निर्गमन 25:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उसके गुलतराश और गुलदान सब शुद्ध सोने के हों।

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निर्गमन 25:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 25:38 — गुलतराश और गुलदान की शुद्धता

यह पद पवित्र मन्दिर के भीतर के उपकरणों की विशेषताओं के विवरण में आता है। स्वर्गीय व्यवस्था के अनुसार, यह बताता है कि ईश्वर बनावट-चयन में कितने अद्वितीय और पवित्र पदों पर अतिक्रमण नहीं चाहते। गुलदराश (पात्र-आयत) और गुलदान (गुलदान) सब शुद्ध सोने के हों—यानी वे सब दिव्य सम्मान और सेवा के लिए पूर्ण पवित्रता के साथ बने हैं।

स्वरूप और अर्थ पर नज़र

शुद्ध सोने के पदार्थ का चयन यह दर्शाता है कि स्वर्गीय व्यवस्था परम पवित्रता और नि:स्वार्थ दरिद्रता-रहित सेवा की दिशा में है। सोना बहुलता से स्पष्ट करता है कि यह उपकरण सिर्फ साधारण वस्तुएँ नहीं, बल्कि ईश्वर के आत्म-आहार और पूजा के अवसरों के वाहक हैं। “शुद्ध” विशेषण से आशय है—अशील, अधूरा या अन्य देवी-देवताओं के साथ मिश्रित नहीं, बल्कि एक एकरस, निर्दोष अवस्था।

महत्वपूर्ण शब्दार्थ और प्रतीक

  • गुलतराश: पात्रों के रूप रेखा बनाने वाला शिल्प; उनका स्वर्ण-निर्माण यह दर्शाता है कि पूजा के साधन ईश्वर के सामने कुछ भी अधूरा नहीं रहते।
  • गुलदान: आगम-सेवा में प्रयुक्त उपकरण; इसकी शुद्धता यह संकेत है कि सम्मिलित सेवा में हर स्तर पर पवित्रता अनिवार्य है।

अन्य प्रासंगिक पद (क्रॉस-रेफरेंसेस)

कई बार पुराने नियम में स्वर्ण-आकाश जैसी पवित्रता की चर्चा इशारे के रूप में मिलती है। नीचे दिए गए संदर्भ इस धारणा को मजबूत करते हैं, बिना पाठ का पूर्ण पाठ उद्धृत किए:

  • निर्गमन 25:9 — मन्दिर के भवन और उपकरणों की सुस्पष्ट निर्देशित बनावट का उद्देश्य बताता है कि देव-आग्नेय व्यवस्था उत्कृष्टता के साथ बननी चाहिए।
  • हरमोव 28:36-38 (उद्धृत संदर्भ से संकेत) — पवित्रता और पवित्र वस्तुओं की व्यवस्था, देव-आवह्वान के लिए उपयुक्त आचरण का द्योतन।
  • कअप 25:23-30 — आना-जानना और सर्व-उपकरणों की उचित व्यवस्था का वास्तविक अनुशासन, जो पवित्रता के महत्व को दोहराता है।

इन क्रॉस-रेफरेंसेस से स्पष्ट होता है कि मन्दिर-उपकरण की शुद्धता का उद्देश्य कर्तव्यनिष्ठ पूजा और ईश्वर के गुणों के अनुरूप जीवन बनाना है।

आज के समय में अनुप्रयोग

अपने धार्मिक जीवन में हम पाते हैं कि पवित्रता केवल बाह्य सजावट नहीं, पूर्वक तैयारी का आंतरिक प्रदर्शन है। माता-पिता, शिक्षक, या सामुदायिक नेता के रूप में, हमारे कार्य—सच्चे दिल से ईश्वर की सेवा, वचन-आचरण और निष्ठा—इन उपकरणों की शुद्धता की तरह हैं: पूर्णता की खोज और अधूरेपन से बचना।

संक्षेप में: निर्गमन 25:38 हमें सिखाता है कि परमेश्वर के सामने हमारे आराधन और कार्य उच्च मानक के अनुसार होने चाहिए—शुद्धता, एकाग्रता, और पूर्ण समर्पण से।

इस पाठ के भीतर उद्धृत धार्मिक टिप्पणीकारों के छोटे संकेत (जहाँ उपलब्ध हों) यथा: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त विचारों का समाकलन जरूरी है; परन्तु मूल पाठ के साथ उनका उद्धरण केवल उपलब्ध होने पर ही दिया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 25:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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निर्गमन 37:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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और उसने दीवट के सातों दीपक, और गुलतराश, और गुलदान, शुद्ध सोने के बनाए।

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फिर वे नीले रंग का कपड़ा लेकर दीपकों, गुलतराशों, और गुलदानों समेत उजियाला देनेवाले दीवट को, और उसके सब तेल के पात्रों को, जिनसे उसकी सेवा टहल होती है, ढाँपें;

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1 राजाओं 7:50 (HINIRV) »
दीपक और चिमटे, और शुद्ध सोने के तसले, कैंचियाँ, कटोरे, धूपदान, और करछे और भीतरवाला भवन जो परमपवित्र स्थान कहलाता है, और भवन जो मन्दिर कहलाता है, दोनों के किवाड़ों के लिये सोने के कब्जे बने।

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