Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 16:43 — संदर्भ परिचय
यहेजकेल 16 में उद्धृत चित्रण यहूदा-नगर की पापपूर्ण परित्यागित अवस्था के बाहरखड़े दृश्य के साथ जुड़ा है। इस क्रम में यरुशलेम-स्त्री का अतीत, उसकी पापपूर्ण चाल-चलन और भविष्य में उसकी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट की गईं। इस विशेष पद में परमेश्वर नाराज़गी के साथ यह बतला रहा है कि उसने पहले क्या देखा और कैसे अकाल-आरोप से बचने के लिए चेतावनी दी है; अब वह कहता है कि तेरा अतीत भूला नहीं गया है और तुझ पर तेरे कर्मों का प्रभाव पड़ेगा।
केंद्रिक अर्थ
पद यह बताता है कि तेरा बचपन का स्मरण न रखना और लगातार चिढ़ाने के तौर-तरीके प्रभु के सामने आक्रोश को जन्म देते हैं। तेरे पिछले घृणित कार्यों का परिणाम तेरे सिर पर पड़ेगा। यह चेतावनी नहीं कि ईश्वर हार मान रहा है, बल्कि यह प्रेरणा है कि तू अपनी नीति को बदले और अपने पथ को सही करे।
मुख्य विषय
संबद्ध पाठ
1) यहेजकेल 16:60-63— प्रभु के साथ स्थापित वाचा के अनुसार पाप के पश्चात पुनःस्थापना संभव है जब अंतःकरण बदले।
2) व्यवस्थापिका यिर्मयाह 3:22— “पश्चात्ताप ही मुक्ति का मार्ग है” की पुकार।
3) नहेम्याह 9:33-34— परमेश्वर की करुणा के साथ पूछताछ और पाप पर परिणाम।
व्यवहारिक विचार
व्यक्ति के जीवन में बार-बार अपने पिछले कर्मों के कारण दोष-स्वरूप निराशा आती है; परन्तु परमेश्वर का संदेश यह है कि भूल-चुक को स्वीकार कर वर्तमान में सचेत निर्णय लिया जाए। अगर तू खुद के अतीत से सीखकर आज की नीतियों को बदले, तो वह स्पष्ट मार्ग दिखायेगा।
संक्षेप
यहेजकेल 16:43 में ईश्वर यह स्पष्ट करते हैं कि अतीत के निष्क्रिय स्मरण से नहीं, बल्कि वर्तमान कर्मों से स्थिति बनती है। चिढ़ाने और चलन के परिणामस्वरूप जो दंड आता है, वह पाप की दृढ़ता का परिणाम है। परन्तु सचेत परिवर्तन और प्रत्यक्ष आयुध—विश्वास व क्रिया—द्वारा पुनर्स्थापना संभव है।
प्रमुख उद्धरण (माथ्यू हेन्री, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क)
नीचे इन नैतिक टिप्पणियों के छोटे अंश सीधे उद्धृत नहीं हैं, बल्कि उनके विचारों का संक्षेप इस पाठ में समाहित किया गया है: यहूद के चतुर और चुनौतीपूर्ण आचरण की ओर संकेत करते समय क्लियर न्याय और दया के संतुलन की चर्चा करते हैं, और चालाकी के बजाय सच्चे परिवर्तन पर जोर देते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस
यिर्मयाह 31:22— परिवर्तन की आशा दिखती है कि कैसे परमेश्वर लोगों के हृदय में परिवर्तन लाते हैं; यहेजकेल 18:31— पुनःपरिवर्तन और नया जीवन संभव है जब हृदय बदले।