Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यहेजकेल 1 यहेजकेल 2 यहेजकेल 3 यहेजकेल 4 यहेजकेल 5 यहेजकेल 6 यहेजकेल 7 यहेजकेल 8 यहेजकेल 9 यहेजकेल 10 यहेजकेल 11 यहेजकेल 12 यहेजकेल 13 यहेजकेल 14 यहेजकेल 15 यहेजकेल 16 यहेजकेल 17 यहेजकेल 18 यहेजकेल 19 यहेजकेल 20 यहेजकेल 21 यहेजकेल 22 यहेजकेल 23 यहेजकेल 24 यहेजकेल 25 यहेजकेल 26 यहेजकेल 27 यहेजकेल 28 यहेजकेल 29 यहेजकेल 30 यहेजकेल 31 यहेजकेल 32 यहेजकेल 33 यहेजकेल 34 यहेजकेल 35 यहेजकेल 36 यहेजकेल 37 यहेजकेल 38 यहेजकेल 39 यहेजकेल 40 यहेजकेल 41 यहेजकेल 42 यहेजकेल 43 यहेजकेल 44 यहेजकेल 45 यहेजकेल 46 यहेजकेल 47 यहेजकेल 48Verse
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यहेजकेल 17:18 — पाठ का तुरंत संदर्भ और अर्थ
यह verse यहेजकेल की एक दृष्टान्तिक कथा में आता है, जहाँ परमेश्वर प्रचलित सत्ता के भीतर दुनियावी पथों के बारे में संबद्ध सच दिखाते हैं। यहाँ कहा गया है कि जिसने शपथ को तुच्छ जाना, वाचा को तोड़ा, वह अपने ही आचरण से दिखाता है कि वह भविष्य की सुरक्षा के योग्य नहीं रहा। वस्तुतः यह संदेश न केवल राजनीतिक चाल-चलन के बारे में है, बल्कि विश्वास की स्थिरता और ईमानदारी की कसौटी को रेखांकित करता है: परमेश्वर के साथ किए गए वचनों की महत्ता और उनकी पवित्रता।
ईश्वर का स्वर और विश्वास की गहराई
पाठ बताता है कि परमेश्वर ऐसे लोगों को भी पहचानते हैं जो शपथ और वचन की कीमत नहीं समझते। एक ऐसी प्रवृत्ति जिसमें लोग — सत्ता, अवसर, या दबाव के चलते — सत्य और दृढ़ वचन को छोड़ देते हैं — यह परमेश्वर के लिए अस्वीकृत है। इस कारण, ऐसे व्यक्तियों को अंततः सुरक्षा नहीं मिलती; क्योंकि आचरण में पवित्र नहीं होने पर आशीष का स्थायित्व नहीं रहता। यह एक सच है जो भविष्य के निर्णयों पर भी प्रभाव डालता है: हमारी प्रतिज्ञाओं की स्थिरता ही हमारी विश्वसनीयता निर्धारित करती है।
मुख्य शब्दावलियाँ और चित्रार्थ
अन्य बाइबल संदर्भ (संरेखण और समझ)
यह पाठ अन्य जगहों के संदेशों से संगत है जो निष्ठा और सत्य की महत्ता पर बल देते हैं:
नोट: यहाँ उद्धृत पूर्ण पद के लिए संदर्भ से जुड़े अन्य पाठों को देखें, परन्तु यहाँ मैं पूर्ण पाठ के उद्धरण नहीं दे रहा ताकि मूलभाव स्पष्ट रहे।
आधुनिक दैनिक जीवन में应用
आज के समय में भी हमारे लिए यह संदेश स्पष्ट है: हमारे शपथ और वचन कैसे व्यवहार में उतरते हैं, यह हमारे विश्वास की सच्चाई को दिखाता है। यदि हम छोटे-छोटे दायित्व भी न निभाएँ तो बड़े निर्णयों में सत्यनिष्ठा खो सकती है। इसलिए, जो लोग परमेश्वर के सामने सचमुच ईमानदार रहते हैं, वे अपनी प्रतिज्ञाओं को सम्मान से निभाते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यहेजकेल 17:18 बताता है कि शपथ और वाचा की परवाह न करने से व्यक्ति की सुरक्षा और प्रतिष्ठा खतरे में पड़ती है। आस्था की वास्तविक कसौटी यही है कि हम अपने शब्द के साथ चलें और परमेश्वर के सिद्धान्तों के अनुरूप जीवन जिएँ।
Cross-references (संक्षिप्त स्पर्श)
1) अन्य जगहों पर प्रतिज्ञा और विश्वसनीयता की महत्ता: जब एक वचन निभाने की बात आए, तब इश्वर की दृष्टि में विश्वसनीयता बनाकर चलना।
2) आचरण और सुरक्षा का संबंध दिखाने वाले पाठ: कर्म और प्रतिज्ञा के मेल से आशीष की स्थायित्वता।
3) विश्वास और सत्य के साथ जीवन जीने वाले लोगों के लिए सुरक्षा के संकेत: सत्यप्रिय रहते हुए यात्रा करें, चाहे मार्ग कठिन हो।
ध्यान दें: उपरोक्त संदर्भ सीधे पाठ के शब्दों से मिलान करते नहीं हैं; मूल भाव और संरचना को संरक्षित रखते हुए स्रोतिक सम्बन्धों का संक्षिप्त उल्लेख किया गया है।