Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 1:1 प्रेरितों के काम 1:2 प्रेरितों के काम 1:3 प्रेरितों के काम 1:4 प्रेरितों के काम 1:5 प्रेरितों के काम 1:6 प्रेरितों के काम 1:7 प्रेरितों के काम 1:8 प्रेरितों के काम 1:9 प्रेरितों के काम 1:10 प्रेरितों के काम 1:11 प्रेरितों के काम 1:12 प्रेरितों के काम 1:13 प्रेरितों के काम 1:14 प्रेरितों के काम 1:15 प्रेरितों के काम 1:16 प्रेरितों के काम 1:17 प्रेरितों के काम 1:18 प्रेरितों के काम 1:19 प्रेरितों के काम 1:20 प्रेरितों के काम 1:21 प्रेरितों के काम 1:22 प्रेरितों के काम 1:23 प्रेरितों के काम 1:24 प्रेरितों के काम 1:25 प्रेरितों के काम 1:26



प्रेरितों के काम 1:20 का संक्षिप्त विवरण
पद में प्रेरितों के समूह ने यह स्पष्ट किया कि यहूदियों के इतिहास में एक समय-सीमा पर, ईश्वर ने राजा दाऊद के उत्तराधिकारी के पद को खाली कर दिया था ताकि वह सिद्धान्ततः परमेश्वर की योजना के अनुसार नई व्यवस्था चला सके. संदर्भ में, पीड़ित हत्याओं और अतीत की गलतियों के बीच यह उद्धरण जन्मसिद्धता के स्थान पर, एक नई सत्ता-स्थापना की परिचायक है। यह शास्त्र जीते-जीते विश्वासयोग्यों के लिए एक चेतावनी है कि परमेश्वर के घर और पद के लिए अधिकार प्रायः उसकी योजनाओं के अनुसार दिये जाते हैं, न कि मानवीय कर्तव्यों के अनुसार।
मुख्य अर्थ
यह शास्त्र भजन-संग्रह से उद्धृत दो पदों का एक संयोजन है—“उसका घर उजड़ जाए, और उसमें कोई न बसे” और “उसका पद कोई दूसरा ले ले।” यह बताता है कि परमेश्वर ने नये व्यवस्था के तहत संस्थागत पदों और स्थानों को पुनः व्यवस्थित किया है। प्रेरितों ने इसे यीशु-मसीह के संदिघ में देखा: दाऊद के पद का स्थान उन लोगों के माध्यम से भरा गया जो ईश्वर के चुनाव में विश्वास के साथ आगे बढ़े।
तीन प्रमुख थीम
Related passages (संक्षिप्त अर्थ के साथ)
• भज. 69:25 से शास्त्रीय ध्वनि मिलती है कि शास्त्री के घर की स्थिति परिवर्तनशील है—यह एक प्रतीक है कि यह संसारिक सत्ता और स्थान अंततः ईश्वर के न्याय के अधीन है।
• भज. 109:8 का संदर्भ बताता है कि अस्थायी सत्ता के स्थानांतरण से नई भूमिका और अक्षय परिणाम आते हैं—यह भी प्रेरितों के निर्णय को पुष्ट करता है कि एक स्थान के बदले दूसरी व्यवस्था आ सकती है।
• प्रेरितों के अग्रिम लेखन में यीशु के विषय में दी गई सूचनाओं से यह स्पष्ट होता है कि नया नेतृत्व और व्यवस्था परमेश्वर की ओर से है, जोेश्वरीय विश्वास पर टिका है।
व्यावहारिक अनुभव
हम कैसे देखेंगे कि किस पद या स्थान में परिवर्तन आवश्यक है? प्रमुख संकेत होते हैं: समुदाय के Spiritual growth, सत्यान्वेषी चरित्र, और विशुद्ध प्रेरणा से प्रेरित hizmet. जब किसी संस्था के भीतर पुराने ढांचे से नया रूप उभरता है, तब एक समर्पित शिष्यवृत्ति और नम्र नेतृत्व से संतुलन बना रहता है।
छोटी-सी समालोचना
MATTHEW HENRY (संक्षेप): पुराने घर में परिवर्तन एक संकेत है कि परमेश्वर नई व्यवस्था की आवश्यकता पर चल रहा है; विश्वास-योग्यों के लिए यह एक चेतावनी है कि सत्ता-स्थान उसके स्वामित्व के अनुसार काम करें।
ALBERT BARNES (संक्षेप): यह उद्धरण एक सामान्य सिद्धांत दिखाता है कि परमेश्वर सत्ता और पदों को समय और उद्देश्य के अनुसार पुनर्स्थापित करता है; कोई भी व्यक्ति स्वयं निर्णय करके नहीं पाता।
ADAM CLARKE (संक्षेप): पुरानी व्यवस्था के बारे में यह संकेत कि “घर उजड़ जाए” एक प्रतीकात्मक चेतावनी है कि परमेश्वर के विधान में परिवर्तन सहज नहीं, पर आवश्यक है—ताकि नया नेतृत्व ईश्वर की योजना के अनुसार चले।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त प्रभाव)
• शास्त्रीय उद्धरणों के भीतर से संबंधों को समझना: पुराने भजन-ग्रंथ से नया किस्सा जुड़ता है जिससे यह माना जा सकता है कि परमेश्वर समय-समय पर सत्ता-स्थान बदलते रहते हैं।
• प्रेरितों के लेखन से मसीही नेतृत्व की जिम्मेदारी स्पष्ट होती है—ईश्वर के चुनाव के अनुसार कार्य करना चाहिए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहVerse बताता है कि परमेश्वर अपने बदलिए हुए योजनाओं के अनुसार सत्ता-स्थान बनाता-बिगाड़ता है। हमारे लिए प्रमुख सीख यह है कि नेतृत्व और स्थान जो भी हों, वे ईश्वर की व्यवस्था और समय-सारिणी के अनुरूप हों—विश्वास, नम्रता, और सेवा के साथ कार्य करते रहें।