Old Testament
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आमोस 7:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसके विषय में यहोवा पछताया*, और उससे कहा, “ऐसी बात अब न होगी।”
आमोस 7:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 7:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 32:36 (HINIRV) »
क्योंकि जब यहोवा देखेगा कि मेरी प्रजा की शक्ति जाती रही, और क्या बन्धुआ और क्या स्वाधीन, उनमें कोई बचा नहीं रहा, तब यहोवा अपने लोगों का न्याय करेगा, और अपने दासों के विषय में तरस खाएगा।

योना 3:10 (HINIRV) »
जब परमेश्वर ने उनके कामों को देखा, कि वे कुमार्ग से फिर रहे हैं, तब परमेश्वर ने अपनी इच्छा बदल दी, और उनकी जो हानि करने की ठानी थी, उसको न किया।*

होशे 11:8 (HINIRV) »
हे एप्रैम, मैं तुझे क्यों छोड़ दूँ? हे इस्राएल, मैं कैसे तुझे शत्रु के वश में कर दूँ? मैं कैसे तुझे अदमा के समान छोड़ दूँ, और सबोयीम के समान कर दूँ? मेरा हृदय तो उलट पुलट हो गया, मेरा मन स्नेह के मारे पिघल गया है।
आमोस 7:3 का संक्षिप्त परिचय और संदर्भ
आमोस के इस भाग में नबीकर्ता Amos ने उत्तर शनाख्त प्रस्तुत किया है कि परमेश्वर का वचन केवल एक भविष्यवाणी नहीं, बल्कि यदि मानवीय हृदय उससे dirig किया जाए, तो वह दयालु संकेत भी बन सकता है। Verse 3 को देखते हैं: "इसके विषय में यहोवा पछताया*, और उससे कहा, 'ऐसी बात अब न होगी।'". यह शाब्दिक रूप से प्रतीत होता है कि परमेश्वर ने अपनी योजनाओं में संशोधन किया, जब लोगों ने उन्हें विपरीत न करने की राह अपनाई। यह उद्धृत शब्द एक ऐसे समय की झलक देते हैं जब परमेश्वर के निर्णयों में मानवीय प्रतिक्रियाओं के अनुसार परिवर्तन संभव माना गया।
केंद्रीय अर्थ
यह पंक्ति यह दिखाती है कि परमेश्वर का ज्ञान और उसकी योजनाएं गतिशील हैं, और मानवता के आचरण के साथ वे बदल भी सकती हैं। संदर्भ यह है कि Amos 7 के शुरू के भागों में तीन दृष्टांत दिए गए—कीचड़, सूखा, और बाली पर कीट—जो इज़राइल के पापों के प्रति ईश्वरीय आक्रोश और फिरिस्टम में निवृत्ति का संकेत हैं। परन्तु परमेश्वर का पक्षभी है: यदि जनसमूह रिटर्न करें और नैतिकता की राह पकड़ें, तो वह "पछताते" नहीं बल्कि शांति की योजना बनाते हैं।
मुख्य विषय
संबंधित आयतें
1) यहोवा का लय-स्वभाव: अन्य नबी संदेशों में भी परमेश्वर के “पछताने” या क्रमबदलने की भावनाएं आती हैं—जैसे चेतावनी के बावजूद अगर जन गिरोह में लौटते हैं, तो उसकी योजना बदल सकती है।
2) न्याय और दया का संतुलन: यह आयत दया की संभावना के साथ न्याय की आवश्यकता को भी दर्शाती है।
3) कर्तव्य-निर्भयता: लोगों के आचरण के कारण भाग्य के घट-घट भी परिवर्त हो सकते हैं।
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में भी परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप परिवर्तन संभव है जब हम विनम्रता से पाप छोड़कर सत्य के रास्ते पर लौटते हैं। यहVerse याद दिलाता है कि परमेश्वर की योजनाएँ हमारे व्यवहार से निर्भर नहीं, परन्तु हमारे choices उनके साथ जुड़ते हैं। यदि हम अपने नगर और परिवार में भी नीतिमान व्यवहार अपनाएं, तो उनमें भी परिवर्तन संभव है—जो समुदाय को धैर्य और न्याय की दिशा में ले जाता है।
अनुवादक-चिन्हित उद्धरण
यह पाठ सार्वजनिक-डomain टिप्पणीकारों के परिप्रेक्ष्य में कई बार ऐसे भाव देता है जो Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की पंक्तियों में मिलते हैं। नीचे कतिपय संकेतित-उद्धरण दिए जाते हैं, जिन्हें स्पष्ट तौर पर उद्धृत नहीं किया गया है, बल्कि उनके सामान्य विचारों का समन्वय है:
संरेखित क्रॉस-रेफ़रेंसेस
- अन्य मूर्तिपूर्वक दया-न्याय के उदाहरण: नबीय वक्तव्यों में परमेश्वर के निर्णयों के पीछे मनुष्य की प्रतिक्रिया का तत्व।
- नबीय चेतावनियाँ और जन-उद्धार: पाप के विरुद्ध चेतावनी के साथ पुकार का आशय—ताकि लोग तड़के से लौटें।
संक्षेप
आमोस 7:3 यह दिखाती है कि परमेश्वर की योजनाएँ स्थिर नहीं, बल्कि जीवन की वास्तविकताओं पर निर्भर होकर परिवर्तनशील हो सकती हैं। मानव-पथ के प्रति उसकी प्रतिक्रिया में दया-युक्त परिवर्तन संभव है, यदि लोग सचेत होकर लौटें और न्यायपूर्ण व्यवहार अपनाएं।