Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 6:1 1 राजाओं 6:2 1 राजाओं 6:3 1 राजाओं 6:4 1 राजाओं 6:5 1 राजाओं 6:6 1 राजाओं 6:7 1 राजाओं 6:8 1 राजाओं 6:9 1 राजाओं 6:10 1 राजाओं 6:11 1 राजाओं 6:12 1 राजाओं 6:13 1 राजाओं 6:14 1 राजाओं 6:15 1 राजाओं 6:16 1 राजाओं 6:17 1 राजाओं 6:18 1 राजाओं 6:19 1 राजाओं 6:20 1 राजाओं 6:21 1 राजाओं 6:22 1 राजाओं 6:23 1 राजाओं 6:24 1 राजाओं 6:25 1 राजाओं 6:26 1 राजाओं 6:27 1 राजाओं 6:28 1 राजाओं 6:29 1 राजाओं 6:30 1 राजाओं 6:31 1 राजाओं 6:32 1 राजाओं 6:33 1 राजाओं 6:34 1 राजाओं 6:35 1 राजाओं 6:36 1 राजाओं 6:37 1 राजाओं 6:38



मतलब का सीधे शब्द
यह वाक्य सुलैमान के मंदिर की भव्यता का आयाम बताता है: भवन की लंबाई छह हाथ, चौड़ाई बीस हाथ और ऊँचाई तीस हाथ। इसका उद्देश्य देवता के लिए बनाए गए स्थान की महिमा और उसमें प्रयोजन की पवित्रता को प्रकट करना है।
संदर्भ-भूमि
1 राजाओं 6 अध्याय में सुलैमन का मंदिर बनना वर्णित है। यह मंदिर यरुशलेम के पहाड़ी क्षेत्र में प्रभु यहोवा के नाम के लिए स्थिर पूजा का केंद्र बना। प्रेरितों के समय के साथ जुड़ाव नहीं, बल्कि यहूदी सभ्यता में एक विशिष्ट धार्मिक स्थल की स्थापना का प्रतीक है।
व्याख्यात्मक विचार
छोटी थीमैटिक सूची
क्रॉस-रेफरेंस और उनके तात्पर्य
• प्रेरितों के समय की शिक्षाओं से नहीं, परन्तु पुराने नियम के पूजास्थल के आयामों के महत्व को समझना: मंदिर का स्थापत्य पवित्रता, समर्पण और सेवक-भाव को दर्शाता है।
• स्मरणीय संदर्भ: एक प्राचीन मंदिर के विनिर्देशों में नियतता और क्रम का संकेत मिलता है ताकि पूजा की रीति-रिवाज मानो एक-सुसंगत लय में चलती रहे।
• संकल्पना: हर आयाम एक पहलू को दर्शाता है—लंबाई से व्यापकता, चौड़ाई से स्थल-स्थिरता, ऊँचाई से प्रतिष्ठा और महिमा—जो भविष्य की आराधना के लिए ढांचा बनता है।
संक्षिप्त अभ्यास-योग
पक्का निष्कर्ष
इतिहास की यह सूक्ति दिखाती है कि परमेश्वर के स्थान की विन्यासशीलता हमारे भय, प्रेम और समर्पण की दिशा को एक संरेखण में लाती है। मंदिर का आकार यह दर्शाता है कि पूजा सुसंगत, व्यवस्थित और परमेश्वर-केन्द्रित होनी चाहिए—ताकि हमारी प्रवृत्ति भी उसकी महिमा में समर्पित रहे।
प्रमुख उद्धरण (public-domain) से संकेत
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलनों से सीधे उद्धरण चाहते हों, तो उनसे मिलते-जुलते ऐसे विचार मिलेंगे जो परमेश्वर के महत्त्व, मंदिर-आयाम की प्रतीकात्मकता, और पूजा की पवित्रता पर बल देते हैं। (यथा तुलनात्मक विचार, पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है.)