Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहोवा की वाणी के दावे और उनका धोखा: यहेजकेल 13:6
इस पद का सीधा अर्थ यह है कि कुछ लोग “यहोवा की यह वाणी है” कहकर अपने अपने अनुमान और दर्शन को सच मान लेते हैं, परन्तु उनका दावा व्यर्थ है और झूठा है; यहाँ तक कि वे लोगों को यह आशा दिलाते हैं कि यहोवा अपने शब्द को पूरा करेगा, फिर भी वह दायित्व- दीपक उनका नहीं है—यहोवा ने उन्हें नहीं भेजा।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
यहेजकेल के युग में इस्राएली समाज में भविष्यवक्ताओं और धर्म-नेताओं की एक प्रमुख समस्या थी: वे अपने अनुभवों और सांसारिक संकेतों के आधार पर “यहोवा की वाणी” कहकर सुनाते थे, भले ही उनका संदेश परमेश्वर से था या नहीं। परमेश्वर ने इन दावों की जाँच के बिना उनकी बातों को स्वीकार कर लेने के भाव को चुटकी में लिया था। यहां विशेषकर उन “दर्शनों” की बात है जो वास्तविकता के बजाय शुद्ध कल्पना पर टिका थे, और जो यह कहकर भरोसा बढ़ाते थे कि यहोवा का पूर्ण उद्देश्य है, परन्तु वे स्वयं प्रभु से नियुक्त नहीं थे।
पाठ के विश्लेषणीय बिंदु
क्रियात्मक दृष्टिकोण और दक्षिण पंक्तियाँ
यह पाठ हमें चेतावनी देता है कि सत्य को परखना आवश्यक है—कौन सा संदेश परमेश्वर से है और कौन सा मानव-कल्पना है। विश्वासियों के लिए यह सबक है कि न्याय और सत्यापन की कसौटी परमेश्वर के वचन की पुष्टि से हो।
समानार्थी संकेतक और क्रॉस-रेफरेंसे
प्रेरितों के समय भी ऐसे जोखिम सामने आए: कुछ लोग दिखावे से नबी बन जाते थे, परंतु उनका संदेश ईमानदार पूर्वक नहीं होता था। अन्य स्थानों पर भी लोगों के दावों की जाँच का नियम आता है ताकि गलत धारणाओं से बचा जा सके।
संक्षिप्त थीमलिस्ट
शीघ्र cross-references के साथ संयोग
1) इब्रानियों 4:12 जैसे पाठों में कहा गया कि परमेश्वर के वचन की जाँच करनी चाहिए—सूत्र में सत्यता स्पष्ट होती है। 2) यिर्मयाह 14:14 में भी भविष्यवक्ताओं के झूठे दावों की चेतावनी मिलती है, जहाँ यह कहा गया है कि वे अपने सपनों के कारण दावे करते हैं। 3) डाॅन 2:9 में राजकुल दायित्व का अवलंबन दिखता है कि अगर सच नहीं, तो दायित्व असफल रहता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
हममें से प्रत्येक को यह पूछना चाहिए: क्या मेरा अनुमान, मेरा संदेश या मेरा आह्वान वास्तव में परमेश्वर के वचन से प्रेरित है? अगर न तो उसे छोड़ देना चाहिए; अगर हाँ, तो उसे विनम्रता से, सत्य और पवित्रता के साथ प्रस्तुत करना चाहिए। यह जीवन-आधार है—भरोसा केवल दिखावे पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के वचन के सच्चे प्रमाण पर टिके रहने पर।
नोट: इस टीका में मॉडर्न टिप्पणी-पद्धति के अनुसार समाहित विचारों के साथ मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स और एड्मन क्लार्क के सार्वजनिक-domain विचारों से समेकित अवलोकन संजोया गया है।