Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 2:1 2 शमूएल 2:2 2 शमूएल 2:3 2 शमूएल 2:4 2 शमूएल 2:5 2 शमूएल 2:6 2 शमूएल 2:7 2 शमूएल 2:8 2 शमूएल 2:9 2 शमूएल 2:10 2 शमूएल 2:11 2 शमूएल 2:12 2 शमूएल 2:13 2 शमूएल 2:14 2 शमूएल 2:15 2 शमूएल 2:16 2 शमूएल 2:17 2 शमूएल 2:18 2 शमूएल 2:19 2 शमूएल 2:20 2 शमूएल 2:21 2 शमूएल 2:22 2 शमूएल 2:23 2 शमूएल 2:24 2 शमूएल 2:25 2 शमूएल 2:26 2 शमूएल 2:27 2 शमूएल 2:28 2 शमूएल 2:29 2 शमूएल 2:30 2 शमूएल 2:31 2 शमूएल 2:32



2 शमूएल 2:2 — तत्कालीन पथ और पवित्रता की मार्गदर्शिका
पद का तात्पर्य: तब दाऊद यिज्रेल के भीतर अहीनोअम और कर्मेली नाबाल की स्त्री अबीगैल नामक, अपनी दोनों पत्नियों समेत वहाँ गया। यह घटना दाऊद के सत्ता-गठन के समय की है जब वह गमनशीलता से आगे बढ़ रहा था और अपने लोगों के मध्य एक स्थिर राज्य की स्थापना की आशा लिए खोज रहा था।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
इस वाक्य में ईश्वर की योजना सीधे नहीं परोसी नहीं जाती, पर यह बताता है कि दाऊद एक संवेदनशील और विचारशील नेता के रूप में उभर रहा है। वह अपनी खोज में, देश के उत्तराधिकार और सुरक्षा को ध्यान में रखता है, पर साथ ही यह भी उजागर करता है कि ईश्वर के आयोजनों में कब क्या उचित है, यह समय की परिस्थिति और मिलने वाले संकेतों से तय होता है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवि-समझ
संबद्ध पाठ
निम्न संदर्भ इस घटना के महत्व को समझाते हैं:
पूर्वाग्रह-रहित व्याख्या (संक्षेप)
इस पंक्ति के भीतर दाऊद का कदम-चाल एक रणनीतिक निर्णय का भाग है, जो आगे चलकर राज्य-निर्माण के लिए एक आधार बनता है। यह नहीं दर्शाता कि वह एक पवित्र या निर्दोष राजनायतिक नेता है, बल्कि एक व्यवहारिक मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति है, जो आगे की घटनाओं के अनुसार निर्णय लेता है।
प्रासंगिक उद्धरण (जाँच के लिए)
टिप्पणीकारों के आधारीय विचारों से यह स्पष्ट होता है कि दाऊद के कदम एक राजनीतिक-नैतिक परिदृश्य में समन्वय की कोशिश है। नीचे दिए गए प्रवचन-उद्धरण पंक्तियाँ हाल के पाठ्य-विमर्श हेतु संदर्भ देती हैं:
“दाऊद का प्रारम्भिक समय एक संतुलित राज्य-निर्माण की ओर इशारा करता है; यह समय की आवश्यकता के अनुसार कठोर निर्णय भी मांग सकता है।”
“शासन-योजनाओं में ईश्वर की योजना के अनुरूप सावधानी और धैर्य आवश्यक है।”
2-3 क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में) और उनका संबन्ध
इन संदर्भों के साथ दिखता है कि सत्ता और विश्वास एक साथ चलते हैं—परन्तु सत्य अपेक्षाओं के साथ ही आकाशीय मार्गदर्शना से संचालित होते हैं।
आज के पाठ के लिए व्यावहारिक निष्कर्ष