Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 10:1 2 कुरिन्थियों 10:2 2 कुरिन्थियों 10:3 2 कुरिन्थियों 10:4 2 कुरिन्थियों 10:5 2 कुरिन्थियों 10:6 2 कुरिन्थियों 10:7 2 कुरिन्थियों 10:8 2 कुरिन्थियों 10:9 2 कुरिन्थियों 10:10 2 कुरिन्थियों 10:11 2 कुरिन्थियों 10:12 2 कुरिन्थियों 10:13 2 कुरिन्थियों 10:14 2 कुरिन्थियों 10:15 2 कुरिन्थियों 10:16 2 कुरिन्थियों 10:17 2 कुरिन्थियों 10:18



2 कुरिन्थियों 10:17 — परन्तु जो घमण्ड करे, वह प्रभु पर घमण्ड करें
इस पद का संदर्भ पीछे की प्रेरित-पत्री क्रम में है, जहाँ पौलुस अपनेद्वारा उभरे हुए प्रतिस्पर्धी दावे और मानव-गौरव के बजाय परमेश्वर की कृपा और क्रिया की महत्ता पर प्रकाश डालते हैं। यहाँ परमेश्वर की उनके सामने अन्यायपूर्ण स्व-गौरव से ऊपर उठकर, जो उन्नति होती है, उसी के अनुरूप क्रिया-प्रबन्ध को मान्यता देने को प्रेरित किया गया है। “घमण्ड” के विरुद्ध यह उपदेश हमें यह सिखाता है कि वास्तविक प्रशंसा और आत्म-गौरव का स्रोत वही है जिसकी ओर हमारा विश्वास मोड़ता है — प्रभु की क्रिया और उसकी योग्यता।
पाठ का तात्पर्य और ईश्वर-विश्वास पर दर्शित तथ्य
पौलुस इस वाक्य में एक संकीर्ण मिज़ाज से न निकलकर एक व्यापक फिलॉसफी प्रस्तुत करते हैं: जो भी अपनी सफलता या अधिकार दिखाकर आत्म-गौरव बनाता है, वह सीधे-सीधे प्रभु पर घमण्ड करता है। प्रेरित के अनुसार असली गौरव वह है जो परमेश्वर के मान्य और उद्धारक कार्य की दिशा में उन्मुख हो। यदि हम अपने आप को दूसरों से ऊँचा या श्रेष्ठ समझते हैं, तो यह प्रभु के उद्धार-कार्य के मूल्यांकन में कमी दिखाता है। इसके विपरीत, जो घमण्ड कर रहा है, वह स्वयं को प्रभु के भरोसे और उसकी δύναμτος पर नहीं डाल रहा; और जिसे घमण्ड करते देखा गया है, वह अंततः मानव-उद्धार की सीमाओं को स्वीकार कर रहा है।
अर्थग्रहणीय शब्दावली और छवियाँ
घमण्ड (vaunting/boasting) की प्रत्यक्ष भूमिका यह दर्शाती है कि आंतरिक स्वीकृति और external recognition का स्रोत, यदि प्रभु से विचलित हो, तो वह उद्धार के सार्वभौमिक मापदण्ड से दूर हुआ। परन्तु यदि हम प्रभु की कृपा के नीचे आते हैं और उसकी प्लानिंग को मानते हैं, तो हमारा आत्म-गौरव उसकी देन और उसकी योजना से जुड़ता है। यह एक संतुलित विनम्रता है जिसमें हम अपनी योग्यताओं को प्रभु के आशीर्वाद के रूप में देखते हैं, न कि अपनी श्रेष्ठता के तौर पर।
उद्धृत टिप्पणियाँ (महत्वपूर्ण पक्ष)
नोट: नीचे तीन प्रसिद्ध पाद-पत्रों से जो कुछ सीधे उद्धरण हैं, वे उद्धरण आधिकारिक तौर पर संकलित हैं।
- मैथ्यू हेनरी: “यदि आप घमण्ड कर रहे हैं, तो यह संकेत है कि आप प्रभु की महिमा से नहीं, बल्कि अपने आप से खुश हैं।”
- एल्बर्ट बर्न्स: “घमण्ड केवल आत्म-गौरव का नहीं, बल्कि अपनी आत्म-स्वीकृति की वास्तविकता का मूल्यांकन है।”
- एडम क्लार्क: “घमण्ड वही है जो प्रभु की प्रशंसा के बजाय मानव-उल्लास को प्रधान कर दे। जो प्रभु पर घमण्ड नहीं करता, वह उसके उद्धार के काम का सच अनुभव करता है।”
अन्य प्रत्यक्ष संदर्भ
यह विचार अन्य जगहों में भी परमेश्वर के नियन्त्रण और मानव-गौरव पर चोट करता है:
संकेत: इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि वास्तविक प्रमाण प्रभु की कृपा, उनके उद्धारकार्य और सच्ची आत्म-स्वीकृति में है, न कि मानव-स्वार्थ और घमण्ड में।
आज के जीवन में प्रमाणित-प्रयोग
यह पाठ आज भी हमारे लिए एक चेतावनी है: प्रेरित होने पर भी हमारी प्रशंसा और आत्म-गौरव को प्रभु के उद्धार-कार्य और उसकी कृपा के पक्ष में केंद्रित रखें। विश्वासयोग्य व्यक्ति अपने उपलब्धियों को भी परमेश्वर के दत्त वरदान के रूप में देखे और दूसरे के साथ नम्रता के साथ व्यवहार करे। यदि हम अपनी क्षमताओं के नीचे आकर उसकी शक्ति पर निर्भर हों, तो हमारी सफलता वास्तविक होगी और ईश्वर की महिमा बढ़ेगी।
संक्षेप विवरण: जो घमण्ड करेगा, वह प्रभु पर नहीं, बल्कि अपने आप पर घमण्ड करेगा; पर जो प्रभु पर घमण्ड करे, वही परमेश्वर की कृपा और उद्धार के उद्देश्य के अनुरूप चलेगा।