Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 25:20 का वर्णन: करूबों के पंख और प्रायश्चित के ढकना
पाठ का पूर्वपृष्ठ: यह दृश्य पवित्र प्रांगण के अन्दर्तromकाम: यीशुदेवता-सम्बन्धी व्यवस्था के लिए केंद्रभूत आनी-देह महा संरचना का भाग है। वरदान-लिप्त इस आकाशीय शिल्प ( Ark) के ऊपर करूबों के पंख फैलकर सामने से एक ढाल-सी बनाते हैं, ताकि प्रायश्चित का ढकना उनकी से सुरक्षा करे। यह दोष-परिहार और देव-सम्पर्क के बीच एक दिव्य आवरण की प्रतीकता देता है।
यह पाठ ईश्वर के समर्पण और विश्वास के बारे में क्या बताता है
इस आयत में करूबों के पंखों की स्थिति और ढकने की भूमिका देव-गाथा के भीतर एक ठोस आश्वासन है: परमेश्वर अपने लोक के साथ प्रत्यक्ष नहीं बल्कि एक पवित्र व्यवस्था के ढांचे के भीतर प्रत्यक्ष संपर्क की अनुमति देते हैं। प्रायश्चित का ढकना यह दर्शाता है कि क्रोध के डर से नहीं, बल्कि पवित्रता के अनुरूपaccess का मार्ग बनता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर अपने लोग को पवित्र बनाए रखना चाहते हैं, ताकि तब वे उनके सामने आते समय प्रायश्चित के सुरक्षा-चिह्न में सुरक्षित रहें।
महत्वपूर्ण शब्द और तस्वीरे
अनुशासनिक cross-references
ये बिंदु प्रवाह में कहानी के साथ जुड़ते हैं:
हिंदी व्यवहारिक पाठ
आज के संदर्भ में यह पाठ हमें यह स्मरण कराता है कि ईश्वर के सामने आने के लिए एक विशेष पवित्र-प्रशासन और ईमानदार आस्था आवश्यक है। जीवन के विविध क्षेत्रों में हम अपने दोषों से बचने के लिए प्रभु के दिए हुए मार्ग—पवित्र जाँच, प्रायश्चित और विश्वास-योग्यता—का पालन करें। परमेश्वर का उद्देश्य केवल डांटना नहीं, बल्कि हमारे भीतर पवित्रता की सुरक्षा को बनाए रखना है ताकि हम उनके साथ सीधा-सच्चा संबंध बनाए रखें।
विश्वासी के लिए दैनिक प्रेरणा
याद रहे उद्धार-वाक्य (संक्षिप्त संदर्भ)
1) परमेश्वर की महिमा और पवित्रता के सामने हम निर्लज्ज नहीं हो सकते; परंतु उनकी आत्मा से ढांचागत सुरक्षा मिलने पर हृदय का भय नहीं, बल्कि श्रद्धा बढ़ती है।
2) परमेश्वर के सही ढांचे के भीतर आना, अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना है; यह विश्वास की यात्रा में एक स्थिरता देता है।
नोट: नीचे उद्धृत साफ़ शब्दों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के मौलिक टिप्पणी-उद्धरण उपलब्ध हो तो उनका संक्षिप्त उल्लेख दिया गया है।