Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यहेजकेल 16:29 का বাংলা अनुरूप विवरण (HINIRV)
यशायरी-सीशु के संदर्भ में यहाकेल के प्रतीकात्मक कथा-चित्रण का भाग है, जहां ईश्वर ने यरुदन-जन्मी माँ की तरह अपनी चित्त-परख से इजराइल के पापों को उजागर किया है। इस पंक्ति में Jehoozephah के समय की जटिल राजनीतिक-व्यापारिक शर्तों के बीच इजराइल की धार्मिक प्रवृत्ति और अशुद्धता का खुलासा है—यानी व्यवहारिक जीवन में व्यभिचार और अंधविश्वास का मिश्रण। यह वाक्य कह रहा है कि ज़िन्दगी के व्यावसायिक-राजनीतिक उन्मुक्ति के साथ-साथ उनकी आत्मिक तृष्णा कैसे बंधन बनकर रह गई है, और यह कसदियों के देश तक पहुँचकर भी संतुष्टि नहीं पाती।
मूल भावार्थ और संदर्भ
यह पंक्ति यह दिखाती है कि परमेश्वर की सच्ची अपेक्षा न सिर्फ बाहरी धर्म-कार्य है, बल्कि दिल की पवित्रता और निष्ठा भी है। व्यभिचार यहाँ सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विश्वासघात, अन्य देवताओं की पूजा और विदेशी आचार-व्यवहार की दिशा में निरन्तर घूमती भूख का रूपक है। यहेजकेल अपने समय के पतन के प्रति गहरी आवाज़ उठाता है: ईश्वर के साथ विशुद्धता टूट रही है और राष्ट्र व्याकुल-उत्साह से विपथ हो रहा है।
मुख्य विषय
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) यहेजकेल 8–10 मंडल की असत्य-आस्थाओं के विरुद्ध गवाही देते हैं; यह पंक्ति भी दोष-परक जीवन की निंदा है।
2) एतिहासिक उदाहरणों में गैर-आस्था के कारण चिह्नित नगरों की गिरावट।
3) आपत्ति-सम्बन्धी चेतावनियाँ: परमेश्वर के साथ नहीं, तो अन्य देह-त्याग के साथ, जीवन की वास्तविक संतुष्टि नहीं मिलती।
व्यावहारिक चिंतन
आध्यात्मिक भूख तब तक पूरी नहीं होती जब तक हम परमेश्वर के मार्ग पर नहीं चलते। प्रेरणा यह है कि आर्थिक-राजनीतिक सफलता, सामाजिक मान-सम्मान, या अन्य विदेशी-आस्थाओं की खुराक से संतुष्टि नहीं मिलती; सत्य, पवित्र और विशुद्ध जीवन से ही आत्मिक तृप्ति मिलती है। यदि हम अपने जीवन को ईश्वर के अनुसार ढालते हैं, तो व्यभिचार और आशाओं के असंतोष का स्थान शांति और सुरक्षा ले लेती है।
संक्षिप्त समापन
यहेजकेल 16:29 हमें स्पष्ट संदेश देता है कि बाह्य समृद्धि और सांसारिक व्यवहार-विधि चाहे कितनी भी व्यवस्थित हो, यदि आत्मा परमेश्वर के साथ संकल्पित नहीं है, तो तीर्थ-आकांक्षाओं की पूर्ति संभव नहीं। ईश्वर सच्चे अंत:करण के लिए पुकारते रहते हैं—तभी आत्मिक संतुष्टि मिलती है।
सूक्ष्म उद्धरण और दीन-उद्धार
महत्वपूर्ण सार्वजनिक-डायरेक्शन उद्धरण (यदि संदर्भ मिलता है):
“क्योंकि वे अपने पापों के कारण पतन के मार्ग पर थे; और उनकी गिनती में, वे अपने हृदय की धड़कनों की धारणाओं से दूर चले गए थे।” ( Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्थक विचारों में से शैलीगत संकेत)