Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
व्यवस्थाविवरण 1 व्यवस्थाविवरण 2 व्यवस्थाविवरण 3 व्यवस्थाविवरण 4 व्यवस्थाविवरण 5 व्यवस्थाविवरण 6 व्यवस्थाविवरण 7 व्यवस्थाविवरण 8 व्यवस्थाविवरण 9 व्यवस्थाविवरण 10 व्यवस्थाविवरण 11 व्यवस्थाविवरण 12 व्यवस्थाविवरण 13 व्यवस्थाविवरण 14 व्यवस्थाविवरण 15 व्यवस्थाविवरण 16 व्यवस्थाविवरण 17 व्यवस्थाविवरण 18 व्यवस्थाविवरण 19 व्यवस्थाविवरण 20 व्यवस्थाविवरण 21 व्यवस्थाविवरण 22 व्यवस्थाविवरण 23 व्यवस्थाविवरण 24 व्यवस्थाविवरण 25 व्यवस्थाविवरण 26 व्यवस्थाविवरण 27 व्यवस्थाविवरण 28 व्यवस्थाविवरण 29 व्यवस्थाविवरण 30 व्यवस्थाविवरण 31 व्यवस्थाविवरण 32 व्यवस्थाविवरण 33 व्यवस्थाविवरण 34Verse
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व्यवस्थाविवरण 21:2 — संदर्भ के साथ व्याख्या
पद का प्\u200dरत्यय: “तो तेरे पुरनिये और न्यायी निकलकर उस शव के चारों ओर के एक-एक नगर की दूरी को नापें;”
तत्काल सेटिंग और टेक्स्ट का स्वर
व्यवस्थाविवरण 21—22 अध्याय उन नियमों और नीतियों की सारगर्भित रचना है जो इसके समय के समाज‑जीवन को व्यवस्थित करते थे। इस विशिष्ट वाक्य में पुरनिये (उम्रदराज पुरुष) और न्यायी व्यवस्था का उल्लेख है जो सामाजिक और कानूनी वस्तुओं की पवित्रता बनाए रखने के लिए शवों के चारों ओर दूरी तय करने की प्रक्रिया की बात करता है। यह प्रक्रिया एक सामाजिक-नैतिक तत्त्व के रूप में चित्रित है: दोष-शांत निष्पादन के बाद शहर के भीतर शांति और देह-सम्बन्धी शांति के संकेत के तौर पर दूरी का मापन।
ईश्वर से जुड़ी बात और विश्वास की शिक्षाओं की रूपरेखा
यह पाठ यह दर्शाता है कि ईश्वर की दृष्टि में समाज के हर अंश की शुद्धता महत्त्वपूर्ण है। दोष-स्वीकृति के बावजूद समुदाय के अंदर पवित्रता बनाए रखना आवश्यक है ताकि निरंतर ईश्वर‑केंद्रित जीवन संभव हो। पुरनिये और न्यायी मिलकर प्रक्रिया को सुनिश्चित करते हैं, जो एक सामाजिक व्यवस्था की सीख देता है कि नयी-जीवन की दिशा में, दोषियों के साथ-साथ समुदाय भी शास्त्रीय न्याय और नैतिक नियंत्रण से सुरक्षित रहे।
कुंजीन शब्द और चित्रों की स्पष्टता
- पुरनिया: एक समाज-नैतिक इकाई जो अनुभव और विवेक के प्रतीक के रूप में कानून-व्यवस्था पर अमल कराता है।
- न्यायी: नागरिक न्याय के संरक्षक, जो नियमों के अनुसार निर्णय लेते हैं और समुदाय की नैतिक दिशा बनाए रखते हैं।
- शव के चारों ओर दूरी: शारीरिक दूरी के साथ-साथ धार्मिक-नैतिक शुद्धि का संकेत; यह संकेत देता है कि मृत्युभूमि के प्रभाव से समुदाय को सुरक्षित दूरी बनानी चाहिए ताकि लगातार धार्मिक उल्लास कायम रहे।
संबंधित बाइबिल पाठ (क्रॉस‑रेफरेंसेस)
ये संदर्भ बताते हैं कि पूर्ण विधेय क्या है—सामाजिक व्यवस्था पर्याप्त रूप से निष्कलंक रहे और लोग धर्मसंसार की पवित्रता के अनुरोधों के अनुरूप जीवन बिताएं।
आज‑के‑समय में अनुप्रयोग
सार-सारग्राह और समापन
यह पद एक स्मारक के रूप में है कि सामाजिक‑नैतिक व्यवस्था कैसे ईश्वर की पवित्रता से प्रेरित होकर चलती है। पुरनिये और न्यायी मिलकर दृढ़ नियम बनाते हैं ताकि समुदाय के भीतर गलत प्रभाव कम रहें और ख्रीष्ट-आस्था के अनुसार एक समुदाय बन सके जो हर हाल में पवित्रता बनाए रखे।
उद्धरण (यदि आवश्यक): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke ने इस प्रकार के सामाजिक-नैतिक नियमों के प्रभाव और समसामयिक अनुप्रयोगों पर तीखी और समृद्ध टिप्पणी दी है; उनके विचारों की औपचारिक शब्दावली का संक्षेप नीचे दिया गया है:
उद्धरण संकेत: “...एकता‑पूर्वक व्यवस्था के साथ न्याय और पवित्रता का संतुलन बनना चाहिए।” (महत्वपूर्ण नोट: ऊपर के विचार संकलन‑आधारित हैं; इन विद्वानों के विशिष्टीय वाक्यों के संपूर्ण उद्धरण साइट पर उपलब्ध मूलग्रंथों से लिए जा सकते हैं।)