Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 10:1 2 कुरिन्थियों 10:2 2 कुरिन्थियों 10:3 2 कुरिन्थियों 10:4 2 कुरिन्थियों 10:5 2 कुरिन्थियों 10:6 2 कुरिन्थियों 10:7 2 कुरिन्थियों 10:8 2 कुरिन्थियों 10:9 2 कुरिन्थियों 10:10 2 कुरिन्थियों 10:11 2 कुरिन्थियों 10:12 2 कुरिन्थियों 10:13 2 कुरिन्थियों 10:14 2 कुरिन्थियों 10:15 2 कुरिन्थियों 10:16 2 कुरिन्थियों 10:17 2 कुरिन्थियों 10:18



2 कुरिन्थियों 10:6 पर सन्देश
पोलुस ने कुरिन्थियों को अपने आत्म-आदेश और वैचारिक नियंत्रण के बारे में स्पष्टता देने के लिए इस आयत में कहा है कि वे सभी प्रकार के अविश्वास-उत्तेजक विचारों और आक्रामक तानाशाही से पीछे न हटें, बल्कि उस अनुशासन को बनाए रखें जो परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुरूप हो। संदर्भ में यह ईसाई समुदाय के भीतर प्रभु के कारण की रचना ve अनुशासन की आवश्यकता पर बल देता है, ताकि गवाही निष्कलंक और ईमानदार रहे।
केंद्रीय अर्थ
यह आयत एक संयमित आह्वान है: जो कुछ भी प्रभु के मालिकाने में है, उन व्यवसायों और विचारों को मानना जो ईश्वर के आदेश के अनुरूप हैं, और जो न मानना है, उसे पलटना चाहिए। पीछे हटना या रोके रखना तब होता है जब हृदय में अटलता और सच्चाई के साथ परमेश्वर की इच्छा स्पष्ट दिखाई देती है। यह नहीं कि हमें कठोरता या दुष्टता को बढ़ावा देना है, बल्कि यह कि दृढ़ विश्वास से प्रेरित होकर गलत-रास्ते के विपरीत निर्णय लेने चाहिए।
तीन प्रमुख थीम
संदर्भित विचार
यह आयत पवित्र-जीवन के लिए संकल्प का संकेत है: जो मान्य आचार-व्यवहार से विचलन को पहचानते हैं, वे उसे त्याग दें।
यह आयत कैसे लागू करें
व्यावहारिक जीवन में: यदि समाज, समाचार या रोजगार में ऐसी बातें हों जो ईमान और स्पष्ट साक्ष्य के विरुद्ध जाएं, तो विवेक से निर्णय लें और आवश्यक परिवर्तन करें—परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुरूप।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
- रोम 12:2: नई चेतना के अनुसार विचारों के ढांचे को बदलना।
- 2 कुरिन्थ 6:7: सत्य-युक्त मार्गदर्शक हथियारों के साथ कठोर परिस्थितियों का सामना।
- פילि. 4:8: जो कर्तव्यनिष्ठ विचार और पवित्र प्रेरण से जुड़ें, उन्हें स्थिर रखें।
संक्षिप्त समापन विचार
यह आयत ईसाई जीवन के भीतर संतुलन और धैर्य की मांग करती है: सत्य के अनुरूप निर्णय लेने के लिए तैयार रहेँ, और जहाँ गलत आचरण या विचार आ जाएँ, वहाँ दृढ़ता से उन्हें पलट दें। परमेश्वर के मिशन के अनुसार अगुवाई बनना ही विश्वास की वास्तविक परीक्षा है।
नोट्स
इस पंक्ति के भीतर प्रेरित लेखन से प्रेरित विचारों को संक्षिप्त रूप में समाहित किया गया है, ताकि पाठक सीधे-सीधे जीवन में लगाकर चरणबद्ध निर्णय ले सकें।
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