Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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पाठ का तत्काल संदर्भ
यहेजकेल 17:15 शासक यूदा और उसके सहयोगियों द्वारा मिस्र पर भरोसा करने की निंदा में आता है। इस प्रकरण में यहेजकेल ने राजा और राज्य की राजनैतिक चालों को ऐतिहासिक और नैतिक परिप्रेक्ष्य में व्याख्यायित किया है। वचन से स्पष्ट है कि राज्य ने सीधे परमेश्वर की गैर मौजूदगी और ऐक्यवादी निष्ठा को तोड़ कर विदेश से शक्ति माँगी—यह परमेश्वर के प्रति अस्थिर विश्वास और मूर्खतापूर्ण आश्रयों का प्रतीक है।
वचन से परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या प्रकट होता है?
यह पद बताता है कि परमेश्वर एक ऐसााधार है जिस पर उसका लोगों को भरोसा करना चाहिए। जब व्यक्ति या राष्ट्र मानवीय शक्ति—घोड़े और बड़ी सेना—के सहारे अपनी सुरक्षा समझते हैं, तब वे परमेश्वर की वाचा और उसकी नीति को तिलांजलि दे रहे होते हैं। यहेजकेल यहाँ दिखाते हैं कि बाहरी मदद से अस्थायी सुरक्षा मिल सकती है परन्तु वह परमेश्वर के न्याय और वचन की अवहेलना का परिणाम भी है। प्रश्नवाचक रूप में रखे गए वाक्य (क्या वह फूले फलेगा? क्या बच पाएगा?) परन्तु स्पष्ट नकारात्मक आशय व्यक्त करते हैं: मनुष्य की चालें परमेश्वर के निर्णय से ऊँची नहीं।
महत्वपूर्ण शब्द और प्रतिमान
• "घोड़े और बड़ी सेना"—प्राचीन समाज में यह सामरिक शक्ति और युद्ध की तत्परता का सूचक था। यहाँ यह अस्थिर मनोवृत्ति का प्रतीक है कि मनुष्य तात्कालिक सैन्य शक्ति को परमेश्वर के भरोसे पर तरजीह दे।
• "मिस्र में भेजकर बलवा किया"—मिस्र का संदर्भ इतिहास में सुरक्षा के लिए अनादर्य और विदेश सहयोग की मिसाल रहा है; यह एक संगीन राजनैतिक निर्णय था।
• "वाचा तोड़ना"—यह परित्रप्ति, विश्वासघात और परमेश्वर के साथ की गयी प्रतिज्ञा का उल्लंघन दिखाता है।
संबंधित आयतें और उनकी संक्षिप्त व्याख्या
म्याथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और ऐडम क्लार्क के संक्षिप्त उद्धरण
Matthew Henry ने लिखा है: "The king and people sought an alliance with Egypt, and thus broke their covenant with God." (संक्षेप उद्धरण रूप में प्रस्तुत) यहें टिप्पणी वाचा भंग और बुद्धिहीन राजनैतिक आश्रय पर प्रकाश डालती है। Albert Barnes ने भी चेतावनी दी कि सांसारिक उपाय परमेश्वर की अनदेखी से जुड़े खतरों को बढ़ाते हैं। Adam Clarke इस प्रकार के राजनैतिक गठबंधनों को दैवीय न्याय की दृष्टि से अनुचित बताते हैं।
आधुनिक जीवन के लिए उपदेश
आज भी हम अक्सर "घोड़ों और सेनाओं" के प्रतीक खोजते हैं—पैसा, सिद्धियाँ, गठजोड़—जो अस्थायी सुरक्षा का भ्रम देते हैं। यहेजकेल की चेतावनी हमें याद दिलाती है कि सच्चा ठोस आधार परमेश्वर के प्रति विश्वास और उसकी वचनों की निष्ठा है। जब व्यक्तिगत, पारिवारिक या राष्ट्रीय निर्णय ऐसे साधनों पर टिकते हैं जो नैतिक या आध्यात्मिक आधार पर परमेश्वर के हितों के विरुद्ध हैं, तो परिणाम अनिश्चित और अक्सर विनाशकारी होते हैं।
व्यावहारिक सुझाव:
समग्रतः यह पद चेतावनी और आमंत्रण दोनों है: चेतावनी उन पर जो मनुष्य-निर्मित आश्रयों में विश्वास करते हैं; आमंत्रण उन पर जो प्रथम स्थान पर परमेश्वर को रखना चाहते हैं।