Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
निर्गमन 25:1 निर्गमन 25:2 निर्गमन 25:3 निर्गमन 25:4 निर्गमन 25:5 निर्गमन 25:6 निर्गमन 25:7 निर्गमन 25:8 निर्गमन 25:9 निर्गमन 25:10 निर्गमन 25:11 निर्गमन 25:12 निर्गमन 25:13 निर्गमन 25:14 निर्गमन 25:15 निर्गमन 25:16 निर्गमन 25:17 निर्गमन 25:18 निर्गमन 25:19 निर्गमन 25:20 निर्गमन 25:21 निर्गमन 25:22 निर्गमन 25:23 निर्गमन 25:24 निर्गमन 25:25 निर्गमन 25:26 निर्गमन 25:27 निर्गमन 25:28 निर्गमन 25:29 निर्गमन 25:30 निर्गमन 25:31 निर्गमन 25:32 निर्गमन 25:33 निर्गमन 25:34 निर्गमन 25:35 निर्गमन 25:36 निर्गमन 25:37 निर्गमन 25:38 निर्गमन 25:39 निर्गमन 25:40


निर्गमन 25:7 का दायित्वपूर्ण अर्थ
मुख्य व्याख्या बिंदु: परमेश्वर के लिये आकरय-अभिनय में विधिपूर्वक सजाये गये उपकरणों की तैयारी में निर्गमन 25:7 में दिये गये पदार्थ एकता, पवित्रता और धार्मिक पद्धति की प्रतिमा बनाते हैं। सोने-चांदी, एपोद, चपरास—ये वही सामग्री हैं जो परमेश्वर के वचन-बाह्य मंदिर-योजना के भीतर, सेवा-उपकरणों की विशिष्टता और उसकी पवित्रता को दर्शाते हैं। यहाँ पत्थर और मणि का उल्लेख नहीं है; बल्कि “अभोद” (अपोद) और “चपरास” वस्तुयें, और जड़ने के लिये मणि के साथ समन्वय में एक पवित्र क्रम बनाते हैं। यह संकेत देता है कि परमेश्वर की सेवा केवल बाहरी रीति-रिवाज नहीं, बल्कि आ–आंतरिक मर्यादा और दृढ़ विश्वास की स्थापना भी है।
साहित्यिक संदर्भ के पारिपाट्य
वस्तुओं की सूची मंदिर के उपकरणों के निर्माण के भाग के रूप में प्रस्तुत होती है—इनका उद्देश्य देवत्व के साथ जुड़ना है। पुरानी यहूदी परंपरा में यह शब्द-चयन स्पष्ट करता है कि सेवक desires की पूर्ति हेतु सामग्री की किस्में संतुलित और पवित्र होनी चाहिए। जैसे-जैसे योजना आगे बढ़ती है, प्रत्येक साधन एक विशिष्ट धार्मिक भूमिका निभाने के लिये चुना गया है—आवाहन और समर्पण के क्रम में।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
यहाँ पदार्थ एक प्रतीक बनते हैं: एपोद और चपरास सुलैमानी शैली के उपकरण हैं, जिन्हें विशेष धार्मिक कर्म के लिए चुना गया। “जड़ने के लिये मणि” का उल्लेख संस्थापना के समय की दीप्ति और दृढ़ता को दर्शाता है। यह दिखाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था में भक्ति और सटीकता दोनों आवश्यक हैं—सेवा में प्रयुक्त हर वस्तु की पहचान और उसका पूज्य उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।
पवित्र ग्रंथों के साथ सम्बन्ध
- प्रवेश-योजना के मंदिरीय औपचारिकताओं के साथ—निर्गमन की यह विस्तृत सूची यह बताती है कि परमेश्वर की प्रेरणा से बनी सेविका-चयन में समर्पण केंद्रित है।
- अन्य स्रोतonde: पवित्र वस्त्रों और औजारों के वितरण में समान तत्त्व मिलते हैं जहाँ सामग्री की गुणवत्ता और पवित्रता बराबर महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।
- पंथ-प्रवण उत्कृष्टता के लिए, शांति और एकता के लिए दैवीय निर्देशों के अनुरूप संपन्नता आवश्यक है।
आत्म-चिंतन के लिये प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
निर्गमन 25:7 यह दिखाता है कि परमेश्वर की सेवा के लिए चुनी गयी हर वस्तु, हर उपकरण एक भाग बनता है एक दैवीय योजना का। यह सिर्फ भौतिक सामग्री नहीं है, बल्कि विश्वास-समर्पण, तथ्यपरकता और पवित्रता का मिलन है—जो मिलने पर ही वास्तविक आराधना को पूरा करता है।
Cross-references (संक्षिप्त संकेत)
1) प्रकाशित-निर्गमन 28–29: मंदिर के वस्त्र-उपकरणों का पवित्र विभाजन—भक्ति और क्रम की महत्ता।
2) शास्त्र-उद्धरण में 2-योर 9:21 प्रकार के पवित्र कर्म-उपकरण—वस्तु-निर्माण के साथ कर्म-व्यवस्था का संयोजन।
3) हिब्रियों 9:1–2, 9:11–12: यहूदियों के आराधना-उपकरणों की प्रतीकात्मकता और वास्तविकता के बीच के सम्बन्ध का संकेत देता है।
नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सीधे उद्धरणों की विशिष्ट पंक्तियाँ उपलब्ध हैं तो उनका उल्लेख आवश्यक है; यहाँ संक्षेप में उनका प्रभाव-उद्धरण प्रयोजन अनुसार प्रयुक्त है।