Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यही वचन क्यों मायने रखता है
यह ezekiel 16:19 में व्यक्त वाक्य हमारे लिए एक स्पष्ट ईश्वरीय क्रिया-प्रणाली का परिचय देता है: परमेश्वर ने यहोवा के अपने चयनित लोगों को भोजन, रस, और मधु जैसी आवश्यकताओं से समर्थ किया, फिर उन चीजों को देवी-देवताओं के लिए या बाहर के आचरणों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया, बल्कि उनके सम्मुख “सुखदायक सुगन्ध” के रूप में रखा। यह दर्शाता है कि ईश्वर के उपहार कैसे भी अभिव्यक्त हों, यदि मन उनकी ओर नहीं मोड़ा जाता है, तो उन्हें भी तुच्छ लाभ समझकर उपयोग में लाया जा सकता है। यह टेक्स्ट हमें प्रभु की प्रशंसा, वैध आशीष और उस पर हमने किया गया व्यवहार—जहाँ प्रतिफल के रूप में अभिमान न हो—का संतुलन सिखाता है।
पारगम Context
यहहोज के संदर्भ में यह हिस्सा यह बताता है कि याजक-रहस्य और पत्नियों के साथ हुआ पाप किस प्रकार से फलित हुआ। मुख्य पात्र यरुशलेम की बहुविध अस्वीकृति के समय में यहूदा और उसके पुत्र-समूह के लिए एक चेतावनी है कि परमेश्वर के आशीर्वाद के साथ उन की प्रतिक्रिया कैसी होनी चाहिए। यहाँ कहा गया भोजन वह संकेत है कि प्रभु अपने लोगों के जीवन-यापन के सभी साधन देता है, परन्तु उनका हृदय और व्यवहार उसका सम्मान कैसे दिखाते हैं।
मुख्य संदेश
इस वचन का केंद्रीय विचार यह है: प्रभु के द्वारा दिया गया आहार और जीवन के स्रोत सम्मान और श्रद्धा के साथ होना चाहिए, न कि अन्य देवताओं या दास-तुल्य व्यवहार के रूप में प्रतिफलित किया जाना चाहिए। जब लोग बिना विश्वास के उन उपहारों को सुख-सुविधा के रूप में सुख लेते हैं, तब वे आत्म-उत्कर्ष में फँस जाते हैं। यह चेतावनी हमें यह भी दिखाती है कि ईश्वर अपने लोगों के जीवन को सुगंध-सी महकना चाहते हैं, परन्तु हमारी भक्ति और आचरण इस महक को बनाए रखते हैं।
आधार विचार और अन्य बाइबिल थीम
यह वचन यहूदी-प्रयोजन और मेरी-शांति के बीच संतुलन की चर्चा करता है: ईश्वर के दिये हुए आहार का सही उपयोग उसका सम्मान और यहोवा के महिमा के लिए होना चाहिए। बाइबल में खाने-पीने के संदर्भ में अक्सर यह दिखाया गया है कि कैसे सही आचार-व्यवहार और सही श्रद्धा divine पहलू को मजबूत करते हैं, जबकि असत्य worship या आलस्य से उस महक को खो दिया जा सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस
इन क्रॉस-रेफरेंसेस के जरिये समझना आसान है कि हमारा दैनिक भोजन और साधारण सुख कैसे ईश्वर की महिमा से जुड़ते हैं, बशर्ते हमारा हृदय उसे सही संदर्भ में बनाए रखे।
छोटी-सी देवotional पूंजी
ईश्वर ने जो दिया, वह हमारे लिए एक आशीष है; परन्तु यदि हमारा अभिरुचि उसे ही केन्द्र बन जाए और उसके पीछे स्वयं की प्रशंसा चल पड़े, तो वह महक फीकी पड़ जाती है। याद रखें: आहार, तेल, मधु—ये सब जीवन का संकेत हैं, पर उनका उद्देश्य ईश्वर की महिमा और लोगों के लिए उद्धार की स्वीकृति को बढ़ाना है। अपने दिनचर्या में ऐसी छोटी-छोटी चीजों के प्रति कृतज्ञता और आज्ञाकारी रहने की कोशिश करें।
सूची: प्रभावी सच का संक्षेप
व्यावहारिक प्रतिबिंब
यह वचन हमें याद दिलाता है कि खाने-खाने, उपलब्धियों और सुविधाओं के बीच ईश्वर के प्रति आस्था और कर्तव्य को कभी भुलना नहीं चाहिए। अपने आशीषों के साथ विनम्रता और सेवा की भावना बनाए रखें। एक सच-भरे हृदय से की गई प्रशंसा और आभार परमेश्वर को भाने वाली सुगन्ध है, जो व्यक्ति-समुदाय को भी आकर्षित करती है।
सूक्ष्म उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट विचारों में से आवश्यक-सी पंक्तियाँ नीचे उद्धृत हैं (जहाँ उपलब्ध):
सार-सिंहावलोकन में, ये विचार संकेत करते हैं कि प्रभु के आशीष को वही महक बनाकर रखना चाहिए जो उसकी महिमा के अनुरूप हो।