Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 1:1 प्रेरितों के काम 1:2 प्रेरितों के काम 1:3 प्रेरितों के काम 1:4 प्रेरितों के काम 1:5 प्रेरितों के काम 1:6 प्रेरितों के काम 1:7 प्रेरितों के काम 1:8 प्रेरितों के काम 1:9 प्रेरितों के काम 1:10 प्रेरितों के काम 1:11 प्रेरितों के काम 1:12 प्रेरितों के काम 1:13 प्रेरितों के काम 1:14 प्रेरितों के काम 1:15 प्रेरितों के काम 1:16 प्रेरितों के काम 1:17 प्रेरितों के काम 1:18 प्रेरितों के काम 1:19 प्रेरितों के काम 1:20 प्रेरितों के काम 1:21 प्रेरितों के काम 1:22 प्रेरितों के काम 1:23 प्रेरितों के काम 1:24 प्रेरितों के काम 1:25 प्रेरितों के काम 1:26



आधार अर्थ (Meaning at a glance)
प्रेरितों के काम 1:3 के अनुसार यीशु ने मरण से जीवित हो उठने के बाद चालीस दिन तक अपने अनुयायियों के बीच स्थिरतः दिखाई दिए, उनसे परमेश्वर के राज्य की बातें साझा कीं और उनके समझ को मजबूत किया। यह घटना यीशु की पुनर्जीवित सत्ता और प्रेरितों को विश्व के मिशन के लिए तैयार करने की पहल को स्पष्ट करती है।
संदर्भभूमि (Contextual background)
इस वाक्य में यीशु के जीवन के अंतिम महीनों के बाद की घटनाएँ उजागर होती हैं। पूर्ववर्ती इतिहास बताते हैं कि उसने मरा मान लिया गया था, पर तीसरे दिन जीवित हुआ और चालीस दिन तक उसकी मौजूदगी प्रेरितों के साथ रही। यह समय परमेश्वर के राज्य के बारे में शिक्षा देने, विश्वास को पुष्ट करने और भविष्य की योजना—युद्ध और प्रचार के लिए तैयारी—की एकरूपता स्थापित करने का था.
व्याख्यात्मक अवलोकन (Observations)
थीमेटिक सूची (Thematic takeaways)
क्रॉस-रेफरेंस (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
व्यावहारिक takeaway (Practical takeaway)
यह अध्याय विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि यीशु मसीह सचमुच जीवित हैं और उनका राजा-राज्य अभी भी सक्रिय है। हमारी साक्षी-जीवन उसी चैलेंज को पकड़ता है: परमेश्वर के राज्य के लिए विश्वास, उत्साह और मिशन की तैयारी।
हिंदी अनुवाद से मूल भाव का मिलान
“और यीशु के दुःख उठाने के बाद…” यह संदेश यह दर्शाता है कि पुण्य और क्रिया-केन्द्रित मुक्ति योजना में सूक्ष्म परिवर्तन नहीं, बल्कि पवित्र इतिहास का एक नया अध्याय आरम्भ हुआ। प्रेरितों को दिखाने से उनका विश्वास दृढ़ हुआ और राज्य-प्रचार की प्रेरणा मिली।
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरीन टिप्पणी-धाराओं के साथ संगत रूप से व्याख्या करते हैं कि पुनर्जीवन का प्रमाण विश्व-यात्रा के लिए प्रेरणा बन गया।