निर्गमन 25:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और जिन वस्तुओं की भेंट उनसे लेनी हैं वे ये हैं; अर्थात् सोना, चाँदी, पीतल,

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निर्गमन 25:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

Reader-friendly Overview

निर्गमन 25:3 में परमेश्वर ने मोंटे के रूपरेखित आह्वान के भाग के रूप में ये उल्लेख किया कि इस भेंट के रूप में Israelite लोग किन सामग्री का दान करेंगे। इस व verse के पीछे प्रमुख विचार यह है कि देवयादी व्यवस्था में भेंट, समर्पण और परमेश्वर के लिये वस्तुओं का योगदान समुदाय की भागीदारी का प्रतीक बनते हैं। यह सिर्फ सामग्री नहीं है, बल्कि एक रुड़ि जो विश्वास की गहराई, समुदाय की समर्पणशीलता और ईश्वर के सेवा-कार्य के लिए नियत साधनों की पूर्ति को दर्शाती है।

Verse in its Chapter

निर्गमन 25 अध्याय परमेश्वर के माऊन की पूर्ण आज्ञा देते हैं—कहते हैं कि कैसे तंबू-उत्पादन, आराधना-उपकरण, और सेवकों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने हैं। 25:3 में दर्शाया गया है कि कौन-कौन से पदार्थ भेंट के रूप में स्वीकार होंगे: सोना, चाँदी, और पीतल। यह सूची एक प्रकार की सामुदायिक निधि को संकेतन करती है, जो मंदिर के संचालन, साधनों की मरम्मत, और धार्मिक सेवा को सक्षम बनाती है।

Main spiritual lesson

मुख्य शिक्षा यह है कि परमेश्वर अपने लोगों के भीतर दिया गया उदारपन और भागीदारी का भाव को स्वीकार करते हैं। दान का आधार सिर्फ मूल्य नहीं, बल्कि श्रद्धा और सेवक-जीवन की दिशा है। सोना, चाँदी और पीतल जैसी बहुमूल्य वस्तुएँ न केवल भौतिक संपत्ति हैं, बल्कि समुदाय की एकता, समर्पण और ईश्वर-सर्वस्व के प्रति विश्वासी हृदय की अभिव्यक्ति बनती हैं।

Cross-references and brief explanations

  • कर्म-उत्पत्ति 35:21-22 — लोग अपने मन के उन हिस्सों से दान लाए जो परमेश्वर के लिए समर्पित हों; यह परिचय देता है कि दान व्यक्तिगत विश्वास और उत्साह से निकलना चाहिए।
  • हबाकुक 2:14 — “पूर्णता” के बारे में प्रतीकात्मक दान: समुदाय का एकता-बोध और पृथ्वी पर ईश्वर की महिमा फैलाने की लालसा।
  • 2 कुरिन्थियों 9:7 — दातृ का स्वभाव: जो ह्रदय से दे, वही स्वीकार्य है; बाहरी मूल्य से अधिक बाह्य रूपांतरण आंतरिक संकल्प है।

How this applies today

यह verses हमें याद दिलाते हैं कि Church की ज़रूरतें पूरी करने के लिए संसाधन एक साथ मिलकर आते हैं—विश्वास, आशा और उदारता की एकता से। दान की मात्रा नहीं, बल्कि उद्देश्य और आस्था की दिशा महत्त्वपूर्ण है। यदि हम आज के चर्च-समुदाय में दान दें, तो यह सेवा-कार्य के साथ-साथ समुदाय-निर्माण का संवर्धन भी है।

Summary

निर्गमन 25:3 बताता है कि भेंट में किस प्रकार की संपत्ति निष्पादनार्थ दी जानी चाहिए—सोना, चाँदी, और पीतल—जो मंदिर-संरचना और सेवा के लिए आवश्यक संसाधन बनती हैं। यह दान-प्रथा विश्वास की एकता और ईश्वर के कार्यों के लिए समुदाय की भागीदारी को उभारती है। यह दृष्टिकोण पुराने समय के संबद्ध उद्धरणों से प्रेरित होकर आज भी साधारण विश्वासियों के लिए एक प्रेरक मार्गदर्शक है: अपने दिल से दें, और देखिए कैसे परमेश्वर की योजना पूरे समुदाय को समृद्ध बनाती है।

नोट: आवश्यक उद्धरण—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—के विशिष्ट शब्द अगर उपलब्ध हों, वे स्पष्ट रूप से उद्धृत किये गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 25:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 8:9 (HINIRV) »
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अय्यूब 28:2 (HINIRV) »
लोहा मिट्टी में से निकाला जाता और पत्थर पिघलाकर पीतल बनाया जाता है

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