Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 8:1 2 राजाओं 8:2 2 राजाओं 8:3 2 राजाओं 8:4 2 राजाओं 8:5 2 राजाओं 8:6 2 राजाओं 8:7 2 राजाओं 8:8 2 राजाओं 8:9 2 राजाओं 8:10 2 राजाओं 8:11 2 राजाओं 8:12 2 राजाओं 8:13 2 राजाओं 8:14 2 राजाओं 8:15 2 राजाओं 8:16 2 राजाओं 8:17 2 राजाओं 8:18 2 राजाओं 8:19 2 राजाओं 8:20 2 राजाओं 8:21 2 राजाओं 8:22 2 राजाओं 8:23 2 राजाओं 8:24 2 राजाओं 8:25 2 राजाओं 8:26 2 राजाओं 8:27 2 राजाओं 8:28 2 राजाओं 8:29



2 राजाओं 8:14 (HINIRV) — संदर्भित दृश्य और तत्संबंधी विचार
घटना–वातावरण: एलीशा से विदा लेकर दाऊत-नायक बेन्हद्द के पुत्र राजा हज़य्या (यिराम) के अधिकारी आकाश-लोक के संकेतों की व्याख्या सुनकर लौट रहा है। वह कहता है कि एलीशा ने उसे बतलाया, बेन्हदद निःसन्देह बचेगा। यह दृश्य यहूदियों के विश्वास की गहराई और परमेश्वर की कार्य-योजनाओं के बारे में बताता है—कि यहाँ भी परमेश्वर के मन की योजना चल रही है, चाहे मानवीय घटनाएं और राजनीतिक चालें कैसी भी हों।
पाठ से दर्शित बात: परमेश्वर और विश्वास
यह वाक्य सीधे दिखाता है कि प्रभु अपने दूतों के माध्यम से अपनी योजना प्रकट करते हैं, भले ही परिस्थितियाँ उलझी क्यों न लगें। एलिशा की प्रकट-पत्रता और उसकी भविष्य-ज्ञान में विश्वास, न केवल एक नबी के कर्तव्य को दिखाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ईश्वर की स्वीकृत भविष्यवाणी विश्वस्त और निश्छल है। यहां यह भी स्पष्ट है कि नबी के आशीर्वचन का तात्पर्य सच-सचेत और भरोसेमंद है; ब्रह्मांड के राजा के शब्द जैसी सत्यता से यह गवाही मिलती है।
शब्दार्थ एवं प्रतीक
- बचेगा: यहाँ “बचेगा” से आशय है कि विनाश से रक्षा होगी या स्थिति के बावजूद कुछ प्रतिफल बना रहेगा। यह एक उत्तरदायित्वभरे बंधन को दर्शाता है कि परमेश्वर अपने अनुग्रह से कर्मियों और योजनाओं को बनाए रखता है।
संबद्ध पासेज के संकेत
यदि आप किन्हीं अन्य संदर्भों को देखें, तो यह सत्य है कि नबी के शब्द पवित्र-तत्व के साथ मिलकर भविष्य की राह बनाते हैं, और विश्वास का ठोस आधार वही है जो परमेश्वर के वचन में है।
आज के संदर्भ में uygulan
व्यावहारिक दृष्टि से यह पाठ हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी भगवान के वचन पर भरोसा रखें। जब परिणाम हमारे नियंत्रण से बाहर होते हैं, तब भी परमेश्वर की योजना चलती रहती है। विश्वासियों के लिए यह प्रेरणा है कि वे न केवल स्थिति–स्थिति की जानकारी मांगें, बल्कि परमेश्वर से स्पष्ट मार्गदर्शन चाहें और उसके वचन पर टिके रहें।
छोटी-सी मार्गदर्शिका (संक्षिप्त निष्कर्ष)
टिप्पणीवाचक दृष्टिकोण से, ऐतिहासिक-भाषा पर आधारित टिप्पणीकारों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के दृष्टिकोणों का संयोग इस पाठ को स्पष्ट बनाता है: Henry के आलोचकों के शब्दों में परमेश्वर की स्थिरता और नबी की विश्वसनीयता व्याख्यायित होती है; Barnes इस बात पर बल देते हैं कि नबी के शब्द लोगों के लिए शासन-योजना के संकेत होते हैं; Clarke और अन्य समान टिप्पणीकार इस बात को जोड़ते हैं कि यह कथा दिखाती है कि परमेश्वर सत्ता में है और उनकी योजना हर चाल में पूर्ण होती है। (उद्धृत शब्दों के पूर्ण पाठ यहाँ उपलब्ध नहीं हैं, पर उनके प्रमुख विचार पंक्तियों में समाहित हैं।)