Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 25:38 — गुलतराश और गुलदान की शुद्धता
यह पद पवित्र मन्दिर के भीतर के उपकरणों की विशेषताओं के विवरण में आता है। स्वर्गीय व्यवस्था के अनुसार, यह बताता है कि ईश्वर बनावट-चयन में कितने अद्वितीय और पवित्र पदों पर अतिक्रमण नहीं चाहते। गुलदराश (पात्र-आयत) और गुलदान (गुलदान) सब शुद्ध सोने के हों—यानी वे सब दिव्य सम्मान और सेवा के लिए पूर्ण पवित्रता के साथ बने हैं।
स्वरूप और अर्थ पर नज़र
शुद्ध सोने के पदार्थ का चयन यह दर्शाता है कि स्वर्गीय व्यवस्था परम पवित्रता और नि:स्वार्थ दरिद्रता-रहित सेवा की दिशा में है। सोना बहुलता से स्पष्ट करता है कि यह उपकरण सिर्फ साधारण वस्तुएँ नहीं, बल्कि ईश्वर के आत्म-आहार और पूजा के अवसरों के वाहक हैं। “शुद्ध” विशेषण से आशय है—अशील, अधूरा या अन्य देवी-देवताओं के साथ मिश्रित नहीं, बल्कि एक एकरस, निर्दोष अवस्था।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ और प्रतीक
अन्य प्रासंगिक पद (क्रॉस-रेफरेंसेस)
कई बार पुराने नियम में स्वर्ण-आकाश जैसी पवित्रता की चर्चा इशारे के रूप में मिलती है। नीचे दिए गए संदर्भ इस धारणा को मजबूत करते हैं, बिना पाठ का पूर्ण पाठ उद्धृत किए:
इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि मन्दिर-उपकरण की शुद्धता का उद्देश्य कर्तव्यनिष्ठ पूजा और ईश्वर के गुणों के अनुरूप जीवन बनाना है।
आज के समय में अनुप्रयोग
अपने धार्मिक जीवन में हम पाते हैं कि पवित्रता केवल बाह्य सजावट नहीं, पूर्वक तैयारी का आंतरिक प्रदर्शन है। माता-पिता, शिक्षक, या सामुदायिक नेता के रूप में, हमारे कार्य—सच्चे दिल से ईश्वर की सेवा, वचन-आचरण और निष्ठा—इन उपकरणों की शुद्धता की तरह हैं: पूर्णता की खोज और अधूरेपन से बचना।
संक्षेप में: निर्गमन 25:38 हमें सिखाता है कि परमेश्वर के सामने हमारे आराधन और कार्य उच्च मानक के अनुसार होने चाहिए—शुद्धता, एकाग्रता, और पूर्ण समर्पण से।
इस पाठ के भीतर उद्धृत धार्मिक टिप्पणीकारों के छोटे संकेत (जहाँ उपलब्ध हों) यथा: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों का समाकलन जरूरी है; परन्तु मूल पाठ के साथ उनका उद्धरण केवल उपलब्ध होने पर ही दिया गया है।