Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
यहेजकेल 17:1 यहेजकेल 17:2 यहेजकेल 17:3 यहेजकेल 17:4 यहेजकेल 17:5 यहेजकेल 17:6 यहेजकेल 17:7 यहेजकेल 17:8 यहेजकेल 17:9 यहेजकेल 17:10 यहेजकेल 17:11 यहेजकेल 17:12 यहेजकेल 17:13 यहेजकेल 17:14 यहेजकेल 17:15 यहेजकेल 17:16 यहेजकेल 17:17 यहेजकेल 17:18 यहेजकेल 17:19 यहेजकेल 17:20 यहेजकेल 17:21 यहेजकेल 17:22 यहेजकेल 17:23 यहेजकेल 17:24



संदर्भ में संक्षिप्त परिचय
यहेजकेल 17:9 एक भाष्यात्मक प्रश्न के रूप में आता है — यहोवा नबी के माध्यम से बयां करते हैं कि क्या किसी वृक्ष से फलों के आने पर वह वृक्ष हमेशा सुरक्षित रहेगा। संदर्भ में यह दृश्य यहूदियों के विश्वासघात और राजनीतिक गठबंधनों की बिम्बात्मक आलोचना है। पिछले पदों में नबी ने सम्राटों और शासकों के बीच हुए कूटनीतिक संबंधों को वृक्षों और परिंदों के रूप में प्रस्तुत किया; अब प्रश्न के माध्यम से ईश्वर स्पष्ट करते हैं कि अस्थिर विश्वास या पराधीनता का फल स्थायी नहीं रहेगा।
मुख्य अर्थ
आयत का केंद्रीय संदेश यह है कि बाह्य दिखावे—यानी वृक्ष का फूला-फला होना—स्वतंत्र सुरक्षा का प्रमाण नहीं है। ईश्वर का प्रश्न "क्या वह फूले फलेगी?" इस बात पर जोर देता है कि जड़ से कटे बिना भी कोई जीवन दिख सकता है, पर वह अस्थायी होगा। परमेश्वर के नियंत्रण में न होने पर, विज्ञानवश या मानव प्रयास से हासिल उपलब्धियाँ टिकाऊ नहीं रहींगी।
मुख्य विषय
संबंधित श्लोक और संक्षिप्त व्याख्या
याकूब 1:11 (वृद्धि-अल्पता और अस्थिरता के विषय) — यह बतलाता है कि उसी प्रकार पृथ्वी का फूल-फला जल्दी मुरझा सकता है।
मत्ती 7:24–27 (घर के निर्माण का उदाहरण) — वहाँ भी सही जड़/नींव का महत्व बताया गया है; असल में जीवन और विश्वास की स्थिरता के लिए सही आधार आवश्यक है।
भजन 1:3 — जो व्यक्ति परमेश्वर के पास जड़ा हुआ है, वह स्थिरता एवं फल प्रदान करता है; यह इसके विपरीत विचार को परखता है।
व्यावहारिक चिंतन
यह पद हमें व्यक्तिगत और सामूहिक दोनों स्तरों पर आत्म-परीक्षण के लिए आमंत्रित करता है। क्या हमारे मार्ग, हमारे निर्णय, और हमारे गठबंधनों का आधार परमेश्वर में दृढ़ है, या केवल अस्थायी मानवीय समर्थन पर? जीवन के कठिन समय में वही टिकता है जिसका आधार गहरा और दायित्वपूर्ण होता है। सामाजिक और आध्यात्मिक निर्णयों में सततता के लिए जड़ों—मूल कारणों और मूल्यों—पर ध्यान दें।
सारांश और समेकित टिप्पणी
यहेजकेल 17:9 चेतावनी और शिक्षा दोनों है: बाहरी समृद्धि आत्म-प्रमाण नहीं है; यदि स्थायित्व चाहिए तो जड़ों — स्थायी आधार और परमेश्वर के साथ सही संबंध — पर ध्यान देना आवश्यक है। एब्राम माइकलों की परंपरा के सार्वजनिक-डोमेन विद्वानों में कुछ ने इसी विचार को रेखांकित किया है। विशेष रूप से मैथ्यू हेनरी के संक्षिप्त शब्दों को सटीक रूप में उद्धृत करना संभव नहीं है बिना पूरी पंक्ति के, पर उनकी टिप्पणियाँ अक्सर यही इंगित करती हैं कि दिखावा और वास्तविकता में अंतर करना आवश्यक है। अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने भी इसी तरह के नैतिक व धार्मिक सत्यों को उजागर किया—यानी कि परमेश्वर की नज़रों में अन्तिम निर्णय मानवीय दिखावे से ऊपर है।