संकेत: स्थान के प्रतीकात्मक ढांचे पर विचार करें।
  • धार्मिक परिसर की पवित्रता: लोगों का मन और आस्था सफल पूजा के लिए जरूरी है।

क्रॉस-रेफरेंस और उनके तात्पर्य

• प्रेरितों के समय की शिक्षाओं से नहीं, परन्तु पुराने नियम के पूजास्थल के आयामों के महत्व को समझना: मंदिर का स्थापत्य पवित्रता, समर्पण और सेवक-भाव को दर्शाता है।

• स्मरणीय संदर्भ: एक प्राचीन मंदिर के विनिर्देशों में नियतता और क्रम का संकेत मिलता है ताकि पूजा की रीति-रिवाज मानो एक-सुसंगत लय में चलती रहे।

• संकल्पना: हर आयाम एक पहलू को दर्शाता है—लंबाई से व्यापकता, चौड़ाई से स्थल-स्थिरता, ऊँचाई से प्रतिष्ठा और महिमा—जो भविष्य की आराधना के लिए ढांचा बनता है।

संक्षिप्त अभ्यास-योग

  • क्यों मंदिर का आकार महत्त्वपूर्ण रहा: यहदेव की शांति और पवित्रता की अनुभूति को प्रेरित करता है।
  • हम आज अपने दिल के मंदिर के आयाम कैसे निर्धारित करें: क्या हमारी आस्था भी पवित्रता के साथ व्यवस्थित है?

पक्का निष्कर्ष

इतिहास की यह सूक्ति दिखाती है कि परमेश्वर के स्थान की विन्यासशीलता हमारे भय, प्रेम और समर्पण की दिशा को एक संरेखण में लाती है। मंदिर का आकार यह दर्शाता है कि पूजा सुसंगत, व्यवस्थित और परमेश्वर-केन्द्रित होनी चाहिए—ताकि हमारी प्रवृत्ति भी उसकी महिमा में समर्पित रहे।

प्रमुख उद्धरण (public-domain) से संकेत

यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलनों से सीधे उद्धरण चाहते हों, तो उनसे मिलते-जुलते ऐसे विचार मिलेंगे जो परमेश्वर के महत्त्व, मंदिर-आयाम की प्रतीकात्मकता, और पूजा की पवित्रता पर बल देते हैं। (यथा तुलनात्मक विचार, पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है.)

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 राजाओं 6:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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हमारी बँधुआई के पच्चीसवें वर्ष अर्थात् यरूशलेम नगर के ले लिए जाने के बाद चौदहवें वर्ष के पहले महीने के दसवें दिन को, यहोवा की शक्ति मुझ पर हुई, और उसने मुझे वहाँ पहुँचाया।

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यहेजकेल 41:1 (HINIRV) »
फिर वह मुझे मन्दिर के पास ले गया, और उसके दोनों ओर के खम्भों को मापकर छः-छः हाथ चौड़े पाया, यह तो तम्बू की चौड़ाई थी।

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“राजा कुस्रू के पहले वर्ष में उसी कुस्रू राजा ने यह आज्ञा दी, कि परमेश्‍वर के भवन के विषय जो यरूशलेम में है, अर्थात् वह भवन जिसमें बलिदान किए जाते थे, वह बनाया जाए और उसकी नींव दृढ़ता से डाली जाए, उसकी ऊँचाई और चौड़ाई साठ-साठ हाथ की हो;

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