प्रेरितों के काम 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब वे जैतून नामक पहाड़ से जो यरूशलेम के निकट एक सब्त के दिन की दूरी पर है, यरूशलेम को लौटे।

प्रेरितों के काम 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य interpretive बिंदु

प्रेरितों के कार्य 1:12 में एपस biologique? नहीं—पृथ्वी के सिरो-यात्रा पर प्रभु यीशु के समर्थकों के पहले लौटने का दृश्य है: वे जैतून पर्वत से लौटकर यरूशलेम पहुँचे। यह स्थल-चिह्न दर्शाता है कि ईश्वर के उद्धारकार्य का क्रमयात्रा अभी भी शुरूआती चरणों में है; श disciples की मंज़िल अभी पूरी नहीं हुई, पर वे विश्वास के साथ अपने मिशन की दिशा में आगे बढ़े हैं। जैतून पर्वत से लौटना एक प्रतीक है—उच्चता से नीचे आना, शाकाहारी स्वर्गीय राज्य की प्रतीक्षा के बीच पृथ्वी पर दुष्कर वास्तविकताओं से जूझना, और पवित्र आत्मा के साथ प्रायोगिक सत्ता प्राप्त करना।

पाठ-संदर्भ: साहित्यिक संदर्भ

इस वाक्य में लेखक खुले आकाश के बजाय एक ठोस भूगोलिक-यात्रा का चित्रण करता है। जैतून पर्वत यरूशलेम के निकट है, और दावीद के शहर के निकट यह क्षेत्र प्रचलित धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। प्रेरितों के गीत-ध्वनि में यह लौटना एक नए-संदेश के लिए तैयारी का भाग है: पवित्र आत्मा के आशीर्वाद के मिलने के बाद वे मिशन के लिए तैयार हैं।

theological significance

इस वाक्य में दो प्रमुख धारणाएं उभरती हैं: एक, पवित्र आत्मा के पूर्व-प्राप्त अनुभव के बाद भी उनके सामने अभी एक बाहरी यात्रा और बाह्य प्रतीक्षा है; दो, प्रभु के लौटने का आत्मिक-उत्साह बनाम पृथ्वी-यात्रा के बीच संतुलन। जैतून पर्वत से लौटना उस विश्वास-यात्रा का आरम्भ है जिसमें वे यरूशलेम की सुरक्षा से आगे बढ़कर सारी दुनिया में उदघोषित करेंगे—“सब राष्ट्रों के लिए शिक्षा” का इरादा उजागर होता है।

Cross references (संक्षेप में, 3 नोट)

  • लूका 24:50-53 — यीशु के आकाश में उठ जाने के बाद शिष्य लौटते हैं और ऊर्जा के साथ भक्तिपूर्ण आशीष पाते हैं; यह उनके विश्वास-यात्रा के क्रम का भाग है।
  • न्यू टेस्टामेंट की पहचानी गई पूर्व-उत्पत्ति—पवित्र आत्मा का आना: प्रेरितों 2 के प्रेरणा-घटना में यह स्पष्ट होता है कि आशीर्वाद के बाद मिशन का विस्तार शुरू होता है।
  • यूहन्ना 14-16 — यीशु आत्मा के आगमन और मार्गदर्शन के बारे में बताते हैं; शिष्य फिर भी दृढ़ता और यात्रा-केवलता की तैयारी करते हैं।

इन संदर्भों से यह बोध मिलता है कि लौटना केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि आत्मिक-शक्ति और मिशन کی दिशा का संकेत है।

पठन-परिचर्चा (Reflection questions)

  • आप अपने जीवन की यात्रा में कब और कैसे “जैतून पर्वत” जैसी प्रतीक्षा के दौरान भरोसा बनाए रखते हैं?
  • पवित्र आत्मा के साथ आने वाले व्यवहारिक परिवर्तन क्या हैं जिन्हें आप अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियों में महसूस कर पाते हैं?

संक्षिप्त निष्कर्ष

प्रेरितों के 1:12 हमें बताता है कि विश्वासियों की यात्रा एकल घटनाओं से नहीं बनती, बल्कि दिशा-निर्देश, प्रतीक्षा और कार्यशक्ति के संगम से बनती है। जैतून पर्वत से लौटना एक हृदय-स्वीकृति है कि ईश्वर के उद्धारकार्य के क्रम में उद्धारक-यात्रा आगे बढ़ेगी, और शिष्यों को प्रेरित-आशीष के साथ यरूशलेम से बाहर निकलकर संसार के लिए तैयारी करनी है।

पुष्टि उद्धरण (exact quotes from authorities, यदि उपलब्ध): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के किसी स्पष्ट शुद्ध उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो नीचे दिए गए रिकॉर्ड में उद्धृत किए जाएंगे:

नोट: नीचे के वाक्यों में इनके छोटे-छोटे मंत्र उपलब्ध हो सकेंगे यदि पाठ-हरफ-हाफ़े के रूप में मिले हों।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

प्रेरितों के काम 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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लूका 24:52 (HINIRV) »
और वे उसको दण्डवत् करके बड़े आनन्द से यरूशलेम को लौट गए।

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मत्ती 21:1 (HINIRV) »
जब वे यरूशलेम के निकट पहुँचे और जैतून पहाड़ पर बैतफगे के पास आए, तो यीशु ने दो चेलों को यह कहकर भेजा,

लूका 24:50 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
लूका 24:50 (HINIRV) »
तब वह उन्हें बैतनिय्याह तक बाहर ले गया, और अपने हाथ उठाकर उन्हें आशीष दी;

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