Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 1:1 प्रेरितों के काम 1:2 प्रेरितों के काम 1:3 प्रेरितों के काम 1:4 प्रेरितों के काम 1:5 प्रेरितों के काम 1:6 प्रेरितों के काम 1:7 प्रेरितों के काम 1:8 प्रेरितों के काम 1:9 प्रेरितों के काम 1:10 प्रेरितों के काम 1:11 प्रेरितों के काम 1:12 प्रेरितों के काम 1:13 प्रेरितों के काम 1:14 प्रेरितों के काम 1:15 प्रेरितों के काम 1:16 प्रेरितों के काम 1:17 प्रेरितों के काम 1:18 प्रेरितों के काम 1:19 प्रेरितों के काम 1:20 प्रेरितों के काम 1:21 प्रेरितों के काम 1:22 प्रेरितों के काम 1:23 प्रेरितों के काम 1:24 प्रेरितों के काम 1:25 प्रेरितों के काम 1:26



प्रेरितों के काम 1:25 – पद चयन: प्रेरित पद स्वीकारना
परिस्थिति का तात्पर्य यह है कि आरंभिक समुदाय यीशु के इर्द-गिर्द कैसे व्यवस्थित हुआ। प्रेरितों के काम में दस पंक्तियाँ हैं जिन्हें अंत तक पढ़ना आवश्यक है, ताकि यह समझ सके कि कैसे चुने गए में से एक ने प्रेरिताई का पद ग्रहण किया। इस वाक्य में हम देखते हैं कि यहूदा के स्थान पर नया प्रेरित चुना गया ताकि सेवकाई और प्रेरिताई का पद खाली न रहे, और समुदाय एक साथ दृढ़ बने।
पवित्र पद का मूल भाव
यह वाक्य बतलाता है कि नेटवर्क समुदाय की आवश्यकता के अनुसार एक विकल्प चुना गया ताकि विश्वासियों का क्रम निर्विघ्न जारी रहे। “यहूदाः छोड़कर अपने स्थान को गया” बताता है कि एक स्थान खाली हुआ था, जिसे देवावहित नियमों के अनुसार भरा गया। पवित्र आत्मा का काम और विश्वासियों की प्रार्थना के साथ यह चयन हुआ।
खास शब्दों और छवियों की व्याख्या
संयुक्त टिप्पणी: विश्लेषणात्मक संदर्भ
मैथ्यू हेनरी कहते हैं कि यह चयन पवित्र आत्मा के निर्देशानुसार और समुदाय के समन्वय से होता है, ताकि आख्यान आगे बढ़ सके। अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क इसे एक आवश्यकता-आधारित चयन मानते हैं ताकि प्रथम चर्च की अहंता से मुक्त होकर सेवाग्रहण अग्रसर रहे। (संक्षेप सार: चयन में प्रभु की योजना और पवित्रता का मेल है।)
क्रॉस-रेफरेंस के साथ संदर्भ
1) वृद्धि और चुनाव के क्रम से जुड़ा संदर्भ: प्रेरितों के काम 1:26 – “फिर गणना करके दो नाम निकल कर”। यह बताता है कि कैसे विकल्पों का परीक्षण होता है और निकाय किस प्रकार विभाजित नहीं रहता।
2) नेतृत्व के चयन के सिद्धांत: प्रेषिताओं के निर्देश: “आत्मा से अगला स्थान”। यह आत्मा-नेतृत्व के द्वारा समायोजन और पुनर्गठन को दर्शाता है।
3) चर्च के साथ संगति: दूसरा प्रेरितों का काम 6:3–6 में चयन के प्रक्रिया का दृष्टांत मिलता है कि सेवा-विभाजन के समय भी आत्मिक गुण प्रमुख रहते हैं।
आज के युग में_application
संक्षेप में, प्रेरितों के काम 1:25 यह सिखाता है कि चर्च की संरचना और मिशन के लिए सही नेतृत्व में ईश्वर की योजना और मानव संवेदनशीलता एक साथ चलनी चाहिए। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त टिप्पणी दृष्टिकोणों के अनुरूप यह समझना महत्वपूर्ण है कि चुनाव एक सामूहिक निर्णय और आत्मिक निर्देशन का संयोजन है, ताकि संदेश आगे बढ़ सके और समुदाय एकता बनाए रखे।