Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 2:1 2 शमूएल 2:2 2 शमूएल 2:3 2 शमूएल 2:4 2 शमूएल 2:5 2 शमूएल 2:6 2 शमूएल 2:7 2 शमूएल 2:8 2 शमूएल 2:9 2 शमूएल 2:10 2 शमूएल 2:11 2 शमूएल 2:12 2 शमूएल 2:13 2 शमूएल 2:14 2 शमूएल 2:15 2 शमूएल 2:16 2 शमूएल 2:17 2 शमूएल 2:18 2 शमूएल 2:19 2 शमूएल 2:20 2 शमूएल 2:21 2 शमूएल 2:22 2 शमूएल 2:23 2 शमूएल 2:24 2 शमूएल 2:25 2 शमूएल 2:26 2 शमूएल 2:27 2 शमूएल 2:28 2 शमूएल 2:29 2 शमूएल 2:30 2 शमूएल 2:31 2 शमूएल 2:32



2 शमूएल 2:6 पर टिप्पणी—यहोवा की कृपा और सच्चाई से भरा व्यवहार
यह पद.pad पर सूचित करता है कि राजा आँधियों और युद्ध की विभाजनकारी घटनाओं के बीच भी परमेश्वर के प्रति एक सफल और कृपापूर्ण आचरण से जीवन अग्रसर होता है। यहोवा तुम्हारे कर्मों के अनुसार कृपा और सत्य दिखाने का वादा करते हैं; और उस भलाई का बदला भी मिलेगा। इस बहुस्तरीय संदेश को समझना प्रेम, पश्चाताप और दायित्व के बीच की रेखा को उजागर करता है।
पुष्टि/context का मूल तत्त्व
पद में यहूदियों के बीच जन-युद्ध की पृष्ठभूमि है, जहाँ दाऊद अभी तक जो उसका उत्तराधिकारी बनने के लिए अपनी निगाहें क्वचित नहीं लगाते, वह बन गया है। यहोवा के प्रति सच्चे हृदय और करुणा दिखाने वाले लोग सच में समर्थ रहते हैं, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ कितनी भी भयावह क्यों न हों। यहां पर राजा ईश-प्रेरित निर्णयों के गुणों को दर्शाया गया है—कृपा और सत्य के साथ व्यवहार करना, न कि नकारात्मक प्रतिक्रियाओं में फंसना।
मुख्य संदेश
इस पद का केंद्र यह है कि परमेश्वर उन लोगों के साथ कृपा और सत्य के साथ व्यवहार करते हैं जो उनके प्रति भलाई करते हैं। दूसरा भाग यह कि जो व्यक्ति दूसरों की भलाई के लिए सच और नैतिकता दिखाए, उसे बदला मिलता है। यह दर्शन कि दया और सत्य एक साथ चलते हैं, उनके जीवन में वातावरण बनाते हैं जिसमें विश्वास बना रहता है और परमेश्वर के भरोसे पर ठहराव मिलता है।
परमुखी विषय—कृपा और सत्य की संयुक्त चाबी
मूल संदर्भ से जुड़े प्रमुख विचार
- शास्त्र के अनुसार यह संदेश क्रमशः दाऊद के शासनकाल के दौरान उनके समर्थकों के साथ प्रत्यक्ष अनुभव बनकर उभरता है।
- कृपा से भरा आचरण दूसरों के लिए सुरक्षा का संकेत बनता है; सत्य से जुड़े कर्म स्थायित्व देते हैं।
क्रॉस-रेफ़रेंसेस
1) नीति-नैतिकता और प्रेरणा का संगम: मत्ती 5:7 के अनुसार दयालु होने वाला उसी रीति से परिशिष्ट पाता है। (संक्षेप उल्लेख) 2) विश्वस्त जीवन: याकूब 2:14-17 स्पष्ट करता है कि विश्वास के साथ कर्म भी आवश्यक हैं—कृपा-भाव के साथ किए गए अच्छे कर्म ही जीवन की वास्तविक परीक्षा हैं। 3) प्रेरित-शासन: गलातियों 6:9 बताता है कि जो अधीर नहीं होता और अच्छाई में दृढ़ रहता है, उसे समय पर फल मिलेगा।
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि भलाई, सत्य और कर्मी आचरण एक दूसरे से अटूट संबंध रखते हैं—ये तीनों मिलकर बाइबल की आशीर्वाद-प्रकृति की आधारशिला बनाते हैं।
यजमानित( devotional ) स्मृति
जीवन में जब आप सत्य के साथ भलाई दिखाते हैं, तब आप उस विशाल के हाथ में एक सरल, पर शक्तिशाली उपकरण बन जाते हैं जो दूसरों की जिंदगी संवारते हैं। यहोवा आपके छोटे-छोटे कदमों तक देखता है और आपके समर्पण का बदला देता है, न कि तुरंत बड़े पुरस्कारों के लिए प्रेरित करता है। स्मरण रहे: कृपा और सत्य एक साथ चलते हैं—हृदय में दया और व्यवहार में निर्भीक सच।
उद्धरण नोट: नीचे दिए गए पंक्तियाँ विशिष्ट उद्धरण रूप में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से अगर उपलब्ध हों, उन्हें पहचान के साथ जोड़ा गया है।
आवश्यक उद्धरण (यदि उपलब्ध):
“... कृपा और सत्य के साथ व्यवहार करना ही एक सच्चे भक्त का संकेत है।” (Adam Clarke का सार)