Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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Passage and its immediate setting
व्यवस्थाविवरण 1:31 में लिखा है कि जंगल के दिनों में भी परमेश्वर ने अपने लोगों के साथ वैसी ही देखरेख दी है जैसी वे उनके घर में अनुभव करते हैं। वे उत्तरदायी रहे और प्रभु ने उन्हीं मार्गों पर उनको उठाये रखा जो वे चले थे, ताकि वे इस स्थान तक पहुँच सकें। यह बात प्रेरि 13:18 की स्मृति के साथ मेल खाती है, जो दिखाती है कि बुद्धिमानी और अनुशासन में जीवन के मार्गों पर ईश्वर कितने स्थिर हाथों से चलते हैं।
ईश्वर की faithfulness और मार्गदर्शन
इस आयत में एक गहरी संभावना व्यक्त है: भले ही परिस्थितियाँ बदलें, ईश्वर का साथ बना रहता है। जंगल की कठिन राहों में भी वह मार्ग दिखाता है, ताकि उनका भरोसा न टूटे और वे समझ सकें कि उनकी यात्रा निरर्थक नहीं है। यह हमें विश्वास देता है कि देवदत्त मार्ग, चाहे वह स्पष्ट दिखाई दे या नहीं, हमारे साथ है और उद्देश्यपूर्ण है।
महत्वपूर्ण शब्दावली और दृश्यार्थ
क्रॉस-विचार (Related Passages)
1) प्रेरितों के कार्य 13:18 — इतिहास के उस मोड़ पर भगवान की धैर्य और मार्गदर्शन का अनुभव— यह दिखाता है कि देवदत्त मार्ग समय के साथ कैसे संचालित होता है।
2) व्यवस्थाविवरण 8:2-3 — निव चुन कर ईश्वर की परीक्षा और उसकी दया, जो भोजन नहीं बल्कि आत्मा के सत्य पर आधारित है।
3) यशायाह 58:11 — परमेश्वर का मार्गदर्शन निरन्तर रहता है और वह यात्रा के हर कदम पर आप की सहायता करता है।
आधुनिक जीवन में अनुप्रयोग
हमारे दैनिक जीवन में यह स्मरण दिलाता है कि कठिन-सफर में भी ईश्वर विश्वासयोग्य है। निर्णयों में धैर्य रखें, और उन रास्तों को चुनें जिन्हें परमेश्वर ने सत्य माना है। चाहे जंगल या शहरी रास्ते हों, प्रभु का हाथ साथ है; वह हमारी यात्राओं को अर्थ देता है और उद्देश्य से संचालित करता है।
योग्य संदर्भों का संक्षिप्त सार
फिर भीतरी सुरक्षा और मार्गदर्शन का विश्वास, और अनुभव की कसौटी — परमेश्वर के साथ यात्रा एक सतत संरक्षण है।
नोट: नीचे दिए गए उद्धरण Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के मौलिक, public-domain उद्धरण से लिए जा सकते हैं यदि उपलब्ध हों—परन्तु इस तात्पर्य में हमने संक्षेप में स्वरूप दिया है और पूर्ण पद-लेखन नहीं जोड़ा है।